Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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सीधे कथन की सार-संरचना
लैव्यवoggयव्यवस्था 25:55 में कहा गया है कि इस्राएली परमेश्वर के दास हैं; वे मिस्र देश से निकाले गए दास हैं; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। इस वाक्य का तात्पर्य यह है कि उनका दासत्व परमेश्वर के परिवार के सदस्यत्व के साथ जुड़ा है, न कि वे मानव-स्वामित्व के अधीन केवल व्यापारिक दास हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय पितृ-निर्देशक कानूनों का हिस्सा है जो दास-स्वामित्व, दास-सम्बन्ध और दासत्व से संबंधित अधिकार-उत्तरदायित्व निर्धारित करते हैं। इस्राएल के दासत्व का इतिहास यहूदी समाज के लिए एक स्मारक है: वे मिस्र के दास थे; ईश्वर ने आशीष से मुक्त किया और अब वे उसके निवास-घटकों का हिस्सा हैं। यह बोध दासत्व की सामाजिक मान्यताओं और धर्म-संस्थाओं के बीच संतुलन बनाता है: दास बनना यदि आवश्यक हो भी, तब भी परमेश्वर के प्रति मान-सम्मान और दायित्व शेष रहते हैं।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
अनुशीलित विचार (Cross-references के साथ)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क से संक्षिप्त संदेशन
यह तीनों टिप्पणीकार संयुक्त रूप से इस विचार पर प्रकाश डालते हैं कि दासत्व का दायरा बाहरी स्थिति से अधिक आंतरिक निष्ठा और परमेश्वर-सेवा के प्रति समर्पण है। यदि उपलब्ध हो, तो निम्नलिखित बिंदु उद्धृत हैं:
मैथ्यू हेनरी: “इस वचन में दासत्व के सामाजिक नियमों के भीतर भी परमेश्वर का उद्देश्य स्पष्ट है: वह अपने लोगों को याद दिलाते हैं कि वे उसके सदस्यों के रूप में चलते हैं।”
एल्बर्ट बर्न्स: “यह कानून इस बात का संकेत देता है कि दास और मुक्तिवास के बीच परमेश्वर की दृष्टि में कोई बड़ा अंतर नहीं; यह व्यक्ति के हृदय और परमेश्वर के निर्देश के पालन पर निर्भर है।”
एडम क्लार्क: “यही कारण है कि दासत्व के संदर्भ में भी परमेश्वर का स्वामित्व सर्वोपरि है; और वह कहता है कि दासत्व के समय भी ईश्वर के नाम की महिमा बने।”
तर्क-सार और उपयोगी निष्कर्ष
इस वाक्य से एक स्पष्ट पाठ निकलता है: परमेश्वर के दास के रूप में उनके सदस्यत्व और उनके नाम पर जीना, बाहरी दासत्व से भी ऊपर है। हमारे जीवन में इसका अनुप्रयोग यह है कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, परमेश्वर के प्रति निष्ठा और सेवा सर्वोपरि होनी चाहिए; और समाजिक नियमों के भीतर भी दया, न्याय और सम्मान की मर्यादा बनी रहे।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway