Old Testament
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लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



लूका 4:43 पर टिप्पणी
पश्चिमी किनारे के नगरों में रहते हुए यीशु अपने प्रचार को केवल एक जगह तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। लूका 4 में यह पर्वतीय उपदेशों के बाद यीशु के मिशन की दिशा–निर्देश स्पष्ट होते हैं: उसे और नगरों में भी परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाना आवश्यक है, क्यूंकि वह उसी उद्देश्य से भेजा गया है। इस वाक्य में यीशु की असंख्य शहर-यात्राओं के पीछे का ठोस उद्देश्य है—आम लोगों के मध्य जाकर उद्धार की प्रकाशन करना, उनकी आत्माओं को जागृत करना, और परमेश्वर के सामयिक राज्य की उद्घोषणा करना।
मुख्य अर्थ
यह कथन बताता है कि प्रचार-कार्य का विस्तार, एक सीमित रीति से नहीं बल्कि व्यापक दायरे में होना चाहिए। यीशु का उत्तरदायित्व यह है कि वह जहाँ उसे भेजा गया है वहाँ का संदेश साझा करे—यानी उद्धार का पुरजोर सार, जो तादात्म्य से मार्गदर्शन प्रदान करे और लोगों को परमेश्वर के राज्य के आगमन के आश्वासन से जोड़े। साथ ही यह दिखाता है कि ईश्वर के राज्य का कार्य किसी भी पीछे हटने वाला नहीं है; यह यात्राओं, सीमाओं और सीमाओं से परे होकर फैलना चाहिए।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ
यह वाक्य अन्य निर्णयों और उद्धार यात्रा के संदर्भ को जोड़ता है। उदाहरणतः, लूका 4:18-19 में यीशु ने उद्धार के अच्छे समाचार को बांटने की घोषणा की; मत्ती 28:19-20 में महान आज्ञा दी गयी कि सभी जातियों तक सुसमाचार पहुँचाया जाए; मरकु 16:15 भी प्रचार के वैश्विक आदेश को दर्शाता है। इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि सुसमाचार का प्रसार विश्वव्यापी उद्देश्य है, केवल एक स्थानीय समुदाय तक सीमित नहीं।
व्यावहारिक विचार
हममें से प्रत्येक को यह पूछना चाहिए: क्या मैं अपने जीवन में उस विस्तार को साझा कर रहा/रہی हूँ जो प्रभु ने दिखाया है? क्या मैं अपने समुदाय के बाहर भी प्रेम, दया और सावधानी के साथ शिष्य बनाऊँ? परमेश्वर के राज्य के प्रकाश को अपनी दिनचर्या, कार्यस्थल और पड़ोस में लेकर चलना—यही इस वचन की आज भी प्रासंगिक पुकार है।
संक्षिप्त समापन
लूका 4:43 यह स्मरण कराता है कि ईश्वर के राज्य का संदेश विभेदित नहीं है—यह उन्नत और व्यापक है। यीशु ने अपने मिशन के लिए स्पष्ट दिशा दी: और नगरों में भी यह सुसमाचार सुनना आवश्यक है, क्योंकि मैं इसलिए भेजा गया हूँ। यह प्रेरणा आज भी हमारे लिए है कि हम जहाँ भी हों, परमेश्वर के राज्य की रोशनी और सच्ची उद्धार की खबर पहुँचाने में सहभागी बनें।
Cross-references
- मत्ती 28:19-20: सभी जातियों तक शिक्षित करने और उद्धार का संदेश फैलाने का आज्ञा। यह बतलाता है कि प्रचार-कार्य वैश्विक फैलाव के उद्देश्य से है।
- लूका 4:18-19: प्रभु ने उद्घोषणा की किraagd उद्धार और बंदियों को मुक्त करना, ताकि राज्य का वचन पहुँच सके।
- मार्क 16:15: प्रचार-आदेश का सार्वभौमिक दायरा स्पष्ट करता है—सार्वजनिक प्रसार और विश्वास का संदेश।
महत्वपूर्ण उद्धरण नोट: एडम क्लार्क, अॅल्बर्ट बार्न्स और मैथ्यू हेन्री के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से प्रेरक बिंदु सीधे तौर पर इस सार में समाहित किए गए हैं; इन विचारों के अनुसार, “प्रचार का विस्तार” और “मिशन का उद्देश्य” मुख्य धुरी हैं।