Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



लूका 4:5 का पाठ—परिप्रेक्ष्य में समझ
येशु मसीह के प्रारम्भिक प्रचारकार्यो के दौरान शैतान उसे जंगल से परीक्षा देता है। इस क्षण में शैतान उसे पालिटिकल और विश्वसनीय महत्त्वाकांक्षाओं के केन्द्र में ले जाता है: वह उसे पल भर में सारा संसार के राज दिखाता है। यह घटना 우리 को यह दिखाती है कि परीक्षा सिर्फ व्यक्तिगत रूप से नैतिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह प्रभु के लिए सही आधार पर राजकीय-उद्धार की राह चुनने की चुनौती है। शैतान की यह पेशकश वास्तव में इस बात पर केंद्रित है कि सत्ता और शासन से कुछ भी प्राप्त करने से पहले, यीशु की वैधानिकता, भगवान के उद्देश्य और लोगों के कल्याण की दिशा में उनका उद्देश्य कितना दृढ़ है।
मुख्य अर्थ
इस आग्रही दृश्य में यीशु पर एक असामान्य प्रस्ताव किया गया: यदि वह शर्त स्वीकारे, तो शैतान तुरंत सत्ता और ग्लोरी के ठोस स्रोत दिखाता है। परन्तु यीशु ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वह केवल यह मानते हैं कि परमेश्वर के बारे में समर्पण और उसकी आराधना ही उनके राजय के स्रोत होंगे। यह दर्शाता है कि न तो दृश्य आकर्षण और न ही सांसारिक सत्ता, परमेश्वर की योजना की पूर्ति के लिए आवश्यक नैतिक आधार बन सकते।
दो–तीन प्रमुख थीम
संबद्ध पाठ—संक्षेप अनुपूरक
यही तरह की परीक्षा अन्य जगह भी आती है जहाँ यीशु परमेश्वर के इरादे के अनुरूप निर्णय लेते हैं। उदाहरणतः यहूदी मंदिर के तल पर प्रलोभन की घटनाओं के साथ-साथ, सेवकाई और बलिदान के संदर्भों में भी सत्ता बनाम सेवकाई के बीच स्पष्ट अंतर दिखता है।
व्यावहारिक विचारा
आज के जीवन में भी कभी–कभी हमें ऐसी बहकावे मिलते हैं जो “सब कुछ दिखता है” के प्रभाव से आते हैं—बहुत बड़ी सफलता, लोकप्रियता या समझौते से। इस तरह की परिस्थितियों में हमारा उत्तर वही रहेगा जो यीशु ने दिया: परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप नैतिकतम और दयालु मार्ग चुनना। कठिन निर्णयों में प्रार्थना और पवित्रशास्त्र के निर्देश हमारी सुरक्षा बनते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त ब्योरा
• मत्ती 4:8–10 — शैतान का वही दृश्य प्रलोभन का दूसरा वर्णन, जहाँ यीशु ने परमेश्वर के एकालापपरक प्रभुत्व पर भरोसा करते हुए प्रतिकार किया।
• इब्रानियों 2:18 — यीशु के हीरक-आत्मा कैसे क्रूर परीक्षणों में सहायता प्राप्त करता है, यह दर्शाता है कि वह हमारी कमजोरियों के साथ सहानुभूति रखते हैं।
• इफिसियों 6:11–13 — हमारी लड़ाई सांसारिक शक्ति के विरुद्ध नहीं बल्कि परमेश्वर के वस्त्रधारी के साथ है; विश्वास की तलवार और प्रार्थना से समर्थ बने रहें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 4:5 में शैतान के प्रलोभन के पल में, यीशु ने स्पष्ट किया कि सत्ता और भरपूर चमक भी तब तक शास्त्र-आधी धार्मिक दायित्व नहीं बन पाते जब तक वे परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप नहीं होते। हमारे जीवन में भी यही आज्ञाकारिता की कसौटी है: सब कुछ परमेश्वर के राज्य की राह पर केंद्रित होना चाहिए, न कि दृश्य आकर्षण के पीछे भागना।