Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 16:1 यूहन्ना 16:2 यूहन्ना 16:3 यूहन्ना 16:4 यूहन्ना 16:5 यूहन्ना 16:6 यूहन्ना 16:7 यूहन्ना 16:8 यूहन्ना 16:9 यूहन्ना 16:10 यूहन्ना 16:11 यूहन्ना 16:12 यूहन्ना 16:13 यूहन्ना 16:14 यूहन्ना 16:15 यूहन्ना 16:16 यूहन्ना 16:17 यूहन्ना 16:18 यूहन्ना 16:19 यूहन्ना 16:20 यूहन्ना 16:21 यूहन्ना 16:22 यूहन्ना 16:23 यूहन्ना 16:24 यूहन्ना 16:25 यूहन्ना 16:26 यूहन्ना 16:27 यूहन्ना 16:28 यूहन्ना 16:29 यूहन्ना 16:30 यूहन्ना 16:31 यूहन्ना 16:32 यूहन्ना 16:33



संक्षेप अर्थ
यूहन्ना 16:2 में Jesus स्पष्ट करते हैं कि उनके अनुयायियों को आराधनालयों से निष्कासित किया जाएगा, और उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग उन्हें मार डालेंगे, वे धार्मिक रीति-रिवाज की परवाह करते हुए ऐसा करेंगे क्योंकि वे परमेश्वर की सेवा करने का भ्रम बनाए रखते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि ईश्वर के वास्तविक काम को बचाने की दृष्टि से वे लोग असंवेदनशीलता और कुंठित विश्वास के कारण असहाय पदचिह्न दिखाते हैं।
पाठ का संदर्भ-प्रसंग
यह वाक्य यूहन्ना के گॉस्पेल का भाग है जहाँ यीशु अपने शिष्यों को भविष्य की पीड़ा के बारे में सचेत करते हैं। यह उनके द्वारा पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखे यूहन्ना-योद्धा में आता है, जिसमें शिष्यों को प्रेरित करते हैं कि वे विश्व से विरोध के बावजूद विश्वास में दृढ़ रहें। आराधनालयों से निष्कासन एक वास्तविक सामाजिक और धार्मिक दबाव था, जो मसीह-विश्वास के साथ जुड़ा था।
interpretive observations (शीर्षक: व्याख्यासूत्र)
छोटा थीमैटिक सूची
अन्य संदर्भ-प्रतिबिंब
1) नौत्सम-प्रेरित धारणाएँ: यह चेतावनी पुराने नियम के धार्मिक विरोधाभासों से मिलती-जुलती है, जहाँ समाज ने ईश्वर की सेवा को पहचानने में बाधाएँ खड़ी कीं।
2) शास्त्रीय टिप्पणी से संयोग: मार डाले जाने के विचार से प्रेरित, अन्य शिक्षाओं में भी ईश्वर-कार्य के लिए विवेकपूर्ण करुणा और धैर्य की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
3) क्रूस-सम्बन्धी संकेत: यह सूक्ति भविष्य में मसीह के कष्टों के साथ जुड़ी है, जिसे शिष्य भी अनुभव करेंगे, परन्तु परमेश्वर की योजना के अनुसार यह सद्भाव से भरा रहेगा।
आध्यात्मिक निष्कर्ष (Practical takeaway)
यदि संसार हमारे विश्वास पर विरोध करता है तो भय नहीं मानना चाहिए; instead, सत्य के प्रति दृढ़ता और प्रेम के साथ व्यवहार करना आवश्यक है। हमें अपने में ऐसी निष्ठा विकसित करनी चाहिए कि हम बाधाओं के बीच भी ईश्वर के काम को आगे बढ़ाएं और दूसरों के लिए नम्रता से सम्मान बनाए रखें, भले ही वे हमें आहत करें।
Cross-references (संघર્ષ-उद्धरण-व्याख्या)
यूहन्ना 15:18–20— संसार हमारे पीछे न पड़े तो मसीह के अनुयायी होने पर खतरे की सूचना देता है; यह वचन उसी विचार को ठोस करता है कि असहाय विरोध के बीच भी हमारा उद्देश्य ईश्वर की महिमा होनी चाहिए।
भजन 27:4— एकाग्रता और सत्य की खोज; समाजिक दबाव के बीच आस्था को बनाए रखने का प्रेरक पाठ देता है।
मत्ती 10:21–22— परिवार में भी बटवारे के समय, विरोध के बावजूद विश्वास बनाए रखना कैसे संभव है; यह हमारे धैर्य और दृढ़ता की पुष्टि करता है।
ध्यान दें: नीचे उद्धृत पूर्ण साहित्य से संक्षिप्त विचार लिए गए हैं, परन्तु वास्तविक पंक्तियाँ यहाँ नहीं दी गईं।
विशेष नोट
इस पाठ के साथ प्रसिद्ध सार्वजनिक-डायरेखा टिप्पणीकारों के विचार: आदि माता-हेनरी, अलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संक्षिप्त विचारों का समन्वय किया गया है, ताकि पाठक को पवित्र ग्रंथ के साथ-साथ उन विद्वानों की समझ भी मिले।