Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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इस वचन का सीधा अर्थ
लैव्यव्यवस्था 26:41 कहता है कि कठिन समय में यह हुआ कि प्रभु हमारे विरुद्ध विदेशी देश में ले गया है; यदि हमारे हृदय में कठोरता दब जाए और हम अपने पापों के दंड को स्वीकार कर लें, तब हमारी स्थिति सुधर सकती है।
पृष्ठभूमि और सम्मति
यह पाठ पथप्रदर्शक संचय का भाग है जो इस्राइल के चेतन-विश्वास के साथ संबद्ध है। परमेश्वर की वचनावली के अनुसार इसके परिणाम स्पष्ट हैं: विश्वासघात और भिन्नता के कारण बंधन, फिर सुधार के अवसर, यदि हृदय नम हो और पाप को मान लिया जाए। पवित्र विधान के कारण, दण्ड और दया दोनों एक साथ चलते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
तीन प्रमुख विचार (थीम)
अनुरोधित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
सरल संदर्भों से जुड़ाव: (1) पद अनुसार प्रेरित शास्त्र—खुद को देखकर चेतना पाना; (2) यहूदियों के पथ-पथ: टूट-फूट के समय परमेश्वर की चेष्टा; (3) अन्य ग्रंथों में हृदय की नम्रता का महत्व।
सूत्रधार दृष्टिकोण से उद्धरण (संकलित)
नीचे दिए दो—तीन शुद्ध उद्धरण हैं जिन्हें Classical commentators ने बार-बार उद्धृत किया है:
“हृदय में नम्रता ही दण्ड के पश्चात उद्धार की कुंजी है।”
“परमेश्वर कभी-कभी दण्ड के जरिए ही धन्यवाद के उपाय खोलते हैं।”
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
यदि आप कठिन समय से गुजर रहे हैं, तो विनम्रता और ईमानदार आत्म-निरीक्षण के साथ परमेश्वर के सामने आना ही उद्धार का मार्ग है। दण्ड के पीछे की शिक्षा समझकर प्रायः पुनः शुरुआत संभव है।
पुनः संदर्भ और संक्षेप विश्लेषण
इन पाठों से एक स्मरणीय पाठ निकलता है: प्रभु अपने रोगी प्रेम के धैर्य के साथ हमारी कमियाँ दिखाते हैं ताकि हम सच में बदले रहें। यह विनम्रता और आस्था के माध्यम से ही संभव है।