लूका 15:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यह सुनकर वह क्रोध से भर गया और भीतर जाना न चाहा: परन्तु उसका पिता बाहर आकर उसे मनाने लगा।

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लूका 15:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 15:28 का संकल्पना-संदर्भ

यह वाक्य प्रेरित दृष्टांत का हिस्सा है जो पिता और पुत्र के बीच विभाजन के बावजूद गतिशील प्रेम को दर्शाता है। विरासत के दांवपेंच और पुत्र की चूक के बाद, पिता का व्यवहार एक अनुरागपूर्ण पुनःसम्बंध की मिसाल है। कहानी में छोटे पुत्र ने धन-संपत्ति की मोह में घर से बाहर जाना चुना, और बड़े पुत्र के मन को भी स्पर्श किया गया। यहाँ पढ़ने पर सीख मिलती है कि ईश्वर के राज्य की बुनियाद करुणा और स्वागत पर है, न कि केवल अनुशासन पर।

केंद्रीय अर्थ

यह वाक्य बताता है कि पिता बाहर आकर बेटे को मनाने लगते हैं—यानी प्रेम और क्षमा की निर्णायक उपलब्धि। छोटे बेटे के लौटने के क्षण पर बड़े बेटे का क्रोध उभरता है, पर पिता की बाहरी निकटता और बुलावा, दोनों मिलकर बताती है कि घर तब भी खुला रहता है जब आत्मा थीफी और अहंकार से लड़ रही हो। यह तस्वीर दिखाती है कि ईश्वर के प्रेम का प्रवेश द्वार खुला रहता है और हर तूफान के बीच भी स्वागत है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  1. पिता का अटूट प्रेम: घर लौटना मानो स्वागत का पल है, जहाँ प्रेम रोका नहीं जाता।
  2. प्रतिकार और अहंकार की चुनौती: बड़े बेटे का क्रोध यह चेतावनी देता है कि धार्मिकता के भीतर भी दया की आवश्यकता है।
  3. पुनःस्थापना की योजना: पिता का बाहर आकर बुलाना बताता है कि क्षमा पहले-से तैयार है, प्रतिक्रिया नहीं।

संबद्ध दर्शन-मार्ग

1) खेद और लौटना—यही कहानी का उद्घाटन है कि गैर-समझ और बहिष्कार के बीच भी घर की राह खुली रहती है।

2) पिता की ओर से आस्त्र-हाथ: पुकारना, बुलाना और मनाना—तीनों कार्य प्रेम के अभिन्न सदस्य हैं।

3) बड़े पुत्र का नैतिक परामर्श: सामाजिक सुरक्षा और धार्मिकता के भीतर दया का संतुलन आवश्यक है।

व्यावहारिक विचार

  • हम अपने आप में कैसे बनावट पाते हैं—क्या हम कभी किसी को वापस घर लाने के अवसर पर क्रोध या घमंड महसूस करते हैं?
  • ईश्वर के सामने कैसे असहायपन से मुक्त होकर स्वागत की भावना विकसित करें?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यही वाक्य2 पिता की बाहरी निकटता और आंतरिक प्रेम की धुरी को उजागर करता है। यह याद दिलाता है कि परमपिता परमेश्वर हर लौटने वाले के लिए द्वार खोलते हैं, भले ही हमारे भीतर चिंता, क्रोध या गलतफहमी क्यों न हो।

कृष्ण-उद्धृत टिप्पणी नोट

कई सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के अनुसार, ईश्वर का स्वागत विपरीत परिस्थिति में भी संभव है; यह कहानी करुणा की पराकाष्ठा है।

क्रॉस-रेफरन्स

- मत्ती 18:12-14: खोए हुए के बारे में खोज और लौटने पर खुशी की महिमा।

- यूहन्ना 1:12-13: जिसे उसे मिलने का अधिकार मिला, उसे पुत्रता प्रदान किया गया।

- रोम 8:31-34: यदि परम पिता हमारे साथ है, कौन हमारे विरुद्ध हो सकता है?

इस संदर्भ में 2-3 शब्दों में संकेतित संतोष यह है कि पिता के प्रेम की गहराई हर सीमा से परे है, और यह प्रेम हर किसी के लिए खुला है जो लौटने का निर्णय करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 15:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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