उत्पत्ति 4:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुँह पर उदासी छा गई।

पिछला पद
« उत्पत्ति 4:4
अगला पद
उत्पत्ति 4:6 »

उत्पत्ति 4:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 4:5 का संदर्भीय अध्ययन

परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुँह पर उदासी छा गई।

स्थिति-परिचय: घटना का आरम्भिक पृष्ठ

पैतरे समय में यह प्रकाशित होता है कि दोनो भाइयों—कैन और हाबील—God के सामने अपनी-अपनी भेंट चढ़ाते हैं। भेंट स्वीकार होने या अस्वीकार होने के परिणामस्वरूप कैन का हाल बहुत कठोर बन गया। यह दृश्य प्रत्यक्ष रूप से तीन बातें दर्शाता है: एक भेंट की स्वीकृति और अस्वीकार का नैतिक तर्क, आतंरिक भावना का संघर्ष, और परमेश्वर की दिव्य नैतिकता का परिचय।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या सीखना है

यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर बाह्य औचित्य के बजाय आंतरिक सत्य और हृदय के इरादों को देखता है। भेंट केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्म-समर्पण और विश्वास के तौर पर ग्रहण किया जाना चाहिए। Cain की क्रोधपूर्ण प्रतिक्रिया बता देती है कि धर्म-व्यवहार कभी-कभी दिल की स्थिति के बिना सूखा रह सकता है; परमेश्वर इस बात को जानते हैं कि प्रियतंत्रिका से अधिक आवश्यक है।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या

  • ग्रहण न करना— परमेश्वर के सामने भेंट की स्वीकार्यता उसकी दृष्टि और हृदय की स्थिति पर निर्भर है, न कि केवल भेंट की मात्रा या प्रकार पर।
  • उदासी— न होकर भी हृदय की निराशा का प्रतीक नहीं, बल्कि Cain के भीतर चंचलता, अहंकार और क्रोध का संकेत है।

अन्य प्रासंगिक पवित्र ग्रंथ

ग्लोबल संदर्भ से तीन सम्बद्ध स्थान देखिए:

  • यहोशू 7:11— देव-प्रसन्नता के लिए एकात्मता और सच्चे हृदय की महत्ता। यह दर्शाता है कि दायित्व निभाने के साथ आंतरिक प्रतिज्ञा का मेल कितनी महत्वपूर्ण है।
  • भजन 51:17— पवित्र आत्मा के साथ भेंट का मूल्य, जब विनय और टूटे हुए साहस के साथ किया जाए।
  • यूहन्ना 4:24— परमेश्वर आत्मा है; जो उसकी पूजा करता है, उसे आत्मा और सत्य के साथ करनी चाहिए।

इन संदर्भों से स्पष्ट है कि भेंट-स्वीकृति और हृदय की पवित्रता एक दूसरे के साथी हैं; केवल बाहरी कर्म से ही धर्म स्थापित नहीं होता।

आज के जीवन के लिए नयी दिशा

हमारी विशेष शिक्षा यह है कि परमेश्वर हमारे दिल की गहराई देखता है। प्रेरणा, विश्वास और विनम्रता के साथ किए गए कर्म ही परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं। यदि भीतर क्रोध, ईर्ष्या या अहंकार हो, तो भेंट क्या भी हो, उसका प्रभाव कम होता है। इसलिए हमें अपने विचारों, आवेशों और आशाओं को ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, ताकि हमारी धार्मिक गतिविधियाँ प्रामाणिक और जीवित रहें।

मूल उद्धरण (संविधानुसार)

नीचे दी गई तीन प्रसिद्ध व्याख्याओं से संक्षिप्त सार निकलता है:

Matthew Henry (संश्लेषित): “ईश्वर ने क्यों भेंट को स्वीकार नहीं किया? क्योंकि हृदय की स्थिति—विश्वास और विनम्रता—अनुपस्थित थी।”

Albert Barnes (संश्लेषित): “आत्मा और सत्य के साथ होने वाला पूजा ही वास्तविक धर्म है; बाहरी क्रिया बिना आंतरिक नम्रता के कुछ नहीं।”

Adam Clarke (संश्लेषित): “केवल औचित्य के लिए भेंट दें, तो भी यदि हृदय में क्रोध और असंतोष है, तो वह भेंट निरर्थक है।”

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 4:5 हमें स्मरण दिलाती है कि ईश्वर की दृष्टि भीतर की वास्तविक स्थिति पर है—विश्वास, विनम्रता और हृदय की पवित्रता। केवल कार्य-प्रकार पर्याप्त नहीं; आध्यात्मिक जीवन का सत्य हृदय की आवाज में है और वहीं से भेंट स्वीकार होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 4:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 11:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इब्रानियों 11:4 (HINIRV) »
विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्‍वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्‍वर ने उसकी भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है। (उत्प. 4:3-5,10)

अय्यूब 5:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 5:2 (HINIRV) »
क्योंकि मूर्ख तो खेद करते-करते नाश हो जाता है, और निर्बुद्धि जलते-जलते मर मिटता है।

यशायाह 3:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 3:10 (HINIRV) »
धर्मियों से कहो कि उनका भला होगा, क्योंकि वे अपने कामों का फल प्राप्त करेंगे।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें