Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 14:1 लूका 14:2 लूका 14:3 लूका 14:4 लूका 14:5 लूका 14:6 लूका 14:7 लूका 14:8 लूका 14:9 लूका 14:10 लूका 14:11 लूका 14:12 लूका 14:13 लूका 14:14 लूका 14:15 लूका 14:16 लूका 14:17 लूका 14:18 लूका 14:19 लूका 14:20 लूका 14:21 लूका 14:22 लूका 14:23 लूका 14:24 लूका 14:25 लूका 14:26 लूका 14:27 लूका 14:28 लूका 14:29 लूका 14:30 लूका 14:31 लूका 14:32 लूका 14:33 लूका 14:34 लूका 14:35



लूका 14:21 का प्रवचनोंमय सार: दास का उत्तर और स्वामी की दयालु व्यवस्था
यह पद लूका की कथा के बीच एक विशेष पाठ प्रस्तुत करता है जहाँ दास ने अपने स्वामी को आरोपित हालात बताए और इसके बाद स्वामी ने नगर के गरीबों को बुलाने की आज्ञा दी। यह वाचा और प्रकटित करुणा दोनों का संयोजन है: जिम्मेदार दासी-धारणा, क्षमा-आह्वान और राजा के दयालु बनाम सामाजिक-नियमों का उल्लंघन। उद्घाटन कथा में न केवल दास की सच्चाई उजागर होती है, बल्कि स्वामी की क्रोध-न नहीं, बल्कि क्रोध के पीछे की वस्तु और अंततः उसके उदारकार्य की दिशा भी दिखती है।
कथा के भीतर verse-वार प्रकाश
पंक्ति का मूल भाव यह है कि दास ने देश-भ्रमण नहीं किया, बल्कि स्वामी की बातों को सच-सच बताने में ईमानदारी बरती। तब स्वामी ने अपने क्रोध को नियंत्रित करते हुए क्षेत्र छोड़कर नगर के ग़रीब, अशिक्षित और शोषित वर्ग को बुलाने की आज्ञा दी। इस निर्माण से यह संकेत होता है कि परमेश्वर का राज्य, सामाजिक सीमाओं को तोड़कर, कष्ट और अभाव में पड़े लोगों के लिए खुला है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ (Main spiritual lesson)
अनुकरणीय तुलनात्मक विचार (Cross-references)
1) मत्ती 22:9-10: राजा की यह प्रतिक्रिया कि लोग बाहर जा कर दिये गये निमंत्रण को ग्रहण करें, बताती है कि ईश्वर का राज्य बहिरी-परंपराओं के पार है।
2) याकूब 2:5: ईश्वर ने दया-सम्पन्न लोगों को प्रस्तावित किया है, वे जो समाज की दृष्टि में कमज़ोर माने जाते हैं, उन्हें भी विरासत मिलती है।
3) रोम 9:25-26: प्रभु ऐसे लोगों के लिए भी अपनी योजना बनाते हैं जो सामान्य रूप से चिह्नित नहीं होते, ताकि वह अपने उद्धार के काम को प्रदर्शन करे।
व्यावहारिक आवेदन (Application)
हम कैसे प्रतिक्रिया दें? पहला, अपने सामाजिक पूर्वाग्रहों से मुक्त रहें और उन लोगों के प्रति करुणा और सम्मान दिखाएं जिनके पास भूख, बीमारी या गरीबी जैसी कमी है। दूसरा, समुदाय में योगदान दें—खाली जगहों को भरना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को साथ लेकर चलना। तीसरा, ईमानदारी से अपने जीवन के दायित्वों को देखिए: ईश्वर की दया को न सिर्फ स्वीकारें, बल्कि दूसरों के लिए भी उसी दया के मार्ग खोलें।
संक्षेप (Summary)
लूका 14:21 बताता है कि परमेश्वर का राज्य सामान्य सामाजिक मानकों से ऊपर उठकर सभी के लिए खुला है, खासकर उन लोगों के लिए जो जीवन के हाशिये पर रहते हैं। दास की स्पष्ट व्यथा और स्वामी की करुणा एक संतुलन बनाते हैं—सच्ची आज्ञाकारिता और उदारता का समन्वय। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि पवित्रता और प्रेम तब ही पूर्ण हो सकते हैं जब我们 उन सबसे कमजोरों के साथ जुड़कर उनका उद्धार-कार्य साझा करें।
हिंदी-टीका से उद्धृत संकेत: “यह ईश्वर का राज्य है जो सामाजिक दायरों के भीतर नहीं रुकता; वह ग़रीबों, शोषितों के लिए खुला है।”