Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 15:1 लूका 15:2 लूका 15:3 लूका 15:4 लूका 15:5 लूका 15:6 लूका 15:7 लूका 15:8 लूका 15:9 लूका 15:10 लूका 15:11 लूका 15:12 लूका 15:13 लूका 15:14 लूका 15:15 लूका 15:16 लूका 15:17 लूका 15:18 लूका 15:19 लूका 15:20 लूका 15:21 लूका 15:22 लूका 15:23 लूका 15:24 लूका 15:25 लूका 15:26 लूका 15:27 लूका 15:28 लूका 15:29 लूका 15:30 लूका 15:31 लूका 15:32
लूका 15:26 पर संदर्भ-स्थिति और समझ
यून की कहानी में यह पद उन क्षणों से जुड़ा है जब कुलदीपक ने अपने पुत्र के लौटने की सूचना सुनी। दास से पूछा गया: “यह क्या हो रहा है?” यह स्थिति बताती है कि घर लौटेupe युवा के लिए उत्साह और चिंता एक साथ है, और परिवार की प्रतिक्रिया में स्पष्टता, न्याय तथा करुणा सब कुछ एक साथ पनपते हैं।
इस पाठ से ईश्वरीय विश्वास के बारे में क्या ज्ञान मिलता है
इस वाक्य में परमेश्वर के दिल की एक नजाकत उभरती है: वह विवशता या अनुचित व्यवहार पर कठोरता नहीं दिखाता, बल्कि लौटने वाले पर प्रेम और समझ से व्यवहार करता है। पिता के घर की दृष्टि से यह दिखता है कि परमेश्वर का शासन क्षमा, स्वागत और पुनःस्थापन पर टिका है।
शब्दों और imagery की व्याख्या
अनय पाठ जो संबंध बताते हैं
इस घटनाक्रम के साथ तीन प्रमुख cross-references अक्सर उद्धृत होते हैं:
यथार्थ-आवेदन (आज के जीवन के लिये)
इस वाक्य से हम सीखते हैं कि जब किसी को घर लौटने का अवसर मिलता है, तब परिवार और समुदाय का उन्मुख व्यवहार प्रेम और सम्मान पर टिकता है. यह संकेत देता है कि गलत निर्णय लेने के बाद भी ईश्वर हमारा स्वागत करता है, और समाज को भी क्षमा और पुनःस्थापना की शिक्षा देनी चाहिए। भरोसा रखें कि भगवान का घर उस व्यक्ति के लिए खुला है जो मुरझाए हुए रास्तों को छोड़ कर सत्य की ओर लौटता है।
संक्षिप्त समेकन
यह पाठ भगवान के दिल की करुणा को उजागर करता है: लौटे हुए पुत्र के लिए घर का दरवाजा खुला, दास की चिंता में भी निर्णय की clarity है, और परिवार की प्रतिक्रिया विकल्प नहीं, बल्कि प्रेम का प्रदर्शन है।
नोट: इस लेख में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण केवल यदि उपलब्ध हों तो सचित्र शामिल किए जा सकते हैं; नीचे साफ-सीधे उनके मूल संदेश के अनुरुप समेकित शैली अपनाई गई है।