Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



सीधे अर्थ का सार
येसु ने आराधनालय से उठकर शमौन के घर गया जहाँ शमौन की सास तेज बुखार से पीड़ित थी; उन्होंने उसी समय उनके लिये विनती की। यह घटना दिखाती है कि मसीह लोगों के सार्वजनिक कर्यों के बाद भी घरेलू जीवन की पीड़ाओं के प्रति संवेदनशील रहते हैं और व्यथित लोगों के लिए दया दिखाते हैं।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
यह घटना लूका के प्रचार-कार्य के प्रारम्भिक चरणों से जुड़ी है, जब यीशुGalilee में धर्म-गुरुओं के बीच अपनी शक्ति और पात्रता को प्रमाणित करते हैं। शमौन (पेत्रुस) की पत्नी की सास की बीमारी एक पारिवारिक परिस्थिति है जो समाज-समुदाय के भीतर चिकित्सा और स्थिरता के महत्व को उजागर करती है। पवित्रशास्त्र में इस प्रकार की सूचियाँ भाव-सम्वेदना, उपचार और समुदाय के लिए यीशु की उपलब्धता को दिखाती हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीमैटिक सूची (मुख्य निष्कर्ष)
अन्य उद्धरण-सम्बन्धी पाठ
1) इशारा करता है कि उद्धारकर्ता लोगों के दैनिक जीवन के छोटे-छोटे क्षणों में भी आते हैं; जैसे किसी बीमार के लिये दया।
2) आगे के घटनाक्रम की ओर संकेत: शमौन की सास से प्रारम्भ होकर उनका आरोग्य, फिर रोगियों के पास जाकर देह-सम्बंधी चंगेपन की कहानी का विस्तार।
पठनीय क्रॉस-रेफरेंसेस
- अन्य जगह जहाँ यीशु के रोगियों के साथ करुणा और स्पर्श का उल्लेख है, वहां भी प्रेरणा मिलती है कि उसका राज्य दुःख के समय भी पहुँचता है।
- सार्वजनिक शिक्षा के पहले चरण में परिवार-परिदृश्य का महत्व दर्शाने वाले बिंदु देखें ताकि समझ सके कि परमेश्वर के राज्य का आना व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन को कैसे प्रभावित करता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे लिए शिक्षा यह है कि कठिन समय में भी उद्धारकर्ता को बुलाने में हिचक न हो; छोटी-छोटी पीड़ाओं के लिए भी प्रार्थना और मदद माँगना चाहिए। उनके करुणा-प्रिय स्वर से हम भी आंतरिक शांति और समुदायिक समर्थन पा सकते हैं।
नोट
नीचे दी गई उद्धरण-रेफरेंसेस में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठीक-कथन सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं; केवल उनके विचारों की प्रेरणा के स्वरूप में समाहित है।
महत्वपूर्ण उद्धरण/कथन
“क्योंकि उसने देखा कि हमारी दुर्बलताएँ कितनी गहराई तक पहुँच सकती हैं, इसलिए वह दया दिखाने के लिए आया है।”