लैव्यव्यवस्था 25:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ; मैं तुम्हें कनान देश देने के लिये और तुम्हारा परमेश्‍वर ठहरने की मनसा से तुमको मिस्र देश से निकाल लाया हूँ।

लैव्यव्यवस्था 25:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

लैव्यव्यवस्था 25:38 का संदर्भ और सार

यह वचन परमेश्वर की पुत्र-प्रजा के प्रति सुस्पष्ट वचनबद्धता को दर्शाता है: यहोवा कहता है कि वह उनका परमेश्वर है और उन्हें वह कनान देश देगा; यह भी स्पष्ट करता है कि उन्होंने मिस्र से निकलकर एक ठहरने के लिये चुना गया है, ताकि उनके निवास और पालन-पोषण में परमेश्वर की योजना पूरी हो। इस पाठ में दान और दायित्व का संतुलन है: परमेश्वर की कृपा से मिलता है घर-आवास, और उस घर को बनाए रखने हेतु उनका आत्म-समर्पण आवश्यक है।

मुख्य अर्थ

यह आयत परमेश्वर के साथ स्थाई सम्बन्ध की पुष्टि है। इस अनुच्छेद के भीतर यहोवा अपना नाम और भूमिका दोहराते हैं: वे सुख-शांति का स्रोत हैं और उनका वादा उनके निवास-स्थल की पहचान है। मिस्र से निकासी उनकी स्वतंत्रता की शुरुआत है, और कनान देश इस स्वतंत्रता के पूर्णाधार के रूप में प्रस्तुत है।

कुंजी तत्व

  • परमेश्वर का परिचय: यहोवा खुद को उनका ईश्वर बताता है, जो उनके जीवन-यात्रा का आधार है।
  • यात्रा का लक्ष्य: कनान-देश देना, ताकि वह एक ठहराने वाले निवास के रूप में उचित रहे।
  • धर्मीय-आस्था और प्रत्युत्तर: उनकी निकासी का उद्देश्य सिर्फ भौतिक स्थान नहीं, परन्तु परमेश्वर के साथ स्थिर सम्बन्ध की स्थापना है।

दो-तीन प्रमुख विषय

1) वाचा और भूमि: परमेश्वर की प्रतिज्ञा उनके भीतर एक संरचनात्मक इतिहास बनाती है—न केवल जमीन, बल्कि उसकी उपलब्धता और सुरक्षा की भरोसा।

2) उद्धार का उद्देश्य: मिस्र से निकलना एक उद्धारक घटना है, जो ईश्वर की योजना में नए समाज की स्थापना के संकेत देती है।

3) दायित्व-आस्था: प्रजा को ही नहीं, बल्कि वे खुद भी इस दायित्व को स्वीकारें: ईश्वर का परमेश्वर होना और उनकी इच्छाओं के अनुसार जीवन बिताना।

संबद्ध आयत-सम्पर्क

• निर्गमन 6:7 में परमेश्वर यह कहता है कि वह उनका अभिषेक, उनका परमेश्वर बन रहा है—यह इस वचनों के साथ एक योगपूर्ण संबंध बनाता है कि वह किस प्रकार उद्धार और करुणा के साथ उनके साथ है।

• निर्गमन 19:5-6: यदि वे मेरी वाणी मानेंगे, तो वे एक विशेष राष्ट्र बनेंगे—यह आयत इस योजना की सार्वजनिक अनुभूति को पुष्ट करती है कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन परमेश्वर की योजना से जुड़ा है।

• भाषा: व्यवस्थाविधि 26:3-9 में इसी विषय की वृद्धि है कि परमेश्वर के साथ वाचा का मूल्य क्या है और वह कैसे उनके जीवन को दिशा देता है।

व्यावहारिक विचार

हम किस प्रकार इस वचन से प्रेरणा लेते हैं? पहला, ईश्वर के साथ स्थिर सम्बन्ध को प्राथमिकता दें—यही सुरक्षा और शांति की कुंजी है। दूसरा, हमारे सामान्य जीवन में भी «स्थिर-घर» की खोज होनी चाहिए—स्थिरता और समुदाय की संरचना में परमेश्वर की योजना का हिस्सा बनना। तीसरा, उद्धार के पथ में प्रभु के सामने अपने दायित्वों का स्वीकार और पालन जरूरी है; यह वाचा-जीवन का वास्तविक अभ्यास है।

छोटी चर्चा, टीका-सीधी

मैथ्यू हेनरी, ऐलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के शब्दों में यह समझ बनी रहती है कि परमेश्वर की नीयत सिर्फ एक भू-स्थान देने की नहीं, बल्कि एक सेतु रचना है: वह अपने लोगों को एक समुदाय के रूप में बनाते हैं ताकि उसी के द्वारा वह विश्व के सामने ईश्वर की महिमा दिखा सकें। उनके विचारों के छोटे अंश इस प्रकार हैं: “ईश्वर अपने लोगों के लिए एक ठहराव देता है,” और “उद्धार का उद्देश्य जीवन-चारित्र में दिखना चाहिए।”

संक्षेप

यह verse यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों को कनान देश के रूप में लक्ष्य के साथ दे रहा है; वह उनका परमेश्वर है, और उनकी निकासी का मकसद एक स्थिर समाज बनाना है जहाँ उनका जीवन प्रभु के वचनों के अनुसार चलता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लैव्यव्यवस्था 25:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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लैव्यव्यवस्था 11:45 (HINIRV) »
क्योंकि मैं वह यहोवा हूँ जो तुम्हें मिस्र देश से इसलिए निकाल ले आया हूँ कि तुम्हारा परमेश्‍वर ठहरूँ; इसलिए तुम पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।”

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निर्गमन 20:2 (HINIRV) »
“मैं तेरा परमेश्‍वर यहोवा हूँ, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात् मिस्र देश से निकाल लाया है।

गिनती 15:41 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 15:41 (HINIRV) »
मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्‍वर हूँ, जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल ले आया कि तुम्हारा परमेश्‍वर ठहरूँ; मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ।”

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