Old Testament
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मत्ती 13:30 का अवलोकन: कटनी तक दोनों को साथ बढ़ने दो
यहोशपरख के समान इस वाक्य में यीशु की दृष्टि एक परिवर्तनशील, परख-समझ भरी प्रक्रिया की ओर है—समय की कटनी। खेत में गेहूं और जंगली दाने एक साथ उगते हैं, परन्तु कटनी के समय उनका भाग-भाग अलग होगा। यह उद्धरण पहचाने जाने वाले भय या ठहराव के बजाय एक दिव्य क्रम को बताता है: अंत तक धैर्य रखना और परमेश्वर के निर्णय पर विश्वास रखना।
ईसू के इस वचन से धार्मिक तथ्य क्या उभरते हैं
1) परम प्रभु का न्यायिक निर्णय: कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूँगा—यानी ईश्वर का निर्णायक क्षण है जिसमें विनाश और इनायत दोनों का समेकन होता है। जंगली दाने जलाने के लिये बाँध दिए जाते हैं, गेहूं खत्ते में जमा होता है। यह दर्शाता है कि विश्वासियों और असत्यियों के लिए अलग-अलग परिणाम उसी समय के भीतर तय होंगे।
2) क्रियात्मक धैर्य: किसानों की तरह शिष्य भी प्रतीक्षा करें—कटनी की योजना और भाग-ভाग का क्रम ईश्वर के सुविनियोजन पर निर्भर है।
महत्वपूर्ण शब्द और संकेत
• कटनी: खेत के फसल-संबंधी अंतिम निर्णय का चित्रण, जहां सभी चीजें अपने-अपने नियत स्थान पाती हैं।
• जंगली दाने: निश्चय-निष्ठ नहीं, संसार के अस्थिर और ढीले लोग जो वास्तविक आस्था से उच्च नहीं उतरते।
• गेहूँ: ईश्वर के लोग, जो खत्ते—परम शांति-गृह में एकत्र होते हैं।
अन्य संबंधित बाइबिल पद
• मत्ती 3:12: अंत के समय की भिन्न-भिन्न दशाओं का चित्रण—अंतिम निर्णय के दृश्य। इस संदर्भ में आग और कटान का प्रतीक एक ही दार्शनिक क्रम बनाते हैं।
• मत्ती 25:31-46: graphs of judgment and separation—यहीं स्पष्ट होता है कि कैसी लाईन-अप परमेश्वर बनाते हैं—दामित्री पक्ष और दुष्टों के बीच से अलग-अलग परिणाम निकलते हैं।
• मल 3:2-3: विशिष्ट परीक्षा और purification का चित्र, जहां ईश्वर अपने लोगों को refine करते हैं।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
हिनिर्व (HINIRV) अनुवाद में मातृभाषी पाठक के लिए यह पंक्ति एक शिक्षाप्रद दृश्य है—परमेश्वर का न्याय एक दिन अंतिम तरीके से सामने आएगा, और उसी समय जो दुष्कृत में पड़े हैं उनके लिए दया और न्याय के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा।
उद्धृत सूचनाओं के लिए: “कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो, और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूँगा; पहले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिये उनके गट्ठे बाँध लो, और गेहूँ को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो।”—यह पाठ सांसारिक उथल-पुथल के बीच भगवान के नियत क्रम को संकेत करता है।
नोट: ऊपर के क्रॉस-रेफरेंस केवल संदर्भ हेतु हैं, यदि वांछित हो तो पाठ के साथ सीधे पाठ नहीं दिये गये हैं।