Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 15:1 अय्यूब 15:2 अय्यूब 15:3 अय्यूब 15:4 अय्यूब 15:5 अय्यूब 15:6 अय्यूब 15:7 अय्यूब 15:8 अय्यूब 15:9 अय्यूब 15:10 अय्यूब 15:11 अय्यूब 15:12 अय्यूब 15:13 अय्यूब 15:14 अय्यूब 15:15 अय्यूब 15:16 अय्यूब 15:17 अय्यूब 15:18 अय्यूब 15:19 अय्यूब 15:20 अय्यूब 15:21 अय्यूब 15:22 अय्यूब 15:23 अय्यूब 15:24 अय्यूब 15:25 अय्यूब 15:26 अय्यूब 15:27 अय्यूब 15:28 अय्यूब 15:29 अय्यूब 15:30 अय्यूब 15:31 अय्यूब 15:32 अय्यूब 15:33 अय्यूब 15:34 अय्यूब 15:35



मुख्य व्यাখ्या बिंदु
अय्यूब 15:32 में कहा गया है कि दुष्टों का भाग्य उनके नियत दिन से पहले ही विजय की राह से काट दिया जाएगा, और उनकी डालियाँ हरी न रहेंगी। यह वाक्य संदेश देता है कि दुष्टों की सफलता अस्थायी है और परमेश्वर की न्याय की दिनचर्या उनके जीवन के अंत में स्पष्ट हो जाती है। यह पंक्ति भय, आशीर्वाद, और भगवान के निर्णय की अपरिहार्यता के साथ एक चेतावनी है कि ताकत और स्थिति के बावजूद, जीवन का असली ठिकाना ईश्वर के नियमों के आधार पर ही निर्धारित होता है।
पाठ-संदर्भ और साहित्यिक संदर्भ
यह शास्त्र अय्यूब के मित्रों के अति-जोशीले तर्कों के बीच आता है, जहाँ क्लेस-आलोचनात्मक तर्कों के विपरीत यह अविश्वासजनक आक्रोश के बावजूद ईश्वर के न्याय की सच्चाई की याद दिलाता है। अय्यूब के मित्रों की धारणा अक्सर-दुःख के कारण भगवान के न्याय के मानक पर केंद्रित रहती है; यहाँ वचन बताता है कि दुष्टों की “डालियाँ हरी न रहेंगी”—यानी उनकी स्थायित्व और सफलता क्षणभंगुर है, जबकि परमेश्वर की सुईचिता स्थिर रहती है।
पूर्व-आख्यानिक तसवीर
सूक्त में दुष्टों के जीवन-क्रम का अनुमान उनके नियत दिन से पहले टूटना बतलाता है—यह एक प्रकार का संकेत है कि परमेश्वर समय के अनुसार न्याय करता है। यह विचार, पुराने नियम से जुड़ा है जहाँ पाप के परिणाम साधारणतः समय आने पर सामने आते हैं। साथ ही यह विश्वास देता है कि अभी दिखने वाली कठिनाई के भीतर भी परमेश्वर का चिरस्थायी उद्देश्य काम कर रहा है।
धार्मिक महत्त्व
इस वचन का theological संदेश यह है कि नैतिक-सत्यता का अर्थ केवल बाहरी सफलता नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय और नीति की अधीनता है। दुष्टों की सफलता क्षणिक होती है; ईश्वर के राज्य के प्रति विश्वस्त रहने वाले लोग भी कठिनाइयों में रहते हैं, परन्तु सत्य यह है कि ईश्वर की योजना में न्याय और निष्ठा बनाए रखना जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप आधिवेशन
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
अय्यूब 15:32 हमें संकेत देता है कि दुष्टों की सफलता अस्थायी है और अंततः उनके लिए निराशा ही बाकी रहती है, क्योंकि परमेश्वर की नियत दिन और न्याय का नियम अपरिहार्य है। सुख-सफलता भले दिखे, पर वास्तविक स्थायित्व तभी है जब जीवन ईश्वर के मार्ग और सत्य के अनुरूप हो। इन विचारों को याद रखकर विश्वास ग्रंथों के भीतर धैर्य और आत्म-विश्वास बना रहता है।
भिन्न-भिन्न commentary traditions से संक्षेप कर विश्लेषण को समेकित करते हुए नीचे के पंक्तियाँ देखें:
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकेतों का उपयोग न्यूनतम रूप में किया गया है; यदि उपलब्ध हो तो उनकी सीधे उद्धृत सूक्त वाक्यों के संकेत रखे गए हैं:
उद्धृत नहीं मिलने पर उनके विश्लेषणों का सार यहाँ समाहित है जिसे पाठक के समझ के अनुसार स्थानांतरित किया गया है।