Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 4:1 लूका 4:2 लूका 4:3 लूका 4:4 लूका 4:5 लूका 4:6 लूका 4:7 लूका 4:8 लूका 4:9 लूका 4:10 लूका 4:11 लूका 4:12 लूका 4:13 लूका 4:14 लूका 4:15 लूका 4:16 लूका 4:17 लूका 4:18 लूका 4:19 लूका 4:20 लूका 4:21 लूका 4:22 लूका 4:23 लूका 4:24 लूका 4:25 लूका 4:26 लूका 4:27 लूका 4:28 लूका 4:29 लूका 4:30 लूका 4:31 लूका 4:32 लूका 4:33 लूका 4:34 लूका 4:35 लूका 4:36 लूका 4:37 लूका 4:38 लूका 4:39 लूका 4:40 लूका 4:41 लूका 4:42 लूका 4:43 लूका 4:44



लूका 4:13 पर टिप्पणी: शैतान के परीक्षण के बाद कुछ समय के लिये विश्राम
पवित्र उद्धरण: “जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।” यह वाक्य लूका के कहानी के भीतर उस दृश्य का भाग है जहाँ यीशु ने जंगल में 40 दिन उपवास किया और शैतान ने उसे तीन प्रमुख परीक्षा दी। इन परीक्षणों के बाद शैतान थोड़ा विराम लेकर दूर चला गया, ताकि यीशु आगे की राह की तैयारी कर सके। यह क्षण आध्यात्मिक संघर्ष के बीच एक शांतावस्था और नयी स्थिति का संकेत है: यीशु की सत्यनिष्ठा और परमेश्वर के उद्देश्य के लिए समर्पण ही शैतानी दबाव पर जीत बन गई।
केंद्रीय अर्थ
यहVerse शैतान के प्रस्तुत किए गए दबावों के बीच यीशु की अडिगता को दर्शाता है। भले ही यीशु मानव रूप में जिंदा रहने वाला एक भक्त हो, पर उसका उद्देश्य परम पिता के वचन के अनुसार है। शैतान के सभी परीक्षणों के समाप्त होने के बाद वह विश्राम नहीं, बल्कि अगला चरण शुरू करने के लिए तैयार होता है। यह बताता है कि.canvas शारीरिक थकान के बावजूद, आत्मिक संघर्ष का असल पल तब आता है जब नैतिक निर्णय स्पष्ट होता है।
मुख्य विषय—तीन बिंदु
संबद्ध पाठ—संयुक्त संदर्भ
• मत्ती 4:1–11 में यीशु के 3 परीक्षण, जो यहाँ के घटनाक्रम का पृष्ठभूमि बनाते हैं — इससे याद दिलाता है कि हर परीक्षा के बाद शरारती शक्तियाँ पीछे हटने लगती हैं।
• मरकूस 1:12–13 भी इस घटना के साथ सामंजस्य रखता है: यीशु का जंगल में समय-समय पर विश्वास की परीक्षा।
• यूहन्ना 14:30 में ईसा ऐसा संकेत देते हैं कि शैतान के प्रभाव एक समय के लिए घटते हैं जब परम पिता के साथ नज़दीकी बने रहती है।
व्यावहारिक चिंतन
हम भी अपने जीवन में शारीरिक थकान या कठिन परिस्थितियों के बीच ऐसे क्षण पा सकते हैं, जब संघर्ष के बाद शांति मिलती है। यह याद दिलाता है कि आत्मिक दृढ़ता केवल परिस्थिति से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन पर विश्वास और नियमित आराधना से बनती है। जब हम कठिनाइयों के दौरान शांति की खोज करते हैं, तो हमें एक नई दिशा मिलती है—नये कार्यों के लिए तैयार हो जाना।
संक्षिप्त समापन
यह दृष्य यह स्पष्ट करता है कि शैतान के परीक्षणों के बाद उपयुक्त विश्राम तभी संभव है जब हमारा मन और हृदय परमेश्वर के वचन की धुरी पर टिके रहते हैं। यीशु ने जो सच और दृढ़ विश्वास दिखाया, वह विश्वासी को भी आगामी सेवकत्व के लिए प्रेरित करता है—कि हर कठिनाई के बाद भी हमारा उद्देश्य परम पिता के उद्देश्य के अनुरूप बने।
पढ़ने योग्य उद्धरण (ध्यान दें: स्पष्ट शब्दावली के लिए केवल संक्षिप्त संदर्भ)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के साथ एकीकृत समझ को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है; इनमें से कुछ विचार उनके चरित्रगत शब्दों के अनुरूप हैं—परंतु पूर्ण उद्धरण केवल संकल्पनात्मक रूप में प्रयुक्त हैं।