Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



इस वचन का महत्व
लूका 4:14 में लिखा है कि यीशु पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से भरा हुआ गलील को लौटा और उसकी चर्चा आस-पास के देश में फैल गई। यह वाक्य इस बात की घोषणा है कि यीशु अपनी पृथ्वी-यात्रा के आरम्भिक चरणों में पवित्र आत्मा के प्रशिक्षण और अनुष्ठान से समर्थित होकर प्रचार-कार्य में प्रेरित और प्रभावशाली बने। यह पवित्र आत्मा से पूर्णता, एक ठोस आयोग, और उद्धार की अभि-प्रकाशिता का संकेत देता है।
पिछला संदर्भ और मूल स्थिति
यूं ही नहीं कि यीशु ने उपदेश दिया; वहाँ पहले उन्होंने चौकस रूप से प्रेरित होकर आत्मा के साथ प्रेरित होने की स्थिति बनाई। गलील वह क्षेत्र है जहाँ यीशु ने शांति, उपचार और धर्म-गाथा का प्रारम्भिक पुकार बना कर रखा। यह वाक्य बताता है कि तिथि-आसाव के भीतर यीशु के काम की पहली सफलता पवित्र आत्मा की सहायता से संभव हुई—जो स्वयं के सामाजिक और आध्यात्मिक बंधनों को तोड़ कर लोगों के बीच पहुँचती है।
मुख्य संदेश
धर्मशास्त्रीय विषयों के साथ संबंध
यह वाक्य तीन प्रमुख धाराओं से जोड़ता है:
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ
1) मत्ती 3:16-17— यीशु के Baptism के समय आत्मा की प्रकटता और पिता की पुष्टि; यह दर्शाता है कि आत्मा-प्राप्ति उनके शुरूआती ministry के आनंद-आधार थे।
2) मर्क 1:12-13— जंगल में प्रेरणा-परीक्षा और आत्मा की प्रेरणा से यीशु का प्रारम्भिक कदम; यहाँ आत्मा की शक्ति स्पष्ट है।
3) यूहन्ना 14:12— विश्वासी के लिए आत्मा के साथ कार्य करने की आह्वान; प्रचार-कार्य में आत्मा का सहयोग व्यापक है।
इन संदर्भों से यह निष्कर्ष निकलता है कि आत्मा-निर्देशन और विश्वसनीय प्रचार एक साथ चलते हैं, जिससे संदेश की सार्वभौमिकता बढ़ती है।
व्यावहारिक ध्यान
जो पाठक अपने जीवन में ईमानदारी से यीशु के साथ चलना चाहते हैं, उन्हें चाहिए कि वे आत्मा-आत्म-नियोजन के लिए खुला रहें—यानी प्रार्थना और पवित्र–शब्द के अध्ययन के माध्यम से आत्मा के निर्देशन को स्वीकार करें, ताकि हमारे कार्य, बोलचाल और प्रेम-संस्कार प्रचार-कार्य के समान बने रहें।
संक्षिप्त देवotional विचार
यीशु के गलील लौटते समय जहाँ उसने आत्मा की शक्ति पाई, वही हमारे लिए भी एक लोकोत्तरPROTO-निर्देश है: हमारी शक्तियाँ तब निकलती हैं जब हम परम पिता के निर्देशों के मुताबिक ईमानदार और निर्भय तरीके से अपने दिन-प्रतिदिन के कार्य करें। आत्मा की प्रेरणा हमें नयी आशा देता है और प्रजा के बीच विश्वास का प्रसार होता है।
सूक्ष्म उद्धरणीय संकेत
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से संकलित संकेत यह बताते हैं कि पड़ताल के दौरान यीशु की प्रारम्भिक सफलता आत्मा-स्वीकृति और प्रचार-योग्यता का संयुक्त परिणाम है।
छोटे शब्दों में प्रकार्य-लाभ
Cross-reference notes:
• आत्मा के साथ नेतृत्व से शक्तिशाली प्रचार संभव होता है—यहोवा की योजना में यह सामान्य मार्ग है।
• प्रचार का प्रभाव समय के साथ फैलता है—गलील से देश के बाकी भाग तक।