Old Testament
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यूहन्ना 16:1 यूहन्ना 16:2 यूहन्ना 16:3 यूहन्ना 16:4 यूहन्ना 16:5 यूहन्ना 16:6 यूहन्ना 16:7 यूहन्ना 16:8 यूहन्ना 16:9 यूहन्ना 16:10 यूहन्ना 16:11 यूहन्ना 16:12 यूहन्ना 16:13 यूहन्ना 16:14 यूहन्ना 16:15 यूहन्ना 16:16 यूहन्ना 16:17 यूहन्ना 16:18 यूहन्ना 16:19 यूहन्ना 16:20 यूहन्ना 16:21 यूहन्ना 16:22 यूहन्ना 16:23 यूहन्ना 16:24 यूहन्ना 16:25 यूहन्ना 16:26 यूहन्ना 16:27 यूहन्ना 16:28 यूहन्ना 16:29 यूहन्ना 16:30 यूहन्ना 16:31 यूहन्ना 16:32 यूहन्ना 16:33



यूहन्ना 16:27 का सरल अर्थ
यह वचन बताता है कि पिता का प्रेम प्रकट होता है क्योंकि यीशु ने कहा है कि वह पिता की ओर से आया है और उसने प्रेम रखा है। विश्वास से भरे heart के साथ प्रभु पर भरोसा रखने वाले लोगों के लिए यह प्रेम कई गुना उजागर होता है: पिता अपने प्रेम से अनुग्रहित करता है और यीशु के साथ संबंध को गहरा करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूहन्ना 16 में यीशु के चेलों के साथ उसकी विदाई तिनकी बातें चल रहीं थीं, जब वह उनसे भविष्य की घटनाओं के बारे में बताता है। 27वां पद यह स्पष्ट करता है कि पिता का प्रेम क्रिया-प्रधान है और वह प्रेम तब और भी साकार होता है जब चेलों ने यीशु से प्रेम रखा है और विश्वास किया है कि वह पिता की ओर से आया है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1. पिता का प्रेम पहले से है, लेकिन यीशु के माध्यम से वह प्रेम हमारे प्रति प्रकाशित होता है। यह प्रेम स्वाभाविक नहीं, बल्कि प्रभु के कार्य की परिणति है।
2. विश्वास की भूमिका। यह वाक्य साफ करता है कि प्रेम और विश्वास एक दूसरे से जुड़ते हैं—हमने यीशु पर प्रेम किया है और यह विश्वास है कि वह परम पिता से आया है।
3. पिता से आने की विधा। यीशु की साक्षी पहचान बताती है कि वह पृथ्वी पर परम पिता के प्रतिनिधि हैं; यह हमारे लिए ईश्वर के योजना-परक प्रेम की पुष्टि है।
2-3 बिंदु-युक्त सार
अन्य उपयुक्त आयतन
रू 8:35-39 में पिता के प्रेम की अटूट सुरक्षा पर बल दिया गया है कि प्रभु के प्रेम से ही हम मृत्यु से जीते रहते हैं; यूहन्ना 14:9-11 में पिता के स्थान पर यीशु की उपस्थिति प्रेम की पूर्ण प्रकटता है; 1 यूहन्ना 4:10-12 में प्रेम का मूल कारण परमेश्वर है और इस प्रेम के कारण हम भी एक दूसरे को प्रेम करते हैं।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसे
1) रोमी 8:38-39— प्रेम के बराबर नहीं कुछ भी हमें उसे अलग कर सकता। यह हमारे विश्वास को दृढ़ करता है कि पिता का प्रेम अडिग है।
2) यूहन्ना 14:9— पिता और पुत्र के बीच का एकत्व और प्रेम की मात्रा को स्पष्ट करता है।
3) 1 यूहन्ना 4:19— हम प्रेम को क्योंकि उसने पहले हम से प्रेम किया, और यह प्रेम यीशु के माध्यम से प्रकट हुआ।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग यीशु पर विश्वास और प्रेम रखते हैं, वे परम पिता के प्रेम का अनुभव करें। जीवन के कठिन समय में भी यह प्रेम आश्वस्त करता है कि हम ईश्वर के साथ गहरे संबंध में हैं। अपने दैनिक अनुभवों में प्रेम को व्यवहार में लाएं—प्यार, विश्वास, और परस्पर विनम्रता के साथ एक दूसरे की सुरक्षा बनें।
कहावत के अनुसार, “पिता स्वयं प्रेम रखते हैं”—यह उद्घोषणा हमें सिखाती है कि प्रेम न केवल सूनाक्रिया है, बल्कि क्रिया-प्रधान है; हमारी स्थिति नहीं, बल्कि परमेश्वर की क्रिया है जो प्रेम से भरे रिश्तों को बनाती है।