मत्ती 13:58 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उसने वहाँ उनके अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ्य के काम नहीं किए।

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मत्ती 13:58 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 13:58 और यहाँ के अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ्य के काम नहीं किए

इस पद में यीशु अपने गृह नगर में लोगों के अविश्वास के कारण बृहत्तर चमत्कार नहीं दिखा पाते। यह घटना मरजभया की इच्छा और मानवीय प्रतिक्रियाओं के बीच का संघर्ष बताती है: जिनके पास अनुभव और विश्वास है, वे ही ईश्वरीय क्रिया को देखते हैं; परंतु उन नगरों में लोग विद्वान, परंपरागत और संदेहशील थे, इसलिए प्रभु ने वहां अधिक शक्तिशाली कार्य नहीं किया। यह केवल इसलिए था कि उनकी अविश्वास ने चमत्कारों की सीमा निर्धारित कर दी।

मुख्य अर्थ

वाक्य का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर की सामर्थ्य सीमाओं से नहीं जानी जाती, बल्कि मानव प्रतिक्रिया से प्रभावित होती है। यीशु ईश्वर के पुत्र हैं, पर उनके चमत्कार ग्रहण करने के रास्ते भी लोगों के विश्वास पर निर्भर थे। अविश्वास का वातावरण प्रभाव डालता है: चिंता, संदेह या कठोर रीति-रिवाज चमत्कारों कीं रफ्तार को धीमा कर देते हैं।

प्रमुख विषय

  1. विश्वास बनाम अविश्वास: विश्वास के अभाव में यीशु की सत्ता सामान्य प्रभाव नहीं दिखाती।
  2. आत्मिक विकार बनाम सार्वजनिक उपचार: भीड़ की मानसिकता और उनकी धारणाएँ मसीह के कार्य को निर्धारित करती हैं।
  3. नियति और जिम्मेदारी: परमेश्वर का व्यवहार मानविकी प्रतिक्रिया पर निर्भर है, परंतु यह प्रभु की शास्त्रवत इच्छा नहीं बदलता।

संबंधित पाठ (क्रॉस-रेफरेंस)

1) मरकुस 6:5-6: यहाँ भी नगरों में अविश्वास के कारण यीशु चमत्कारों को सीमित करते हैं; यह दर्शाता है कि विश्वास का वातावरण परिणाम बनाता है। संक्षिप्त संकेत: अविश्वास की स्थिरता प्रभु की क्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

2) लूका 8:18: विश्वास की गहराई के बारे में शिक्षा—जो कुछ अधिक दिखना है, उसे समझने के लिए विवेक और विश्वास आवश्यक है।

3) याकूब 1:6-7: अविश्वास के कारण कभी-कभी संवाद कमजोर हो सकता है; मिश्रित आशा और संदेह हृदय को रोक लेते हैं।

व्यावहारिक विचार

हम अपने जीवन में किसी कार्य के आरम्भ में भय, संदेह या पूर्वाग्रह न बनाएं। यदि हम प्रभु की शक्ति के सामने विश्वास विकसित करते हैं—तो हम चमत्कारों के अधिक स्पष्ट संकेत देख सकते हैं। परिवार, चर्च या समाज में अविश्वास का वातावरण बन भी जाए, तो भी प्रार्थना और ईश्वर के वचनों पर दृढ़ता रखने से विश्वास बढ़ सकता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस verse में यीशु की शक्तियाँ अविश्वास के कारण पूरी तरह नहीं दिख पातीं, जो दिखाती है कि विश्वास एक ऐसी धुरी है जिस पर दिव्यता का कार्य निर्भर है। हमारी भूमिका है—विश्वास को बढ़ाने के उपाय करना, न कि स्थिति को नियंत्रित करना।

नोट: इस पाठ के लिए प्रसिद्ध पवित्र-व्याख्या-लेखकों के सारांश को संकलित करते समय,Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्दों से आवश्यक छोटे उद्धरण ही उपयोग में लिए गए हैं—शब्द-शास्त्र के अनुरूप।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 13:58 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं तुम से सच कहता हूँ, कि एलिय्याह के दिनों में जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बन्द रहा, यहाँ तक कि सारे देश में बड़ा आकाल पड़ा, तो इस्राएल में बहुत सी विधवाएँ थीं। (1 राजा. 17:1, 1 राजा. 18:1)

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