Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 4:1 मरकुस 4:2 मरकुस 4:3 मरकुस 4:4 मरकुस 4:5 मरकुस 4:6 मरकुस 4:7 मरकुस 4:8 मरकुस 4:9 मरकुस 4:10 मरकुस 4:11 मरकुस 4:12 मरकुस 4:13 मरकुस 4:14 मरकुस 4:15 मरकुस 4:16 मरकुस 4:17 मरकुस 4:18 मरकुस 4:19 मरकुस 4:20 मरकुस 4:21 मरकुस 4:22 मरकुस 4:23 मरकुस 4:24 मरकुस 4:25 मरकुस 4:26 मरकुस 4:27 मरकुस 4:28 मरकुस 4:29 मरकुस 4:30 मरकुस 4:31 मरकुस 4:32 मरकुस 4:33 मरकुस 4:34 मरकुस 4:35 मरकुस 4:36 मरकुस 4:37 मरकुस 4:38 मरकुस 4:39 मरकुस 4:40 मरकुस 4:41



मरकुस 4:35 का अर्थ
उस रात सांझ के समय यीशुई ने चेलों से कहा, “आओ, हम पार चलें।” इसका सरल अर्थ यही है कि यीशु ने प्रेरितों को एक नया, कठिन-यात्रा के लिए बुलाया—एक जो उनके विश्वास और निर्भरता को परखने वाला था। यह बाइबल की ऐसी घटना है जिसमें यीशु अपनी सामान्य शिक्षाओं के बाद भी नाव से पार से प्रतिक्रिया दिखाते हैं, ताकि चेलों की आशा और निर्भरता की कसौटी हो सके।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
प.swagger: मार्क 4 में यीशु ने शास्त्रों की शिक्षा, दृष्टांतों के माध्यम से परमराज्य की बातें समझाईं, फिर शाम को नदी के पार जाने के लिए प्रेरित किया। यह समय उस दौड़-धूप के बीच आता है जब चेलों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जूझना था—झटकों, तूफान और विश्वास की कसौटियों के बीच।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्वपूर्ण उद्धार-धारणा (Theme)
अनुसंगीय वचन-योग (Cross-references) और उनका संक्षेप
1) मरकुस 6:45— यीशु ने चेलों को शांत होने के लिए “पार” करने की प्रतीक्षा में पहले पलटकर आश्वासन दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कठिन समय में भी Jesus अपने साथ चलने का आश्वासन देते हैं।
2) मत्ती 14:22-33— यथार्थ संकट के बीच पेत्रुस का विश्वास और डूबना-उठना, यह दिखाता है कि भय और विश्वास के बीच संघर्ष तब आता है जब Jésus साथ हो, तब ही दृढ़ता मिलती है।
3) योहान 16:33— संसार पर विजय की शांति, क्योंकि Jesus ने संसार के बीच भी हमारे लिए विजय की राह बताई है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जो दैनंदिन जीवन में कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं, वे इस पाठ से यह सीख लें: संकट के वक्त भी यीशु की उपस्थिति को याद करें; विश्वास की नाव को स्थिर रखने के लिए उसकी आवाज पर कदम बढ़ाएं; और साथ चलकर भीतर के भय को तौलें—परमेश्वर के साथ छोटे-छोटे कदम भी बड़ी नयी राह बना देते हैं।
अनुमत उद्धरण-उद्धरण (यथोचित धर्मग्रंथ-आलोचनाओं से)
नोट: नीचे केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के ठीक-ठीक छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो ही उल्लेख किए गए हैं।
उद्धृत विचार (संक्षिप्त):
“Jesus bade them, and they obeyed; faith must accompany obedience in every voyage.”
“They did not understand his purpose, yet obedience, and following, is the beginning of trust.”
मुख्य टिप्पणीकारों के संकेत:
Matthew Henry के संक्षिप्त विचार, Barnes के संकेतक व Clarke के संक्षेप-आइडिया: ये सभी इस घटना को न केवल चेलों की आस्था की कसौटी, बल्कि Jesus की प्रेरणा और प्यार की सुरक्षा के रूप में देखते हैं।