लूका 4:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह आराधनालय में से उठकर शमौन के घर में गया और शमौन की सास को तेज बुखार था, और उन्होंने उसके लिये उससे विनती की।

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लूका 4:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

येसु ने आराधनालय से उठकर शमौन के घर गया जहाँ शमौन की सास तेज बुखार से पीड़ित थी; उन्होंने उसी समय उनके लिये विनती की। यह घटना दिखाती है कि मसीह लोगों के सार्वजनिक कर्यों के बाद भी घरेलू जीवन की पीड़ाओं के प्रति संवेदनशील रहते हैं और व्यथित लोगों के लिए दया दिखाते हैं।

प्रसंगगत पृष्ठभूमि

यह घटना लूका के प्रचार-कार्य के प्रारम्भिक चरणों से जुड़ी है, जब यीशुGalilee में धर्म-गुरुओं के बीच अपनी शक्ति और पात्रता को प्रमाणित करते हैं। शमौन (पेत्रुस) की पत्नी की सास की बीमारी एक पारिवारिक परिस्थिति है जो समाज-समुदाय के भीतर चिकित्सा और स्थिरता के महत्व को उजागर करती है। पवित्रशास्त्र में इस प्रकार की सूचियाँ भाव-सम्वेदना, उपचार और समुदाय के लिए यीशु की उपलब्धता को दिखाती हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • यीशु का सजग दया: शमौन की सास की अवस्था पर तुरन्त ध्यान देना और उनके लिये विनती करना दर्शाता है कि Jesus अपने शिष्यों और उनके परिवारों की आवश्यकताओं को नजरअंदाज नहीं करते।
  • उद्धार-क्रिया का कार्यजगत: बीमारी की स्थिति में भी प्रभु के अधिकार का प्रभाव स्पष्ट है — बुखार पकड़कर शारीरिक पीड़ा से निजात मिलती है, जो आगे के चंगा होने की प्रतीकात्मक कला का संकेत है।
  • समुदायिक संतुलन: परिवार की सुदृढ़ता और घर का आँगन आरोग्य होने से एक समुदाय स्थिर रहता है; यीशु की सेवा परिवारों के लिए भी एक प्रकार की आरंभिक कलकत्ता है।

छोटी थीमैटिक सूची (मुख्य निष्कर्ष)

अन्य उद्धरण-सम्बन्धी पाठ

1) इशारा करता है कि उद्धारकर्ता लोगों के दैनिक जीवन के छोटे-छोटे क्षणों में भी आते हैं; जैसे किसी बीमार के लिये दया।

2) आगे के घटनाक्रम की ओर संकेत: शमौन की सास से प्रारम्भ होकर उनका आरोग्य, फिर रोगियों के पास जाकर देह-सम्बंधी चंगेपन की कहानी का विस्तार।

पठनीय क्रॉस-रेफरेंसेस

- अन्य जगह जहाँ यीशु के रोगियों के साथ करुणा और स्पर्श का उल्लेख है, वहां भी प्रेरणा मिलती है कि उसका राज्य दुःख के समय भी पहुँचता है।

- सार्वजनिक शिक्षा के पहले चरण में परिवार-परिदृश्य का महत्व दर्शाने वाले बिंदु देखें ताकि समझ सके कि परमेश्वर के राज्य का आना व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन को कैसे प्रभावित करता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हमारे लिए शिक्षा यह है कि कठिन समय में भी उद्धारकर्ता को बुलाने में हिचक न हो; छोटी-छोटी पीड़ाओं के लिए भी प्रार्थना और मदद माँगना चाहिए। उनके करुणा-प्रिय स्वर से हम भी आंतरिक शांति और समुदायिक समर्थन पा सकते हैं।

नोट

नीचे दी गई उद्धरण-रेफरेंसेस में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठीक-कथन सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं; केवल उनके विचारों की प्रेरणा के स्वरूप में समाहित है।

महत्वपूर्ण उद्धरण/कथन

“क्योंकि उसने देखा कि हमारी दुर्बलताएँ कितनी गहराई तक पहुँच सकती हैं, इसलिए वह दया दिखाने के लिए आया है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 4:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यीशु ने पतरस के घर में आकर उसकी सास को तेज बुखार में पड़ा देखा।

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और वह तुरन्त आराधनालय में से निकलकर, याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्द्रियास के घर आया।

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और अब भी मैं जानती हूँ, कि जो कुछ तू परमेश्‍वर से माँगेगा, परमेश्‍वर तुझे देगा।”

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