Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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भविष्यवाणी का सरल अर्थ
यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद में भी अति-उठान-चालें व्यक्ति के अहंकार और गलत कामों को प्रोत्साहित कर सकती हैं। दाख के समय और बोने के समय के विषमताएं एक ही पाठ में बार-बार होने वाले स्वार्थी लाभभोग के संकेत हैं—जब लोग अपने सुख-स्वार्थ के लिए कानून-ताकत का दुरुपयोग करते हैं और देश को असुरक्षित, अस्थिर बनाते हैं। निश्चिन्त बसे रहने के शब्द देश की सुरक्षा और समृद्धि के विचार को व्यक्त करते हैं, किन्तु वेसी सुरक्षा सांसारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ निष्कपट आस्था और धर्मसंगत व्यवहार से आती है।
सं contextual पृष्ठभूमि
लैव्यव्यवस्था 26 अध्याय में परमेश्वर के विधान से संपूर्ण जीवन-जगत की संरचना दिखती है—आशीष और अभिशासन दोनों का क्रम. इस वचन में खेती के कर्म-व्यवहार के उदाहरण दिए गए हैं ताकि यह स्पष्ट हो कि धर्मोपदेश का दृष्टिकोण आर्थिक कार्यों पर भी लागू होता है। दाख और बोना, दोनों क्रियाओं में समान मापदंड—कर्म और नियम-पालन—की ज़रूरत है। पाठक से अपेक्षा यह है कि वह अपने तरीके का जीवन परमेश्वर के आदेश के अनुरूप ढाल ले।
interpretive observations
छोटे विषय-विवेचन के बिंदु
संबद्ध पद और उनके संक्षेप-दृष्टान्त
यहाँ के विचार अन्य वचनों से कुछ इस प्रकार जुड़ते हैं:
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारा व्यवहार चाहे आर्थिक हो या पारिवारिक, मालिक-जागरूकता के साथ होना चाहिए: अपने लाभ की अंधी चाह नहीं, बल्कि ईश्वर-आदेश के अनुरूप व्यवहार. जब भी हम दूसरों के साथ न्यायपूर्ण और उदार रहते हैं, तब समाज में स्थिरता और ईश्वरीय आशीष का अनुभव रहता है।
Cross-references (संयोगी संदर्भ)
1) व्यवस्थायें और समानता—उद्धृत संदर्भों में यह दर्शाते हैं कि समृद्धि और सुरक्षा ईमानदारी, न्याय और प्रेम पर टिकी होती है।
2) सामाजिक न्याय—दोष-शासन के विरुद्ध एकता और समुदाय के हित में कानून-पालन कितना आवश्यक है, यह देखिए।
3) आशीष का स्रोत—भोजन और सुरक्षा के विषयों में परमेश्वर के वचन से आशीष प्राप्ति का मार्ग स्पष्ट होता है।
उद्धरण संकेत
यदि आपके पास Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की विशिष्ट उद्धरण हैं, तो वे इस पाठ के व्याख्या में सहायक हो सकते हैं। इस पाठ के लिए कोई ठोस पूर्ण उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है, किन्तु इन टिप्पणीकारों के सामान्य रुझान (धर्मनिष्ठता, समाज-न्याय और परमेश्वर-स्वीकृति का महत्व) इस संपादन में आंतरिक रूप से समन्वित हैं।
नोट: यह commentary शुद्द पाठ-संयोजन के अनुरूप, सरल हिंदी अभिव्यक्ति में है और प्राथमिक पाठ के अर्थ के अनुरूप ही है।