Old Testament
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मत्ती 13:41 पर एक सारगर्भित व्याख्या
यह पद मत्ती अध्याय 13 के भीतर उस समय के वास्तविक विरोध, निर्णयात्मक न्याय और परमेश्वर के राज्य की प्रकृति की ओर संकेत करता है। मसीह अपने शिष्यों को बतलाते हैं कि जो लोग सत्य के रास्ते से मुड़ते हैं वे अंततः न्याय की अदालत में एकत्र होंगे। यह व्यवस्था-पत्र से जुड़ा एक स्पष्ट संकेत है: स्वर्गदूत राज्य के भीतर से ठोकर के कारणों को और अराजक कुकर्म करने वालों को इकट्ठा करेंगे, ताकि वे बाहर फेंके जाएँ और राज्य के साथ अलग हो जाएँ।
पद पर पाठ-परिचय
यह पाठ उस समय की कथा से जुड़ा है जब यीशु ने ताले की तरह एकत्रित समूहों के बीच दया और नदी-न्याय की दैवीय व्यवस्था को समझाने के लिए कहानी-उदाहरण प्रस्तुत किये। यहाँ स्पष्ट है कि परमेश्वर के राज्य में प्रवेश के साथ-साथ कुछ लोग ठहराव बनाते हैं—जो ठोकर (कथित कारण) और कुकर्म के कारण बाहर कर दिए जाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वर्गदूतों को भेज कर राज्य से ठोकर के कारणों और कुकर्म करने वालों की पृथक-प्रेषण की व्यवस्था दिखाती है: यह न केवल दया-न्याय का मिलाजुला संकेत है, बल्कि यह सच है कि अंतत: परमेश्वर के राज्य में निवास करने वाले और बाहर रहने वाले लोग एक साथ नहीं रह सकते। यह उद्धार-कार्य के समापन समय के बारे में भी संकेत है, जब न्याय के साथ प्रेम का शास्त्र स्थिर हो जाता है।
इतिहासिक-स्तर के तुलनात्मक नोट
इस तरह के विचार अन्य बाइबिल अंशों में भी आते हैं: - प्रेरितों के कार्यों में राज्य-न्याय के साथ साथ पापी-आत्माओं की परित्याग की कल्पना मिलती है। - पुराने दाय में भी पंथ-संहार नहीं, वरन् न्याय का दिन स्पष्ट रूप से आता है जब देवालय के भीतर से भी ठोकरें निकलती हैं। (उद्धरण-शब्द केवल अन्य पाठों के समान विचार हैं; पूर्ण वाक्यांश उद्धृत नहीं किए गए हैं।)
यथार्थ अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस और उनके छोटे विवेचन
1) मत्ती 25:31-46 — न्यायी separating of the nations: यहाँ भी समय पर निर्णय और गौणों के साथ अन्याय की निष्कासन की बात है, जो हमारे पाठ से समान ध्वनि उठाती है कि परमेश्वर के राज्य में प्रवेश के लिए चितेरी separation आवश्यक है।
2) मत्ती 8:11-12 — बहिर्गमन के साथ पुत्र-परिवार के भीतर स्थान का विचार: सत्यापित सीमा और बाहर रहने का विचार यहाँ भी आता है, जो हमारे पाठ के न्यायिक घटक से जुड़ता है।
3) योहान 5:28-29 — जीवन और मरन की पुनरुत्थान न्याय: यह बताता है कि समय पर न्याय होगा और ठोकरें प्रकट होंगी, ताकि हर किसी का भाग्य निर्धारित हो।
संक्षेप निष्कर्ष
मत्ती 13:41 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के राज्य में सत्य और पवित्रता के साथ ही न्याय का काम भी अंत तक रहेगा। स्वर्गदूतों द्वारा ठोकरों और कुकर्म करने वालों को इकट्ठा कर अलग करना, एक ऐसी दिव्य व्यवस्था है जिसमें प्रेम और पवित्रता दोनों संतुलित रूप से रहते हैं। यह पाठ हमारी पुष्टि करता है कि अंत के दिन सत्य का शासन स्पष्ट रूप से सामने आएगा, और जो दावा नहीं कर पाए वह अलग हो जाएगा।
नोट: इस टिप्पणी में मैथ्यू हेन्ज़ी (Matthew Henry), अल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सार्वजनिक डोमेन विचारों के सार को सहज रूप से एकीकृत किया गया है; उनके किसी भी पाठ-उद्धरण के सफलतापूर्वक संक्षेपित वाक्यों का उल्लेख नीचे किया गया है यदि उपलब्ध हों।
सीधे उद्धरण (यदि लागू): यह संस्करण स्वयं की शब्द-योजना के अनुसार है; विशिष्ट पाठ-रेफरेंस के लिए मूल स्रोत देखें।