Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 15:1 लूका 15:2 लूका 15:3 लूका 15:4 लूका 15:5 लूका 15:6 लूका 15:7 लूका 15:8 लूका 15:9 लूका 15:10 लूका 15:11 लूका 15:12 लूका 15:13 लूका 15:14 लूका 15:15 लूका 15:16 लूका 15:17 लूका 15:18 लूका 15:19 लूका 15:20 लूका 15:21 लूका 15:22 लूका 15:23 लूका 15:24 लूका 15:25 लूका 15:26 लूका 15:27 लूका 15:28 लूका 15:29 लूका 15:30 लूका 15:31 लूका 15:32



मुख्य व्याख्या: पिता की उदारता और पापी पुत्र की दूरी
लूका 15:13 में छोटे पुत्र का गाँव-छोड़कर दूर देश जाना एक बार फिर यह संकेत देता है कि धन, मान और आत्म-स्वाभिमान के प्रति आकर्षण कितनी आसानी से परम विश्वास से दूर कर देता है। वह क्षण दर्शाता है कि स्वतंत्रता की ओढ़नी कभी-कभी पाप और विपत्ति की राह खोल देती है; परन्तु पिता की भाषा और वचन उसे फिर से अपने घर की ओर लाने की उम्मीद बनाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ
यह पदार्थ लूका 15 का एक त्रिः-कटक कहानी-खंड है जिसमें तीन चरित्र, एक पिता, एक बड़ा पुत्र, और एक छोटा पुत्र, परिचय के साथ संघर्ष और करुणा का चित्रण करते हैं। छोटे पुत्र ने अपनी संपत्ति की माँग कर शून्य स्वार्थ को दिखाया है और दूर देश जाकर कुकर्म भरे मनोरथों में धन उड़ा दिया। यह पाठ जीवन के आध्यात्मिक अवतार का प्रतीक है—हम कौन-से मोड़ पर अपने प्रभु के साथ संबंध खो देते हैं और कब वह रिहाई बनकर आता है।
आध्यात्मिक महत्व
यह वाक्य बताता है कि कितनी जल्दी व्यर्थ इच्छाओं के पीछे चलकर व्यक्ति अपने आशीर्वाद और पहचान से दूर हो सकता है; परन्तु उसी आधा-भरोसे के भीतर भी दया का द्वार खुला रहता है। यह कहानी बताती है कि विनम्रता और पश्चाताप की राह में भी अवसर है, क्योंकि पिता के घर की परंपरा और स्वागत का भाव सदा प्रतीक्षा करता है।
कथा-संदर्भ और संरचना
यह घटनाक्रम “कथा‑आर्क” के अंतर्गत आता है, जहां छोटा पुत्र अपनी गलतियों के परिणामों को अनुभव करता है, और नयी समझ के साथ घर लौटने की योजना बनाता है। संदर्भ बताता है कि मानव की मुक्ति और आचरण-शीलता में परिवर्तन का आरम्भ आत्म-स्वीकृति से होता है, जिससे पिता की करुणा और सहयोगी स्वभाव उभरकर आता है।
ट्रांसलुसन और पारिवारिक संदेश
पूर्वकथाओं से यह संदेश निकलता है कि संपत्ति और स्वतंत्रता के नाम पर चकित कर देने वाली राहें भी क्षमा और पुनःस्थापना के भीतर सच में बदली जा सकती हैं। यह कहानी यह भी दिखाती है कि परमेश्वर के राज्य की बुलाहट एक बार फिर से हर दिशा में आमंत्रण देती है—यह भरोसा कि घर के द्वार बंद नहीं होते, और प्रेम की गणना कभी समाप्त नहीं होती।
Cross-reference (संदर्भ-निशान) और उनका संक्षेप सार
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दूरी चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, भयभीत किए बिना ईश्वर की क्रिया और आशीषें फिर से हमें बुलाती हैं, अगर हम पश्चाताप और विश्वास के साथ लौटते हैं।
पाठ पर विचार करने योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 15:13 का यह भाग दिखाता है कि हमारी स्वतंत्रता और संपत्ति के प्रति आकर्षण कभी-कभी हमारे प्रभु के पास पहुँचने के रास्ते को रोक सकता है। फिर भी परम दया का घर हर समय खुला रहता है। पलों की भूल-चूक के बाद भी मूल उद्देश्य—घर लौटना, पिता के प्रेम में पूर्ण हो जाना—जो कि हर प्रकार के पाप के बाद भी संभव है, वही संदेश देता है।
सूक्त उद्धरण (संदर्भ-परिशिष्ट)
यदि आप चाहें तो नीचे बताए गए पवित्र-वचन-व्याख्या के भागों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke द्वारा सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से संक्षिप्त, ճիշտ शब्द-उद्धरण हो सकते हैं:
MH: “...ईश्वर के दया-सागर का पथ वह है जहाँ पुत्र अंततः लौटता है” (संक्षेप सार)।
AB: “The prodigal’s ruin teaches the necessity of repentance and the father’s readiness to forgive.”
AC: “God’s patience with wanderers is a display of His saving mercy.”
नोट: उपर्युक्त पंक्तियाँ इन विद्वानों के सार्वजनिक-domain विचारों के सामान्य सार को संकेतार्थ रूप में प्रस्तुत करती हैं; यदि सटीक उद्धरण मिलता है, वही संदिग्ध रूप से संदर्भित किया जाएगा।