Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 14:1 लूका 14:2 लूका 14:3 लूका 14:4 लूका 14:5 लूका 14:6 लूका 14:7 लूका 14:8 लूका 14:9 लूका 14:10 लूका 14:11 लूका 14:12 लूका 14:13 लूका 14:14 लूका 14:15 लूका 14:16 लूका 14:17 लूका 14:18 लूका 14:19 लूका 14:20 लूका 14:21 लूका 14:22 लूका 14:23 लूका 14:24 लूका 14:25 लूका 14:26 लूका 14:27 लूका 14:28 लूका 14:29 लूका 14:30 लूका 14:31 लूका 14:32 लूका 14:33 लूका 14:34 लूका 14:35
क्यों यह श्लोक महत्वपूर्ण है
लूका 14:2 में एक व्यक्ति का उल्लेख है जो यीशु के सामने जलोदर (लैप्रोसी) के रोग से ग्रस्त था। यह छोटा-सा वर्णन उस समय के सामाजिक, धार्मिक और दयालुता-संकल्पों पर प्रकाश डालता है। यह श्लोक हमें बताता है कि यीशु का स्वास्थ्य-चिकित्सा का दृष्टिकोण केवल रोग का उपचार नहीं था, बल्कि समाज में बहिष्कारित लोगों के साथ सहानुभूति और उन्हें वापिस सामुदायिक जीवन से जोड़ना भी था।
मौलिक संदर्भ
यह घटना फ़रिसियों के घर में घटित होती है, जहाँ यीशु खाने के लिए आमंत्रित थे। उस समय जलोदर व्यक्ति का उपस्थिति विशेष रूप से जिज्ञासु है क्योंकि लैप्रोसी से ग्रसित व्यक्ति आमतौर पर समुदाय से अलग रहते थे और सामुदायिक रीति-नियमों के अनुसार वे शुद्ध-अशुद्ध नियमों के कारण भीड़ से दूर रहते थे। इस पृष्ठभूमि में यह दृश्य दिखाता है कि यीशु उन सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं जो पीड़ितों को और भी अधिक अलग कर देती हैं।
मुख्य संदेश
एक साथ तीन तत्त्व उभरकर आते हैं:
समर्थक बाइबिल विषय
यह श्लोक निम्न बाइबिल विषयों से जुड़ा हुआ है: दया का व्यवहार (हितकर कार्य), संभालने की शक्ति और धार्मिक व्यवस्था बनाम मानवीय आवश्यकता। यीशु की सेवाकारी परंपरा अन्य स्थानों पर भी मिलती है जहाँ वह बीमारों को छुकर या बोलकर चंगा करते हैं और सामाजिक बहिष्कार को चैलेंज करते हैं।
प्रासंगिक संदर्भ
कई अन्य स्थान इस श्लोक को रोशनी देते हैं:
मिश्रित पारंपरिक टिप्पणियाँ
मैथ्यू हेनरी ने संक्षेप में यह कहा है कि यीशु की दया "सबसे स्पष्ट निष्ठा का परिचय" है; अल्बर्ट बार्न्स ने इस प्रकार की घटनाओं को यह दिखाने के लिए उद्धृत किया कि यीशु सामाजिक नियमों पर मानवता को प्राथमिकता देता है; एडम क्लार्क ने ध्यान दिलाया कि इस तरह की पात्रताएँ मसीहा के अधिकार और प्रेम दोनों को प्रकट करती हैं। (इन टिप्पणियों का उद्धरण संक्षेप में हैं।)
अंतिम निष्कर्ष और ध्यानार्थ बात
लूका 14:2 का छोटा दृश्य हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की सेवा में संवेदनशीलता और साहस दोनों चाहिए—संवेदनशीलता उन परिजनों के प्रति जो अलग-थलग पड़े हैं, और साहस धार्मिक या सामाजिक बाधाओं को पार करने का। व्यक्तिगत रूप से यह श्लोक हमें प्रेरित करता है कि हम अपने आसपास के 'बहिष्कृत' लोगों की ओर देखें, उनकी मानवीय गरिमा को बहाल करें और करुणा के व्यावहारिक कार्य करें।
ध्यानार्थ प्रार्थना: हे प्रभु, हमें वह दृष्टि और साहस दे कि हम अपने समाज की वेनिरहित और अकेले पड़े लोगों के पास जाकर दया और समर्थन दिखा सकें। आमेन।