Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 41:1 अय्यूब 41:2 अय्यूब 41:3 अय्यूब 41:4 अय्यूब 41:5 अय्यूब 41:6 अय्यूब 41:7 अय्यूब 41:8 अय्यूब 41:9 अय्यूब 41:10 अय्यूब 41:11 अय्यूब 41:12 अय्यूब 41:13 अय्यूब 41:14 अय्यूब 41:15 अय्यूब 41:16 अय्यूब 41:17 अय्यूब 41:18 अय्यूब 41:19 अय्यूब 41:20 अय्यूब 41:21 अय्यूब 41:22 अय्यूब 41:23 अय्यूब 41:24 अय्यूब 41:25 अय्यूब 41:26 अय्यूब 41:27 अय्यूब 41:28 अय्यूब 41:29 अय्यूब 41:30 अय्यूब 41:31 अय्यूब 41:32 अय्यूब 41:33 अय्यूब 41:34


अय्यूब 41:28 पर केंद्रित टिप्पणी
मुख्य व्याख्या बिंदु: ईश्वर इस दृश्य में अपने अद्भुत और अजेय अधिकार का प्रमाण देते हैं। शत्रु का कोई भी तंत्र और शस्त्र उसे नहीं रोक पाएगा; प्रयास चाहे तीर से हो या गोफन के पत्थरों से, वह सारे बेमतलब ठहर जाते हैं क्योंकि यह परिवर्तनकारी प्रभु की सत्ता है। आयुध और छल के सभी प्रयास अंततः उसकी दिव्यता के सामने छोटा पड़ जाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ और पाठ-विन्यास
यह पद अय्यूब की परीक्षा और परमेश्वर के आत्मिक अधिकार के बीच एक तीखे विरोध contrast प्रस्तुत करता है। शत्रु के शस्त्रों के असफल होने की यह तस्वीर भगवान की महिमा और नियंत्रण को विजयी रूप से प्रकट करती है। गोफन के पत्थर या भूसे की समानताएं गऱी क्षणों में एक शक्तिशाली विरोधी के विरुद्ध भी ईश्वर की क्रिया कैसे अचूक रहती है, इस बात पर जोर देती हैं।
धार्मिक-तत्व और theological significance
1) प्रभु की प्रभुसत्ता: तीर से भगाने या अन्य उपायों से रोक पाने में असमर्थता उन शक्तियों की नहीं, बल्कि उन उपायों की सीमा है जो सृष्टिकर्ता के समक्ष टिक नहीं पाते। 2) दुष्ट योजनाओं का निर्धारण: भले ही लोग अपने तरकश और कुटिल सोचे, पर वह परमेश्वर की योजनाओं के आगे तुच्छ हैं। 3) विश्वास की परीक्षा: अय्यूब को यह स्मरण दिलाता है कि कठिनाई में भी ईश्वर की सत्ता अक्षुण्ण है, और उसकी योजना एक अज्ञात कारण के पीछे चलती है जो पृथ्वी के दृष्टांतों से परे है।
अन्य पुरालेख-टिप्पणियाँ (Cross-references)
संभावित प्रश्न-मनन (Reflection)
कथात्मक निष्कर्ष
यह पद दिखाता है कि ईश्वर की सत्ता उन हर चाल से ऊपर है जो संसार के लोग गढ़ते हैं—भले ही व्यक्ति तीर चला ले या गोफन के पत्थर उछाले। गोफन के पत्थर भूसे थे, किन्तु भगवान के सामने सब कुछ निरर्थक सिद्ध होता है जब वह अपने उद्देश्य की रेखा में होते हैं। अय्यूब को यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना और उसकी शक्ति अटल है, और विश्वास में ही वास्तविक शांति मिलती है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण बेहद संक्षिप्त रूप में उपयोग किए गए हैं; उपर्युक्त विचार उनके सामान्य प्रवचनों से प्रेरित भावना का संक्षेप हैं, बिना पूर्ण उद्धरण के।