Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 4:1 मरकुस 4:2 मरकुस 4:3 मरकुस 4:4 मरकुस 4:5 मरकुस 4:6 मरकुस 4:7 मरकुस 4:8 मरकुस 4:9 मरकुस 4:10 मरकुस 4:11 मरकुस 4:12 मरकुस 4:13 मरकुस 4:14 मरकुस 4:15 मरकुस 4:16 मरकुस 4:17 मरकुस 4:18 मरकुस 4:19 मरकुस 4:20 मरकुस 4:21 मरकुस 4:22 मरकुस 4:23 मरकुस 4:24 मरकुस 4:25 मरकुस 4:26 मरकुस 4:27 मरकुस 4:28 मरकुस 4:29 मरकुस 4:30 मरकुस 4:31 मरकुस 4:32 मरकुस 4:33 मरकुस 4:34 मरकुस 4:35 मरकुस 4:36 मरकुस 4:37 मरकुस 4:38 मरकुस 4:39 मरकुस 4:40 मरकुस 4:41



पसंदीदा पाठ का तुरंत संदर्भ: मरकुस 4:29
पवित्र गुत्थी में दाने के बीज रोपित होकर उगते हैं, और जब वह पक कर तरन्नुम में पहुँचता है, तब किसान तुरन्त काटने के लिये हँसिया लगाता है—यह दृश्य यीशु की कृषिक जीवन-नीति के साथ परमेश्वर के राज्य की जड़-तैयारी को दर्शाता है। इस वाक्य में प्रवेश-सीधी बात है: फल आने पर ही क्रिया तेज होती है, भिन्न-भिन्न समय पर परमेश्वर का काम भी पूरा होता है।
इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या स्पष्ट है
ईश्वर का राज समय पर आता है और उसकी योजना क्रमबद्ध है। खेत की कटनी जैसी क्रिया से यह संकेत मिलता है कि कर्म से भविष्य की पूर्णता निकलती है। विश्वास का सम्मान तब होता है जब यह धैर्यपूर्वक बढ़ता है और फिर उस परिणाम के लिये प्रस्तुत होता है जो परमेश्वर चाहता है।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
अन्य संबंधित पवित्र वचनों के साथ संपर्क
कथन के भीतर यह कटनी का चित्र दूसरों से जुड़ता है:
इन संदर्भों में कटनी का भाव: प्रतीक्षा के बाद श्रमपूर्ण निष्कर्ष, और परमेश्वर के समय की पुष्टि।
आज का अनुप्रयोग
हमारे विश्वास में धैर्य एक अनिवार्य गुण है। जो लोग चेतन रूप से बुवाई करते हैं—धर्म व वचन की आराधना, सेवा और साक्ष्य—वे समय आने पर फल देखते हैं। परमेश्वर के समय-सारिणी में, हमारी भूमिका विश्वासपूर्वक इंतजार करना है और तब क्रिया-प्रणाली को सही अवसर पर सक्रिय करना है।
संक्षेप निष्कर्ष
मरकुस 4:29 हमें सिखाता है कि परमेश्वर के राज्य का विकास एक क्रमबद्ध जलप्रवाह है: दाना बोया जाता है, उसका विकास होता है, और अंततः कटनी के समय परिणाम दिखता है। यह विश्वास की प्रकृति को दर्शाता है—धैर्य और कर्म का संतुलन, ताकि हमारे जीवन में ईश्वर की पूर्णता प्रकट हो सके।
पूर्व_Pearson/महत्वपूर्ण उद्धरण संदर्भ
पढ़े जाने योग्य अंशों में मौजूदा दिग्गजों के विचारों को स्मरणीय रूप से जोड़ा गया है, जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संजोए गए विचार सामान्य पाठ के साथ संगत रहने का प्रयास करते हैं।
उद्धरण (संक्षेप):
Matthew Henry के केवल परन्तु-उद्धरण: “…”
Albert Barnes के विचार: “…”
Adam Clarke के नोट: “…”
नोट: ऊपर के उद्धरण वास्तविक पाठ से हैं यदि उपलब्ध हों तो संक्षेप में संकेत दिए गए हैं; पूर्ण उद्धरण पाठ को यहाँ स्थान नहीं दिया गया है ताकि मूल पठन बरकरार रहे।