मत्ती 13:55 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या यह बढ़ई का बेटा नहीं? और क्या इसकी माता का नाम मरियम और इसके भाइयों के नाम याकूब, यूसुफ, शमौन और यहूदा नहीं?

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मत्ती 13:55 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 13:55 — विषय का स्पष्ट अर्थ

यह पद यीशु के सामने उपस्थित लोगों की आशंका और पूर्वाग्रह को उजागर करता है। इसमें पूछा गया है कि क्या यह बढ़ई का बेटा नहीं है, यानी jesus की परंपरागत पहचान पर संदेह। साथ ही उसकी माता का नाम मरियम और भाइयों के नाम याकूब, यूसुफ, शमौन और यहूदा बताए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह संकेत देना है कि लोग यीशु को उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आँकते हैं, न कि उसके शिक्षण और चमत्कारों से।

पुष्ठिपृष्ठभूमि

यह उद्धरण मत्ती के Gospel में यीशु के प्रति मानव पक्ष की प्रतिक्रियाओं को दर्शाता है। उनका समाज उसे एक सामान्य कारीगर की संतान मानता है, इसलिए उसकी शिक्षाओं को स्वीकारने में कठिनाई होती है। मरियम और उसके भाइयों के उल्लेख से यह स्पष्ट है कि यीशु का जीवन सामान्य परिवार की व्यवस्थाओं के भीतर घूमता रहा, जब तक कि वह अपने divine कार्य के लिए उद्घोषित नहीं होते।

व्यावहारिक अवलोकन

  • संस्कार और पहचान बनाम आशीर्वाद: लोग यीशु की जन्मकथा या पारिवारिक परिचय के आधार पर उसकी आध्यात्मिक authority को आँकते हैं, जो अक्सर सत्य को सीमित कर देता है।
  • विश्वास बनाम संदेह: पद यह संकेत देता है कि घर-परिवार की स्वीकृति भी एक मार्ग नहीं बनती जब प्रभु के शब्द स्पष्ट होते हैं।
  • सूचनात्मक सीमाएं: लोगों के मन में preconceived notions होने से वह नया खोजने में बाधित होते हैं।

हमें क्या समझना चाहिए?

यीशु की पहचान केवल मानवीय विरासत से नहीं, बल्कि उसके शब्दों, कार्यों और उद्धार के प्रेम से होती है। पात्र-परिचय एक खुशामद भर हो सकता है, पर सच्ची निर्णय लेने के लिए प्रभु के अनुसरण पर भरोसा करना चाहिए।

कथ्य-विचार के साथ संदर्भ

1) मत्ती के अन्य अनुभाग जहाँ लोग उसकी पहचान पर संदेह करते हैं, बताते हैं कि न सिर्फ उद्धारकर्ता के रूप-रंग, बल्कि उसकी शिक्षाओं पर भी विचार करना चाहिए।

2) पुराने अभिमान और परिवारिक समृद्धि के बजाय, परमेश्वर की योजना को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।

3) समुदाय में प्रभु के साथ भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी हैं, जो स्वीकार और अस्वीकृति दोनों रूप लेते हैं।

संक्षिप्त संदर्भ-संचयन

  • यूहन्ना 6:42 आदि में लोग कहते हैं कि क्या यह यीशु नहीं है जो नासरत में पला-बढ़ा नहीं?—पहचान कितनी बार अनुमानित होती है।
  • मरकू 6:3 में लोग कहते हैं, "यह बढ़ई का बेटा नहीं है?"—एवं ईसा की शिक्षाओं के अभिमत की जड़ें दर्शाते हैं।
  • याकूब, यूसुफ, शमौन, यहूदा के नाम उनके पारिवारिक संबंधों को स्पष्ट करते हैं—परन्तु यीशु को सही रूप में पहचानना उनके सामाजिक-वर्जन से अधिक महत्वपूर्ण है।

संक्षिप्त शुद्ध-जीवन सीख

मानव विचार अक्सर बाहरी परिचयों पर टिका होता है, पर भगवान के Kingdom के काम को समझने के लिए हमारे विश्वास को यीशु के शिक्षण और चालों पर स्थिर रखना चाहिए। विश्वास तब मजबूत होता है जब हम प्रभु की बातों को स्वीकारते हैं, भले ही वे हमारे पूर्वाग्रहों को चुनौती दें।

पदयुक्त अंशयों में से कोई संपूर्ण उद्धरण सीधे न उद्धृत किया गया है; यदि आवश्यक हो, तो पढ़ने वाले उनके पूर्ण पाठ के लिए संदर्भ देख सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 13:55 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मरकुस 6:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 6:3 (HINIRV) »
क्या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्र, और याकूब और योसेस और यहूदा और शमौन का भाई है? और क्या उसकी बहनें यहाँ हमारे बीच में नहीं रहतीं?” इसलिए उन्होंने उसके विषय में ठोकर खाई।

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यूहन्ना 6:42 (HINIRV) »
और उन्होंने कहा, “क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिसके माता-पिता को हम जानते हैं? तो वह क्यों कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूँ?”

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लूका 3:23 (HINIRV) »
जब यीशु आप उपदेश करने लगा, तो लगभग तीस वर्ष की आयु का था और (जैसा समझा जाता था) यूसुफ का पुत्र था; और वह एली का,

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