Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
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अय्यूब 5:4 — तत्कालीन संदर्भ और पाठ का अर्थ
पद का पृष्ठभूमि: अय्यूब के मित्रों के संदेशों के क्रम में Eliphaz का यह दृश्य है कि परमेश्वर अत्याचारियों को दण्ड देता है और वहीं विपत्ति में पीड़ित को चेतावनी की नज़र से देखा जाता है। इस संदर्भ में verse 4 बताता है कि बच्चों की सुरक्षा कैसे छिन जाती है और वे फाटक-चौखट पर पीसे जाते हैं; कोई ऐसा नहीं जो उन्हें छुड़ाए। यह उद्धरण एक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाता है जिसमें अकाल, अस्पताल-सा संघर्ष या परिवारिक विघटन के कारण समाज पर असर पड़ता है।
सूत्र से सीख — भगवान और आस्था की दृष्टि
इस पंक्ति में गहरे प्रश्न उठते हैं: दुष्टों के बजाय धर्मी क्यों पीड़ित होते हैं? जय-यश्व-की बजाय, क्यों बंधन और हार? इस पाठ में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया कि पीड़ा के पीछे एक स्पष्ट कारण है या नहीं; परन्तु यह दिखाता है कि जीवन की असुरक्षा और दुर्घटना के समय परमेश्वर की संप्रभुता के साथ मानवीय प्रतिक्रिया कैसे होनी चाहिए। कुछ पुरातन टिप्पणीकार यह मानते हैं कि पीड़ा के दौरान ईश्वर की उपस्थिति और सहायता की चिंता करना, शांति और धैर्य को बढ़ाता है।
मुख्य शब्द और चित्रों की स्पष्टता
सम्बंधित आयतें (छोटे उद्धरण नहीं) और उनका सार
प्रस्तावित क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतार्थ):
पुनर्संयोजन और व्यावहारिक.application
आज के पाठक के लिए यह पाठ एक स्मरण है कि कठिन समय में भी ईश्वर की संप्रभुता और उदारता की संभावना बनी रहती है। यह दिखाता है कि समाज के कमजोर वर्ग—बच्चे, बुजुर्ग, निर्धन—के प्रति हमारा दायित्व कितना बड़ा है। ऑथोरिटेटिव उत्तर यह है कि ईश्वर अन्याय के बीच भी भक्तों की सुरक्षा और सहायता का मार्ग बनाते हैं, भले ही तुरंत दिखाई न दे।
महत्वपूर्ण स्पर्श बिंदु — एक समेकित निष्कर्ष
यह श्लोक भयावहता को नहीं बढ़ाता, बल्कि यह हमारे नैतिक दायित्व को उजागर करता है—कमज़ोरों के साथ न्याय, समुदाय की सुरक्षा, और संकट के समय ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना।
एतिहासिक-आधार के उद्धरण (संश्लेषण)
डायरेक्ट टेक्स्ट उद्धरण: यदि इनमें से कोई भी मानक टिप्पणीकार के शब्द उद्धृत हों, तो वे विशेषत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलनों से प्रकाश डालते हैं। (नोट: नीचे दिए गए सीमित उद्धरण केवल संदर्भ-उद्धरण के संकेतक हैं; पूर्ण अंश साइट पर उपलब्ध हो सकते हैं।)
संक्षिप्त संरचना: पाठ का आरम्भ—सम्बन्धित शब्द और चित्र—क्रॉस-रेफरेंसे—आधुनिक अनुप्रयोग।
छोटा उद्धरण स्रोत (यदि उपलब्ध हों)
“यहाँ बच्चों की सुरक्षा का हनन और समाज की असंरक्षित स्थिति हमारे समय के लिए भी चेतावनी है।” — Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की टिप्पणी में समान भाव मिल सकता है (स्थानीय पाठ-संदेश के अनुसार उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं)।
नोट: ऊपर की प्रस्तुत सामग्री मौलिक रूप से हिंदी पाठ के लिए लिखी गई है और प्रकाशन-तैयार प्रकाशन शैली में है। क्रॉस-रेफरेंसेस संक्षेप में दिए गए हैं ताकि पाठक निर्बाध तरीके से संदर्भ समझ सकें।