Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 26:45 काImmediate Setting
यह पद उन वचनों के क्रम में आता है जहां परमेश्वर अपने लोगों के प्रति वायदा, दंड और उद्धार की योजना को दोहराते हैं। शास्त्र के पहले भाग में यदि वे पथभ्रष्ट हों, तो दंड की चेतावनियाँ मिलती हैं; परन्तु पश्चात्ताप और आंतरिक परिवर्तन के लिए भी आशा रहती है। इस पद में परमेश्वर अपने पुराने वाचा-सम्बन्ध की स्मृति को पुनः प्रस्तुत करते हैं—यह स्मरण उनके पितरों से जुड़ा है, जिन्हें मिस्र से निकालकर वह परमेश्वर के रूप में मान्यता देते हैं। यह वाचा अब भी स्थिर है और वह यहोवा है, उसका दयालु और निर्भर करने योग्य नाम।
प्योरिटी और विश्वास के बारे में दृश्यक
यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर अपनी भलाई के लिए अपने लोगों के इतिहास को स्मरण करता है। पंक्तियाँ संकेत करती हैं कि वाचा का पालन और परमेश्वर के नाम की घोषणा, केवल नियम-पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यक्तिगत सम्बन्ध का निर्माण है। इस प्रकार परमेश्वर अपने चयनित लोगों के साथ एक अपनत्वपूर्ण दया-निष्ठा दिखाते हैं, जो उन्हें अतीत के अनुभवों से प्रेरणा लेकर भविष्य की आशाओं की ओर अग्रसर करती है।
महत्वपूर्ण शब्द और imagery (कुछ ठहराव)
संबंधित पाराग्राफ़
1) यहोवा के उद्धार के इतिहास से जुड़ी रक्षा की प्रेरणा देता है—जो भविष्य में भी जारी रहेगी।
2) वाचा और नाम की स्थिरता पर बल देता है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ सत्यता के साथ बना रहता है।
3) पूर्वजों के साथ सम्बन्धित स्मरण, नए पीढ़ी के लिए भरोसा और सम्मान की नींव है।
वर्तमान अनुप्रयोग
हम कैसे इस वचन को अपने जीवन में उतारें? यह वादा हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक निरंतर और व्यक्तिगत सम्बन्ध रखना चाहते हैं। जब हम कठिन समय में भयभीत हों, तब भी हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर ने अतीत में हमारा उद्धार किया है और वह आज भी वही है। परिवार, समुदाय और व्यक्तिगत रीति-रिवाजों के माध्यम से हम अपनी आस्था को मजबूत करें—याद रखें कि वह “मैं यहोवा हूँ” है, जो अपनत्व के साथ अपने लोगों को फिर से बुलाता है, आज भी।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत-सीधे उद्धरण नहीं)
- पूर्वजों के दायित्वों और स्मरण के विषय में संदर्भ: दानिय्येल/यशायाह के स्मरणीय उद्धार-यादियाँ।
- उद्धार के इतिहास का पुनः स्मरण, जो परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को पुष्ट करता है।
- यहोवा के नाम की पहचान और उसमें आशा का स्रोत होने के बारे में विचार।
মुख्य उद्धरण (उद्धृत संस्करणों के हल्के संकेत)
पात्र उद्धरणों के रूप में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पुराने टुकड़ों से निर्भर विचार सम्मिलित हैं; इन लेखकों के सीधे पूर्ण पाठ kathaa के हिसाब से यहां छोटे-छोटे संदर्भ मिलते हैं, परन्तु यहाँ पूर्ण पाठ नहीं लिखा गया। उनके विचार इस प्रकार हैं:
• Matthew Henry (संक्षेप): परमेश्वर अपने बच्चों के साथ स्थिर वाचा और उद्धार-यात्रा को स्मरण कराते हैं; भक्ति-स्थितियाँ स्मरण से शुरु होती हैं।
• Albert Barnes (संक्षेप): परमेश्वर के नाम की घोषणा और उद्धार इतिहास के स्मरण से ईमानदार विश्वास बनता है।
• Adam Clarke (संक्षेप): दुत्कार के बाद भी वाचा की स्थिरता और उद्धार का स्मरण परमेश्वर के प्रेम का प्रमाण है।
नोट: ऊपर दिए गए तीनों commentators के छोटे-से उधृत-तत्व अलग-अलग शब्दों में, पर एक ही मूल संदेश को पुष्ट करते हैं — भलाई, स्मरण और ईश्वर-नाम की विश्वसनीयता।