Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 13:40 का सरल अर्थ और संदर्भ
पद सार: अतः जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा। यह मुहावरा यीशु की कृषि-उकान (कथा) से जुड़ा है जिसमें वह बीज-परक उपदेश दे रहे हैं। खेत में बुझे हुए खरपतवार और गलती से फँसे दानें एक साथ उभरते नहीं रहते, बल्कि समय पर निर्णय होता है। यहाँ “जंगली दाने” से耶शु उन दानों का चित्रण करते हैं जो बुराई के कारण कटते-जल जाते हैं, और अंत में न्याय के समय उन लोगों का विभाजन होगा जो बनते-तूटते संसार के भीतर रहते हैं।
केंद्रीय अर्थ
यह पंक्ति दया-न्याय के मिश्रित तत्त्व को स्पष्ट करती है: संसार में जो कुछ है उसका अंतिम पर्यावास, परमेश्वर के न्याय का दिन है। यीशु द्वारा बताई गई पहेली-प्रवचन में खेत के भीतर जो खरपतवार और दाने एक साथ उगते दिखाई देते हैं, वह अन्तिम समय की वास्तविक विभाज्यता को संकेत करता है। अंत में जिनका अस्तित्व और कर्म सत्य के अनुरूप है, उन्हें रूपांतरित कर दिया जाएगा; अन्यथा वे विनाश के कारण पृथक कर दिए जाएँगे।
मुख्य विषय
टिप्पणियाँ और क्रॉस-रेफरेंसेस
- में संभव समान विचार: मत्ती 13:24-30 में परिशुद्ध “खरपतवार” बनाम “दाने” की कथा; यीशु यह दिखाते हैं कि विश्व की प्रक्रिया में बादल नहीं बनेंगे, बल्कि दयालुता के साथ न्याय भी होता है।
- क्रॉस-रेफरेंस 1 कुरिन्थियों 3:13-15: हर व्यक्ति के कर्म आग के चाक पर आकर परख होंगे; परिणाम उसी के अनुसार मिलेंगे।
- अन्य संदर्भ: दानें और खरपतवार का प्रतीक रोम 2:6-8 के अनुसार कर्मों के अनुसार प्रतिफल; मसीह के दिन न्याय का दिन स्पष्ट होता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम कौन-सी जीवन-नीति अपनाते हैं? यह पंक्ति स्मरण कराती है कि जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सत्य-आचरण से भविष्य की दिशा तय होती है। नैतिकता, ईमानदारी और प्रेम के फल हमारे आचरण में उभरने चाहिए ताकि अन्तिम दिन हमारा जीवन सुसंगत रहते हुए दया और न्याय दोनों में टिक सके।
संक्षिप्त समापन
यह वचन यह सिखाता है कि संसार के समय-समाप्ति में वे लोग जो ईश्वर के राज्य के अनुरूप परिणाम लाते हैं उन्हें सुरक्षित स्थान मिलेगा, अन्यथा वे नष्ट होंगे। यह उम्मीद और चेतावनी का संतुलन बनाये रखता है कि हमारा जीवन अभी से ही परमेश्वर के न्याय के अनुसार ढला रहे।
उद्धृत संक्षेपण
यदि आप चाहें तो देखें: मत्ती 13:24-30 और मत्ती 13:36-43, जहां यीशु इसी विषय को और स्पष्ट करते हैं कि अन्तिम दिन में ईश्वर का निर्णय कैसे होगा।