Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 10:1 यूहन्ना 10:2 यूहन्ना 10:3 यूहन्ना 10:4 यूहन्ना 10:5 यूहन्ना 10:6 यूहन्ना 10:7 यूहन्ना 10:8 यूहन्ना 10:9 यूहन्ना 10:10 यूहन्ना 10:11 यूहन्ना 10:12 यूहन्ना 10:13 यूहन्ना 10:14 यूहन्ना 10:15 यूहन्ना 10:16 यूहन्ना 10:17 यूहन्ना 10:18 यूहन्ना 10:19 यूहन्ना 10:20 यूहन्ना 10:21 यूहन्ना 10:22 यूहन्ना 10:23 यूहन्ना 10:24 यूहन्ना 10:25 यूहन्ना 10:26 यूहन्ना 10:27 यूहन्ना 10:28 यूहन्ना 10:29 यूहन्ना 10:30 यूहन्ना 10:31 यूहन्ना 10:32 यूहन्ना 10:33 यूहन्ना 10:34 यूहन्ना 10:35 यूहन्ना 10:36 यूहन्ना 10:37 यूहन्ना 10:38 यूहन्ना 10:39 यूहन्ना 10:40 यूहन्ना 10:41 यूहन्ना 10:42



यूहन्ना 10:28 का अर्थ
इस वचनों में यीशु अनेक विश्वासियों को स्पष्ट कह रहे हैं कि वे अनुत्तरित सुरक्षा में हैं: अनन्त जीवन उन्हें दिया गया है, वे कभी नाश नहीं होंगे, और उनकी सुरक्षा किसी भी बाहरी शक्ति के कारण नहीं टूटेगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूहन्ना की गवाही में यीशु shepherd की तरह अपने sheep (आख्यान) की सुरक्षा के बारे में बोलते हैं। यह पाठ भोज, शैतान के चंगुल, और नष्ट होने की संभावना से दूर, विश्वासियों की पुख्ता सुरक्षा पर केन्द्रित है। भिन्न व्यवस्थापन में यह विचार कि “जीवन उनकी है और वे सुरक्षित हैं” यीशु की पहचान और उनके कार्य के साथ जुड़ा हुआ है: वे अपने शिष्य और उनके लिए अर्पित जीवन के मूल्य को दर्शाते हैं।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथात्मक और पंरपरागत अंतर्दृष्टि
यहूदियों के बीच यीशु की सुरक्षा-भाषा ने उनके धार्मिक अधिकार और परमेश्वर के साथ संबंध की पुष्टि की; Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे পাব्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सार-आइनों के अनुसार यह दुरुपयोग से बचाने वाला संकेत है—जीवन-सुरक्षा ईश्वर की प्रतिज्ञा और यीशु के माध्यम से प्राप्त है, न कि मानवीय प्रयासों से।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य संबंधित पद
1) रोम 8:38-39—न तो मृत्यु, न जीवन, न प्राणी शास्त्र, न कोई और क्रिया, हमें उसकी प्रेम से ले離 सकती है; यह भी प्रमेय सुरक्षा को पुष्ट करता है।
2) यूहन्ना 6:37—जो मुझे भेजा गया है, उसको मैं कभी नहीं त्यागता; जो मेरे पास आता है, मैं उसे अंत तक ग्रहण कर लेता हूँ।
3) 1 यूह. 5:13—इन बातों को मैं तुम्हें लिखता हूँ ताकि तुम ईश्वर में उद्धार को अपना निजी अनुभव समझो।
व्यावहारिक निष्कर्ष
विश्वास में स्थिरता पाने के लिए सकारात्मक विश्वास रखें कि ईश्वर की गवाही और यीशु के कार्य आपके संरक्षण का आधार हैं। हर दिन अपने विश्वास को जीवित रखने के लिए प्रार्थना, पवित्रशास्त्र पढ़ना और कमज़ोरों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करें।
उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सार से प्रेरणा मिली है; उनके कभी-कभी 18वीं शताब्दी के व्याख्याकारी शब्दों से संक्षेप में प्रयुक्त विचार संयोजन प्रस्तुत किया गया है।