मरकुस 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और कहा, “समय पूरा हुआ है, और परमेश्‍वर का राज्य निकट आ गया है*; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो।”

पिछला पद
« मरकुस 1:14
अगला पद
मरकुस 1:16 »

मरकुस 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकुस 1:15 का महत्व

यह वाक्य यीशु के सार्वजनिक सेवा के शुरुआती संदेश को दर्शाता है। समय पूरा हुआ है का उद्धोष और परमेश्वर के राज्य का निकट आना यह दोनो एक साथ यह दर्शाते हैं कि ईश्वर की योजना पूरे हो कर सामने आ रही है। यह निन्यानवे प्रतिशत क्रिया-विशेष नहीं, बल्कि एक संकटशास्त्र-पूर्ण संकेत है: लोग अब प्रकाशित प्रभु की सत्ता को स्वीकार कर के जीवन-पथ बदल दें। इस वचन में विश्वास और पश्चाताप, दोनों एक साथ मांगते हैं; परिवर्तन को व्यवहारिक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है: मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो।

पार्श्व-प्रासंगिक संदर्भ और मूल संदर्भ

मरकुस 1:15 में यीशु ने गलील की जनता से सीधे कहा, यह समय ऐतिहासिक रूप से रोम के कब्जे और विद्रोहों के बीच का वह काल है जब यहूदियों में चाहना थी कि प्रभु राज्य स्पष्ट रूप से स्थापित हो। “समय पूरा हुआ है” से संकेत मिलता है कि परमेश्वर की समय-योजना का भूमि-उत्थान अब घटित हो रहा है। “परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है” का मूल अर्थ है—ईश्वर का souverain राज, जिसकी उपलब्धि के लिए लोगों को तैयारी करनी चाहिए, नये जीवन की शास्वत दिशा में लौटना चाहिए।

मुख्य संदेश

1) समय की पूरी तैयारी: यह संकेत दे रहा है कि ईश्वर की योजना, उद्धार का क्षण, अब पास है। 2) परमेश्वर का राज्य निकट आना: यह उद्घोषणात्मक अधिकार है—राज्य आ रहा है, लेकिन यह एक आंतरिक, आत्म-निष्ठ परिवर्तन का आह्वान है। 3) मन फिराओ और विश्वास: पश्चाताप (मन फिरना) और विश्वास (सुसमाचार पर) दोनों मिलकर एक नया जीवन-परिचय बनाते हैं।

विधि-सिद्धांत और थीम

  • पश्चाताप के साथ आस्था: परिवर्तन का पहला कदम आश्रय बनता है—जीवन के उद्देश्य को परमेश्वर के अनुरूप ढालना।
  • राज्य का आना: राज्य का गुण-धर्म, धर्म-निष्ठा, प्रेम, और न्याय का संचय—ये सभी बनते हैं जब लोग ईश्वर के मार्ग पर चलते हैं।
  • सुसमाचार पर विश्वास: प्रेरक संदेश, जो अनुदान नहीं, बल्कि आत्म-गत सुधार और नई दिशा देता है।

अनुशीलन विचार और पारिश्रය संयोग (Cross-references)

1) मत्ती 4:17 — यीशु के प्रारम्भिक उपदेश का स्वर: “परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है” जैसा संदेश ही यहाँ पुनः दोहराया गया है। यह बताता है कि नगर-समुदाय से लेकर व्यक्तिगत जीवन तक बदलाव का बुलावा बराबर है।

2) पतरस 1:13-14 — जीवन में परिवर्तन के स्पष्ट आग्रह के साथ मन फिराने की प्रकृति: सच्चा विश्वास वर्तमान जीवन के ढांचे को नया बनाता है।

3) लूका 4:43 — यीशु का राज्य-कार्य क्यों नहीं रुकता: राज्य का आगमन सिर्फ नियम-पालन नहीं, बल्कि उद्धार की क्रिया है जिसे लोग वास्तविक सेवाभाव से प्राप्त करें।

सारगर्भित टिप्पणी—टीका से संकलित विचार

मॉउथ्यू चेनरी (Matthew Henry) और ऐलबर्ट बर्न्स (Albert Barnes) के पारंपरिक विचारों के अनुसार, यह प्रमुख संदेश है कि राज्य-आगमन परमेश्वर के कर्तव्य और उद्धार के दायित्व से जुड़ा है; मन के परिवर्तन के बिना घोषणा केवल एक सुर्खी बन जाएगी। एडम क्लार्क (Adam Clarke) यह बताते हैं कि “समय पूरा हुआ है” कहना मानव इतिहास के क्षण-विशिष्टता की पुष्टि है—क्योंकि प्रभु के राज्य का सच मानवीय जीवन की हर दिशा को प्रभावित करता है, न कि केवल दर्शन-यह माना जाना चाहिए। एक और सार्वजनिक-domain विचारक के दृष्टिकोण से, इस उद्घोषणा में सुसमाचार के पूर्णत्व की दिशा स्पष्ट है: यह व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन दोनों में नया आरम्भ है।

संक्षिप्त devotional reflection

प्रिय पाठक, इस वचन को सुनते समय अपने भीतर यह प्रश्न उठाइए: क्या मेरा मन सचमुच परिवर्तन के लिए तैयार है? क्या मैं सत्य के राजा के राज्य को अपने दैनिक निर्णयों में स्वीकार कर रहा/रही हूँ? आज ही नम्र मन से परमेश्वर के राज्य का हिस्सा बनने का प्रयास करें—जो सरल विश्वास और निष्ठा से शुरू होता है, और प्रेम, दया और ईमानदारी के बर्तनों में विकसित होता है।

छोटे संदर्भ-आवश्यकन

अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस: मत्ती 4:17; लूका 4:43; 1 पतरस 1:13-14. इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पश्चाताप और विश्वास का संयोजन कैसे जीवन-यात्रा को नया दिशा देता है और परमेश्वर का राज्य कैसे व्यक्तिगत जीवन के स्तर पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मत्ती 3:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 3:2 (HINIRV) »
“मन फिराओ*, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।”

प्रेरितों के काम 2:36 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 2:36 (HINIRV) »
अतः अब इस्राएल का सारा घराना निश्चय जान ले कि परमेश्‍वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।”

इफिसियों 1:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इफिसियों 1:10 (HINIRV) »
कि परमेश्‍वर की योजना के अनुसार, समय की पूर्ति होने पर, जो कुछ स्वर्ग में और जो कुछ पृथ्वी पर है, सब कुछ वह मसीह में एकत्र करे।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें