अय्यूब 5:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह तुझे छः विपत्तियों से छुड़ाएगा*; वरन् सात से भी तेरी कुछ हानि न होने पाएगी।

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अय्यूब 5:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु

अय्यूब 5:19 में प्रयुक्त उद्धरण वह संदेश देता है कि परमेश्वर भरोसेमंद संकटों में भी सहायता करेगा—छः विपत्तियों में से उद्धार मिलेगा और सातों से हानि नहीं होगी। यह निश्चय हमें यह सीख देता है कि परमेश्वर का संरक्षण विवेकपूर्ण समय पर प्रकट होता है, और विपत्ति के बीच भी अनुभवजनित राहत उसकी करुणा की वजह से संभव है।

पाठ-संदर्भ के भीतर साहित्यिक परिप्रेक्ष्य

यह वाक्य अय्यूब की कठिनाई के बीच एक आश्वासन स्वर है, जिसे कवि-स्तर की संकल्पना के साथ प्रस्तुत किया गया है—यानी परमेश्वर के संरक्षण की गारंटी, भले ही सामाजिक-आर्थिक विपत्ति, शारीरिक पीड़ा या वैचारिक संकट क्यों न हो। यह बंधन योद्धाओं जैसी दृढ़ता के साथ कहा गया है कि जब योग्यता, विश्वास और धैर्य निकट हों, तब परमेश्वर सहायता के स्रोत होते हैं।

धर्मशास्त्रीय महत्व

वाक्य में सात से भी अधिक भयावह घटनाओं के विरुद्ध सुरक्षा का संकेत है; यह केवल दैवीय सुरक्षा की प्रकृति का उल्लेख नहीं, बल्कि उनकी किंचित् गाथा को दर्शाता है कि परमेश्वर किस प्रकार विवादित दौरों में भी अपने भक्त के साथ है। यह भरोसा देता है कि परमेश्वर की पूर्ति में त्रुटि नहीं और उसकी रक्षा सभी प्रकार की विपत्तियों पर प्रभावी रहती है।

पारिश्रिक सम्बन्ध (Cross-references) और उनके तात्पर्य

  • यशायाह 43:2 - जल-आउर अग्नि के बीच भी ईश्वर साथ रहता है; इससे प्रेरणा मिलती है कि विपत्तियाँ समय-समय पर आती हैं, पर उद्धार भी वहीं है।
  • भजन 91:7-10 - विकट समय में ईश्वर के निरंतर संरक्षण का प्रीय संकेत; प्रतिकूलताओं में भी सुरक्षा उपलब्ध रहती है।
  • याकूब 1:12 - धैर्य की परख में ईश्वर की इनामदेही की बात; जो धैर्य बनाकर खड़ा रहता है, उसका उद्धार स्थिर रहता है।

ये संदर्भ बताते हैं कि संकट के बीच भी परमेश्वर की सुरक्षा और पुरस्कार की संभावना बनी रहती है, और विश्वास का मार्ग धैर्य से होकर गुजरता है।

विचार-विमर्श के सवाल

  • क्या आप अपने जीवन में ऐसी स्थितियाँ अनुभव करते हैं जहाँ आप परमेश्वर की सहायता को महसूस करते हैं, भले परिस्थितियाँ विपरीत हों?
  • कौन-सी प्रेरणाें हैं जो आपको कठिन समय में भी आशा के साथ टिके रहने का साहस देती हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

अय्यूब 5:19 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर संकट के समय भी अपने विश्वासी को सुरक्षित रखता है—छः विपत्तियाँ या सातों के आगे भी उसका संरक्षण असंदिग्ध रहता है। यह कथन एक जीवंत आश्वासन है कि विश्वासयोग्य के लिए परमेश्वर की करुणा और मदद अनिवार्य है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हो।

पूर्वधारणा-रेखा (Public-domain विचारधारा से संयोजन)

कई पुरानी टीकाओं में कहा गया है कि परमेश्वर की सहायता समयानुसार और व्यक्ति-घटित आवश्यकता के अनुसार प्रकट होती है। मार्केट-युग के नहीं, बल्कि जीवन के पाठों में यही सत्य दृष्टिगोचर होता है—यहाँ भी यह बात मिलती है कि विपत्ति के बीच परमेश्वर काेंद्रित संरक्षण स्थिर रहता है।

उद्धरण-नोट: नीचे दिए गए तीन उद्धरण अगर उपलब्ध हों, वे सीधे पहले तीन समर्थक टीकाओं से लिए गए हैं—मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क—परन्तु यहाँ केवल उनका संक्षिप्त स्वरूप उद्धृत किया गया है ताकि पाठकों को मुख्य विचार स्पष्ट रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 5:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 34:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 34:19 (HINIRV) »
धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सबसे मुक्त करता है। (नीति. 24:16, 2 तीम. 3:11)

1 कुरिन्थियों 10:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 कुरिन्थियों 10:13 (HINIRV) »
तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है: और परमेश्‍वर विश्वासयोग्य है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। (2 पत. 2:9)

नीतिवचन 24:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 24:16 (HINIRV) »
क्योंकि धर्मी चाहे सात बार गिरे तो भी उठ खड़ा होता है; परन्तु दुष्ट लोग विपत्ति में गिरकर पड़े ही रहते हैं।

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