Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 25:47 का संदर्भ और उसका अर्थ
इस वचन का क्षेत्र उन दिनों के आर्थिक और सामाजिक दायरे को स्पष्ट करता था, जब दास-स्वामित्व, मध्यस्थता और परदेशी (यात्रिक) स्थिति सामान्य थी। जब किसी परदेशी या यात्री के धन-सम्पत्ति में वृद्धि हो जाती थी और उसी समय एक यहूदी भाई कंगाल हो जाए, तो उन स्थितियों के बीच व्यवहार कैसे तय होते थे, इसका यह नियम संकेत देता है।Verse का केंद्र यह है: दया और न्याय का संतुलन—कठोरता बनाम दयालुता, और समुदाय के भीतर जिम्मेदारी।
ईश्वर या विश्वास पर जो पाठ दर्शाता है
यहाँ यह दिखता है कि परमेश्वर की व्यवस्था समाज के हर सदस्य की गरिमा और सुरक्षा पर दृष्टि रखती है। ऐसे समय में जब किसी परदेशी या यात्री की स्थिति कमजोर हो, विश्वासयोग्यता और समुदाय की करुणा से उसे सहायता मिलनी चाहिए। यह कानून बताता है कि धन के कारण अन्याय नहीं किया जा सकता, और आर्थिक दबाव में भी भाई-भतीजे की गरिमा बनाए रखी जाए।
प्रमुख शब्दों या चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
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आज के संदर्भ में व्यवहारिक आवेदन
1) आर्थिक दबाव के समय भी सम्मान और गरिमा बनाए रखना: अगर कोई आर्थिक कठिनाई में है, तो उसकी स्वतंत्रता को रोका नहीं जाए; उसे न्याय के दायरे में मदद दी जाए।
2) समुदाय की जिम्मेदारी: परदेशी या यात्री की सुरक्षा और सम्मान के लिए स्थानीय समाज को आगे आना चाहिए; यह न सिर्फ कानून की einge्त but समाजी नैतिकता का भी परिचय है।
3) दयालुता और सीमाओं का संतुलन: चोट लगने पर दोषारोपण न हो; आवश्यक सहायता दी जाए ताकि समाज में आर्थिक असमानता के कारण अन्याय न हो।
कथन-उद्धरण (सूक्ष्म उल्लेख)
यह अनुभाग उपयुक्त समय-रेखा में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के छोटे-उच्चारणों के साथ संकलित किया गया है। यदि आप चाहें, तो मैं इनमें से क्षणिक उद्धरणों को चयनित करके संक्षेप में प्रस्तुत कर सकता हूँ।
सार-सार: एक unified निष्कर्ष
लैव्यव्यवस्था 25:47 यह संदेश देता है कि समुदाय के हर सदस्य की गरिमा और स्वतंत्रता परमेश्वर के लिए समान है। जब एक भाई कंगाल हो जाता है और दूसरा संपन्न है, तो समुदाय की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि धन के कारण अन्याय न हो और गरीब की रक्षा की जाए। यह विश्वास-आधारित समाज की पहचान है जहाँ करुणा, न्याय और सम्मान एक दूसरे के पूरक हैं।