Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



लूका 4:25 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
यूहन्नी वाक्यों के पहले भाग में यीशु ने नबी-like उद्घोषणा के साथ अपने प्रेरित भक्तों को चेताया कि परमेश्वर की करूणा और कृपा किसी विशेष समुदाय तक सीमित नहीं है। लूका 4:25 में यीशु कहते हैं कि एलिय्याह के दिनों में आकाश बन्द रहा और तीन साल के समय बड़ा आकाल पड़ा, फिर भी यहूदियों के भीतर कई विधवाएँ थीं। यह बतलाता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद और चमत्कार जब-तब आदेशित समय पर केवल एक विशिष्ट समूह तक सीमित नहीं रहते, बल्कि व्यापक पृष्ठभूमि और विश्वास की उनकी योजना के अनुसार चलते हैं।
मुख्य विचार
यह वचन यीशु के सामाजिक-धार्मिक क्रम से बाहर जाकर व्यवस्था के अनुसार चमत्कार की पहुँच की सीमाओं को उठाने की बात करता है। एलिय्याह और आगमी घटनाओं के संदर्भ से संकेत मिलता है कि कठिन समय में भी ईश्वर की निजी उदारता और व्यवस्था किसी एक जाति-समुदाय तक नहीं सिमटती, बल्कि विश्वास के पात्रों के लिए खुली रहती है।
दो तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ और उनसे जुड़ाव
1 राजा 17:1 और 1 राजा 18:1 के संदर्भ में एलिय्याह के समय के ऐतिहासिक पाठ याद दिलाते हैं कि आकाल और चमत्कार एक निष्क्रिय इतिहास नहीं, बल्कि परमेश्वर की सार्वजनिक महिमा दिखाने के उपकरण हैं। साथ ही यहूदा-राजा और प्रत्यक्ष उद्धार की घटनाओं में भी ईश्वर की योजना एकरूप नहीं रहती; वह गरीब और निर्बल के साथ रहते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में कठिन समय आते हैं; तब भी याद रखें कि ईश्वर की कृपा विश्वव्यापी है। अपनी पीड़ा के बीच आप किस प्रकार विश्वास में ईश्वर के समय और योजना को मानते हैं, यह आपकी आस्था को मजबूत कर सकता है। दूसरों के प्रति दया और मदद के क्षेत्र में उठना, इस संदेश के अनुरूप है—क्योंकि परमेश्वर की करुणा केवल श्रेणियों तक सीमित नहीं रहती।
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षेप व्याख्या
- 1 राजा 17:1: एलिय्याह का ऐतिहासिक परिचय और आकाल की शुरुआत। यह संदर्भ बताता है कि प्रभु के कार्य समय और स्थान के अनुसार चलते हैं।
- 1 राजा 18:1: अग्नि-प्रवर्तन और ईश्वर की शक्ति दिखाने वाला क्षण। यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कठिन समय में भी परमेश्वर उपकार दिखाते हैं।
- मत्ती 23:37-39: यीशु का दृढ़ आह्वान कि वह अपनी नगरी को नहीं छोड़ते, और उनकी चिंगारी से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर का प्रेम क्षेत्रीय सीमाओं से परे है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद और चमत्कार किसी एक समाज या समूह तक सीमित नहीं हैं; वह समय और परिस्थिति के अनुसार निर्बलों, विधवाओं और अन्य संस्थाओं के लिए भी क्रिपा दिखाते हैं। हमारे लिए प्रेरणा यह है कि विश्वास में रहते हुए हम उनके समय को मानें और संसार के हर वर्ग के लिए दया और सहायता का हाथ बढ़ाएं।
तुलनात्मक उद्धरण (स्रोत): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों से संगत पंक्तियाँ सामान्य स्वर में संकलित हैं।