Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 13:1 निर्गमन 13:2 निर्गमन 13:3 निर्गमन 13:4 निर्गमन 13:5 निर्गमन 13:6 निर्गमन 13:7 निर्गमन 13:8 निर्गमन 13:9 निर्गमन 13:10 निर्गमन 13:11 निर्गमन 13:12 निर्गमन 13:13 निर्गमन 13:14 निर्गमन 13:15 निर्गमन 13:16 निर्गमन 13:17 निर्गमन 13:18 निर्गमन 13:19 निर्गमन 13:20 निर्गमन 13:21 निर्गमन 13:22



आर्थ— निर्गमन 13:3 का सार
इस पवित्र उद्धरण की मुख्य बात यह है कि परमेश्वर ने मिस्र से बाहर निकलने के अनुभव को स्मरणीय बना कर इस्रायली लोगों को विश्वास और आजीवन अनुपालन के लिए प्रेरित किया। यह आज भी यहूदियों और ईसाइयों के लिए एक स्मरणीय मोड़ है कि कैसे उद्धार दिव्य हाथ से आता है, और कैसे अनुग्रह के साथ उनकी जीवन शैली नवीन निर्धारित होती है।
संदर्भ परिचय
निर्गमन 13 अध्याय मूसा-युग के इस्राएली समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण स्मृति बनाता है: पृत्वी मिस्र से निष्कासन के बाद, किस प्रकार उनका पहला उत्सव और पावनता-सम्बन्धी आदेश स्थापित किया गया। यह पाठ जो पवित्रोग के आरंभिक चरणों में है, वह दास मर्यादा से मुक्त होकर भगवान के उद्धार का स्मरण कराता है; खमीरी रोटी का निषेध एक अनुष्ठानिक संकेत है कि स्वयं उनका नियम बदल रहा है—शान्त जीवन, पवित्र आचरण, और निर्भरता भगवान पर।
व्याख्यात्मक अवलोकन
तीन मुख्य विचार
अनुभागीय cross-references
- यशायाह 52:12: उद्धार के कारण और निर्भरता के साथ नई राह पर चलने का आह्वान। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्धार से मुक्त होना एक नया आरंभ है।
- 1 कुरिन्थियों 5:7-8: खमीरी रोटी के प्रकार की परंपरा—पैशलाव के प्रतीक के रूप में, पवित्रता के उत्सव की आदत बनना।
- रोम 6:6-7: पुराने आत्म-उन्मुख जीवन की मृत्यु और नए जीवन की आरंभिकता—उद्धार के साथ जुड़ी नैतिक परिवर्तन की आवश्यकता।
व्यावहारिक सीख
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि उद्धार की स्मृति व्यक्ति के आचरण में स्थायित्व स्थापित करे। अपने दिनचर्या में परमेश्वर के उपकारों को समाहित करें, और जीवन-स्तर को क्षणभंगुर आरामों के बजाय ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप ढालें।
कुँचित व्याख्यात्मक उद्धरण
इस्लामिक संदर्भ से भिन्न, यह भाग ऐतिहासिक टिप्पणी के रूप में है; नीचे हिंदी-स्तर पर संक्षिप्त विचार दिए जाते हैं:
“फिर मूसा ने लोगों से कहा, इस दिन को स्मरण रखो…”
यह विचारMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से संबद्ध है—परन्तु यहाँ संक्षेप में समाहित हैं; पूर्ण उद्धरण साइट-आधार से देखें।
समाप्न बात यह है कि उद्धार की स्मृति एक जीवनगति बनती है—हर दिन परमेश्वर के बँधे हुए आदेशों के साथ आगे बढ़ना।