Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मरकुस 1:9 पर टिप्पणी—येशु की शुरुआत और नास्त व्यवस्था
मुख्य interpretive बिंदु: यीशु ने गलील से आकर नासरत में जन्म लेने के बाद यरदन के किनारे यूहन्ना से बपतिस्मा लिया; यह घटना परम पिता के साथ यीशु की धार्मिक-सामाजिक भूमिका की मान्यता का आधिकारिक आरम्भ है और मसीह-स्वरूप के सार्वजनिक पदार्पण का संकेत है। यह बपतिस्मा न केवल यीशु के विश्वासी-जीवन की ética को दर्शाता है, बल्कि उद्धार-कार्य के लिए उसकी प्रेरणा और आत्म-स्वीकृति की पुष्टि भी है।
लिटरेरीय संदर्भ
इस वाक्य में मार्क के लेखन-कौशल से एक ठोस आरम्भ दिखता है: यीशु का उतरना एक साधारण घटना नहीं, बल्कि आकाशवाणी-पूर्वक निर्धारित घटना है। नासरत से आना दर्शाता है कि यीशु मनुष्य के रूप में आम जीवन की ओर भी जाते थे, फिर यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेकर वह सार्वजनिक सेवक के रूप में पहचाने जाते हैं। यह कदम पवित्र preparing-संक्रमण था—प्री-प्रेषण, जो आगे चलकर सुसमाचार के आदेश के लिये उसे “चाहे पापियों के लिये” बुलाने के कार्य में ले जाएगा।
धार्मिक-थियोलॉजिक महत्व
बपतिस्मा, यरदन का जल, और यूहन्ना का संदेश इस घटना में तीन बातें मिलती हैं: (1) पाप की रजिस्ट्री से मुक्त होने की प्रतीक्षा में इब्न-आधीकार—कृपया ध्यान दें कि यीशु अपने प्रेम से प्रेरित होकर पाप-के लिए स्वयं को नहीं दंडित कराते, बल्कि उसके द्वारा उद्धार की योजना पूरा होता है; (2) उसकी नैतिकता और पवित्रता का प्रदर्शन—यौन-धर्म नहीं, बल्कि एक पवित्र जीवन-संहिता; (3) त्रिविध आशीष—पवित्र आत्मा का अवतरण, आकाश से पिता की उद्घोषणा, और मसीह के रूप में प्रभु-समर्थन।
ग्रंथ-संयोजन और पारस्परिक सम्बन्ध
इस वाक्य से निम्न दायरे में क्रिया-सम्बन्ध स्पष्ट होते हैं:
क्रॉस-रेफरेंस के तौर पर आप निम्न में से देख सकते हैं: - स्रोत में बपतिस्मा के प्रतीक की भूमिका (यूहन्ना 3:22-30) — यहाँ वर्णन है कि बपतिस्मा एक प्रतीक है जो पाप की क्षमा और आत्मा की उपस्थिति को दर्शाता है। - यीशु के जगत-युग के आरम्भ में निर्गमन की पुष्टि (यशायाह 42:1) — मसीह के चयन और प्रचार के रूप में।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 1:9 हमें दिखाता है कि यीशु का पृथ्वी-यात्रा लोकल जीवन से लेकर देव-कार्य के उच्चतम मिशन तक की ओर अग्रसर है। नासरत से उतरना और यूहन्ना से बपतिस्मा लेना एक साथ यह संकेत देते हैं कि मसीह इस पृथ्वी के मूलधार से जुड़ते हैं, ताकि उद्धार का युग शुरू हो और पिता की स्वीकृति ऊपर से स्पष्ट हो जाए।
स्वीकृत उद्धरण (ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से)
अगर आप ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण को देखना चाहें, तो नीचे संक्षेप में मिलने वाली समर्थित राय से सहायता मिलती है:
मैथ्यू हरनी (Matthew Henry) कहते थे कि यीशु का यह कदम बताता है कि वह अपनी भूमिका के लिए संपूर्ण मानवीय रीतियों में भाग लेते हैं और पवित्रता के साथ उद्धार के रास्ते का आरम्भ करते हैं।
एलबर्ट बार्न्स (Albert Barnes) ने उद्धृत किया होगा कि बपतिस्मा एक आधिकारिक आह्वान है जो न केवल प्रतिज्ञा को स्मरण कराता है बल्कि सार्वजनिक रूप से यीशु के दायित्व को मान्य करता है।
एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने भी संकेत दिया होगा कि यह घटना मसीह के समुदाय-सेवक होने के प्रमाण के रूप में है, जिसमें जल-प्रवाह से पवित्र आत्मा का आह्वान सम्बद्ध है।
संक्षिप्त cross-reference में उद्धृत संकेत
1) यूहन्ना 3:22—बपतिस्मा का प्रतीकात्मक अर्थ; 2) यशायाह 42:1—आगत मसीह के चयन का पूर्व-आदेश; 3) मत्ती 3:13-17—येशु का बपतिस्मा-प्रकरण—परम पिता की आवाज़ और आत्मा का नहीं-भावी उतरना।