Old Testament
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मलाकी 3:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अपने पुरखाओं के दिनों से तुम लोग मेरी विधियों से हटते आए हो, और उनका पालन नहीं करते। तुम मेरी ओर फिरो, तब मैं भी तुम्हारी ओर फिरूँगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है; परन्तु तुम पूछते हो, ‘हम किस बात में फिरें?’ (याकू. 4:8, इब्रा. 10:30-31) प्रभु को न लूटो
मलाकी 3:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मलाकी 3:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 1:3 (HINIRV) »
इसलिए तू इन लोगों से कह, सेनाओं का यहोवा यह कहता है: तुम मेरी ओर फिरो, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, तब मैं तुम्हारी ओर फिरूँगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (याकू. 4:8, होशे 6:1)

व्यवस्थाविवरण 31:20 (HINIRV) »
जब मैं इनको उस देश में पहुँचाऊँगा जिसे देने की मैंने इनके पूर्वजों से शपथ खाई थी, और जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं, और खाते-खाते इनका पेट भर जाए, और ये हष्ट-पुष्ट हो जाएँगे; तब ये पराये देवताओं की ओर फिरकर उनकी उपासना करने लगेंगे, और मेरा तिरस्कार करके मेरी वाचा को तोड़ देंगे।

रोमियों 10:21 (HINIRV) »
परन्तु इस्राएल के विषय में वह यह कहता है “मैं सारे दिन अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर पसारे रहा।” (यशा. 65:1-2)
मलाकी 3:7 पर हिंदी टिप्पणी—संक्षिप्त अर्थ और प्रकाश
इस आयत का मुख्य संदेश है: परमेश्वर की विधियों से विरति वर्षों से चली आ रही है; यदि लोग अब उनके चिह्न एवं आदेशों की ओर लौटें, तब परमेश्वर भी उनकी तरफ लौटेगा। इससे यह सिद्ध होता है कि ईश्वर की उदारता और विश्वासघात के बीच एक कड़ी है—व्यक्ति की चेष्टा से ही उसकी कृपा मिलती है।
ऐतिहासिक-परिप्रेक्ष्य
यहाल के समय ईहूदियों में पाप तथा उपकार का चक्र चला करते थे: वे विधि का पालन समय-समय पर त्यागते, फिर संकट के समय लौट आना, और फिर वही भूल। मलाकी prop हूडा में यह संदेश वही क्रम रोशन करता है—समय के साथ परमेश्वर की ओर लौटना चाहिए; नहीं तो वह अपना प्रतिशोध और स्मरण कराता है। यह वचन यह भी सिखाता है कि परमेश्वर का प्रतिशोध अन्याय पर है, पर वह कृपा के मार्ग भी खोलता है जब मनुष्य अपनी राह बदलते हैं।
व्याख्यात्मक बिंदु
सूत्र-संगति के लिए छोटे उपदेश
अन्य संबंधी आयतक संदर्भ
2 क्र 7:14— यदि my people अपनी राहों को सुधारें, तब मैं उनका उद्धार करूँगा; यह आयत भी परिवर्तन के महत्व को पुष्ट करती है।
यशायाह 55:6-7— प्रभु को खोजो—वह निकट है; बुरे मार्ग छोड़ कर भलाइ की राह चुनो। यह संकेत देता है कि आकर्षण केवल कृत्यों में नहीं, बल्कि दिल की दिशा में है।
यूहन्ना 6:37— जो आते हैं, मैं उन्हें नहीं निकालेगा; ईश्वर की उदारता और बुलाहट की स्थिरता का संकेत है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (महर्षि मार्गदर्शक टिप्पणियाँ)
Matthew Henry के विचारों से: “God often withdraws his blessing when men grow careless and return to their former vanities, but He invites them back with a promise of mercy if they truly repent.”
Albert Barnes के अनुसार: “The people’s question, ‘How shall we return?’ shows a genuine desire to know the path of restoration, and the answer lies in turning from sin to obedience.”
Adam Clarke के अनुसार: “The text teaches that where man’s walk is contrary to God’s but repentance is sincere, mercy follows the humbled and returning soul.”
संक्षिप्त शास्त्रीय समेकन
केवल आचरण-परिवर्तन ही बाहरी पूजा-क्रिया को सार्थक बनाता है। परमेश्वर की ओर लौटना, उसके साथ फिर से संगति बनाना और सत्य-निष्ठा के साथ चलना—यही लौटने का वास्तविक मार्ग है। इन संदेशों के साथ, मलाकी 3:7 एक प्रेरक स्मरण करा देता है कि ईश्वर के असून भी उत्तरदायित्व हमारा है: लौटें, तब वह लौटकर आपका भाग बनेगा।