Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मरकुस 1:29 का संदर्भ और अर्थ
इस पद में यीशु अपने आरम्भिक आराधनालयीन कार्य के तुरंत बाद अपने शिष्य के साथ शमौन (पेत्रुस) और अन्द्रियास के घर जाते हैं। यह घटनाक्रम उनके मंत्रालय के प्रारम्भिक चरण को प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रचारकार्य के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक बन्धनों के भीतर नए संदेश की गूँज फैलती है। मरकुस का विवरण इस बात पर जोर देता है कि यीशु यात्रा के दौरान अपने परिचित स्थानों को भी उद्धार के संदेश के लिए अवसर बनाते हैं।
मुख्य विचार
इस वाक्य में तीन तत्व स्पष्ट होते हैं: (1) यीशु का गतिशील प्रचार-कार्य, (2) परिवार के सदस्यों के साथ मिलना और (3) समुदाय के भीतर प्रभु के राज्य की वेग से उभरती स्थिति। शमौन और अन्द्रियास के घर आना दर्शाता है कि उद्धार की योजनाएं व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर भी प्रवेश करती हैं; यह स्थल-आधारित जुड़ाव बतलाता है कि प्रभु सामाजिक सरोकारों से जुड़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाते हैं।
मुख्य विषय (2–3)
संबद्ध पाठ
पठनीयता के लिए यह verses के आस-पास के घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं: मरकुस 1:21-28 (येशू का दैवीय अधिकार प्रदर्शित होना), मार्क 1:35 (एकांत में प्राथना), तथा लूका 4:38-39 (घर के भीतर रोगों का उपचार)। इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि यीशु का प्रभुत्व और करुणा हर स्तर पर प्रगट होते हैं—समुदाय, परिवार, और संस्थागत धर्म के भीतर भी।
व्यावहारिक चिंतन
हम कैसे अपने दैनिक स्थानों में ईश्वर के kingdom की ज्ञानेच्चा बनाते हैं? यह वाक्य हमें प्रेरणा देता है कि उद्धार का संदेश अपने परिचित वातावरण में भी लाया जाए। परिवार और स्थानीय समुदाय के भीतर प्रेम, सेवा और बाइबल के सिद्धांतों को व्यवहार में लाने की नीति अपनाएं; छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन का आरम्भ बनते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 1:29 दिखाता है कि यीशु का लक्ष्य केवल सभा-घटकों तक सीमित नहीं, बल्कि घर-घर और समुदाय-समुदाय तक उद्धार की घोषणा है। यह बोध कि प्रभु हर सामाजिक संपर्क में उपस्थित रहते हैं, हमारे विश्वास को दैनिक जीवन में जीवित बनाता है।
cross-references
1) मरकुस 1:21–28 – यीशु का अधिकार-पूर्ण उद्घोष; 2) लूका 4:38–39 – घर में रोगी-उद्धार; 3) मरकुस 1:35 – एकांत में प्रार्थना की आवश्यकता। इन संदर्भों से प्रेरणा मिलती है कि सेवकाई के बीच प्रार्थना और समुदायीय सहभागिता कैसे संतुलित रहे।
नोट: इस पंक्तिकास में प्रकाशित किया गया है कि “और वह तुरन्त आराधनालय में से निकलकर, याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्द्रियास के घर आया”—यह मिसाल देता है कि प्रभु के संदेश की गति और उसके प्रवेश के स्थान भी बदलाव नहीं मानते; वे हर वातावरण को आशीष देते हैं।
अनुशंसा: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी पारंपरिक टिप्पणीकारों के संकल्पनात्मक प्रकाशनों के सार को संक्षेप में मिलाकर नीचे दिया गया है: उनके उद्धरणों का संक्षिप्त उल्लेख आवश्यकता अनुसार किया गया है।