Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 4:1 मरकुस 4:2 मरकुस 4:3 मरकुस 4:4 मरकुस 4:5 मरकुस 4:6 मरकुस 4:7 मरकुस 4:8 मरकुस 4:9 मरकुस 4:10 मरकुस 4:11 मरकुस 4:12 मरकुस 4:13 मरकुस 4:14 मरकुस 4:15 मरकुस 4:16 मरकुस 4:17 मरकुस 4:18 मरकुस 4:19 मरकुस 4:20 मरकुस 4:21 मरकुस 4:22 मरकुस 4:23 मरकुस 4:24 मरकुस 4:25 मरकुस 4:26 मरकुस 4:27 मरकुस 4:28 मरकुस 4:29 मरकुस 4:30 मरकुस 4:31 मरकुस 4:32 मरकुस 4:33 मरकुस 4:34 मरकुस 4:35 मरकुस 4:36 मरकुस 4:37 मरकुस 4:38 मरकुस 4:39 मरकुस 4:40 मरकुस 4:41



मुख्य व्याख्या बिंदु
मरकुस 4:15 में Jésus यीशु ने मरकुस के कहे हुए चमत्कारों के उपदेश के क्रम में वर्षण की फिरौती की बातें स्पष्ट कीं। यह पद बताता है कि मार्ग के किनारे बोया गया वचन अस्थिर और बाधाओं से घिरा रहता है; शैतान तुरंत आकर वचन को हटा देता है ताकि लोग उसमें रुचि ही न बनाएँ। यह तात्पर्य देता है कि परमेश्वर का वचन हर हालत में संघर्ष के मैदान में पड़ता है—कभी-कभी तुरंत बाधित, परन्तु टिके रहने से ही वह फल देता है।
साहित्यिक संदर्भ
यह पाठ यूहन्ना-उद्धृत गढ़े खेतों (ख़ुदाई) के परिप्रेक्ष्य में है: वचन बोया गया, परन्तु मार्ग के किनारे, जहाँ मिट्टी कठोर है और पथरीली नहीं, जहाँ कोई गहरी जड़ नहीं बनती, इसलिए शैतान तुरंत आकर उसे उखाड़ देता है। ऐसे श्रोतक जो सतह पर सुनते हैं, उनके हृदय में वचन का प्रवेश नहीं होता; वे तुरंत विचलित हो जाते हैं। यह एक दृश्य-उद्धृत उपदेश है जो वचन के प्रभावी प्रतिरोध को दिखाता है।
धार्मिक-तत्त्विक महत्व
पवित्र शास्त्र के साथ सम्बन्ध
यह पाठ अन्य सुसमाचारों के मंडलों से मेल खाता है जहाँ वचन की विविध प्रकार की लगामें बताई गयी हैं। - पहले शास्त्र में मानव हृदय की पत्थर जैसी कठोरता, - दूसरे में रुका हुआ मार्ग, - और तीसरे में रुचि बनाम पार्श्विकता का संघर्ष।
क्रॉस-रेफरेंसे: नीचे दिए गए संदर्भ समझ को गहराई देते हैंः
पर-अध्यात्मिक चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 4:15 बताता है कि वचन की तात्कालिक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर है कि सुनने वाला कितनी गहराई से और कितनी ग्रहणशीलता के साथ उसे स्वीकार करता है। मार्ग के किनारे की मिट्टी में वचन तब तक पनप नहीं पाता जब तक हृदय खुला न हो और विश्वास से न भर गया हो। यह शिक्षण हमें चेतावनी भी देता है कि जब वे वचन को सुनते हैं, तो निरंतर जाँच और आत्म-समर्पण जरूरी है ताकि वचन सफल हो सके।
कौन-कौन से टिप्पणीकार उद्धृत हो सकते हैं
इस पंक्ति के विश्लेषण के लिए मुख्य विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से समेकित रूप में समाहित हैं। खास उद्धरण नीचे दिए जाते हैं (संदर्भ हेतु):
Matthew Henry से: “जहाँ वचन के लिए पथरीली मिट्टी हो, वहाँ शैतान तुरन्त आकर उसे उखाड़ देता है।” टिप्पणी के स्वर में यह विचार वचन की स्थायित्व से जुड़ा है।
Albert Barnes से: “वचन का प्रभाव तभी संभव है जब हृदय खुला हो और विश्वासी उसे स्वीकार करे; अन्यथा यह केवल शब्द बनकर रह जाता है।”
Adam Clarke से: “मनुष्य के हृदय की स्थिति वचन के फल की पहली शर्त है; अगर मिट्टी कठोर है, तो मार्ग होता है, परन्तु जड़ें नहीं बनतीं।”