Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मरकुस 1:5 — तुरंत संदर्भ और संदेश
येरूशलेम और समूचे यहूदिया के लोगों का एकत्र होना यह दर्शाता है कि येसु के पहले प्रचार-कार्य के समय जड़-मानस में एक नया परिवर्तन आ रहा था। रीति-रिवाजों के भीतर या बाहर जो लोग थे, वे सभी पाप-स्वीकृति की ओर खींचे चले आए—यह स्पष्ट करता है कि बपतिस्मा और पाप-स्वीकारोक्ति सामाजिक-धार्मिक बंधनों को नहीं, बल्कि आत्मा की परिवर्तनशीलता को दर्शाते हैं।
ईश्वर और विश्वास के प्रति टेक
पवित्र ग्रंथ हमें दिखाता है कि परमेश्वर दयालुता और पाप-स्वीकृति के लिए खुले स्थान बनाते हैं। बपतिस्मा लेना यह संकेत है कि लोग अपने जीवन के पुराने चक्र से निकलकर परमेश्वर के राज्य के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह घटनाक्रम दिखाता है कि परमेश्वर स्वयं मतभेदों के बावजूद लोगों को आमने-सामने बुलाकर उनके साथ एक सीधी बातचीत चाहते हैं—ताकि वे अपने पापों को मानकर उससे दूर हों।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
“यरदन नदी” में बपतिस्मा लेना एक पवित्र-स्थिति को दर्शाता है—परंपरागत तौर पर पापों से निर्मल होकर नया जीवन शुरू करने का प्रतीक। ”अपने पापों को मानकर” का अर्थ है—मानना कि हम दोषी हैं और परमेश्वर के पास क्षमा की ज़रूरत है। यह आत्म-स्वीकृति और परमेश्वर पर निर्भरता के साथ आता है, न कि हमारे अच्छे कर्मों के आधार पर.
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसे
संक्षेप में, यह प्रेम और क्षमा का निमंत्रण है—जो हर वह व्यक्ति जो पाप-ग्रहण से मुक्त होकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश पाने की इच्छा रखता है, उसे बुलाता है।
आज का उपयोगी मार्गदर्शन
हममें से प्रत्येक को यह सोचना चाहिए कि हमने कब परमेश्वर के सामने अपने आप को पाप के लिए स्वीकार किया और क्या हमने नये जीवन की शुरुआत के लिए कदम उठाए हैं। जीवन के हर क्षेत्र में सत्यापित आचरण की चाह रखना, और दूसरों के लिए भी यही नम्र आग्रह रखना सहज चरित्र बनाता है।
एक संक्षिप्त एकता-नोट
यह पाठ-पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि विश्वास यीशु के आगमन से जुड़ा सामाजिक-धार्मिक परिवर्तन नहीं, बल्कि अंतरतम परिवर्तन की शुरुआत है—जहाँ हृदय से पाप को मानकर उसे छोड़ना और परमेश्वर के नये जीवन की ओर बढ़ना आवश्यक है।
दृष्टांत-ध्वनि (मूल स्रोतों से संयोगित विचार):
Matthew Henry के अनुसार यह बपतिस्मा बाह्य क्रिया से अधिक आंतरिक परिवर्तन का संकेत है; Albert Barnes इसे देखने योग्य प्रतिक्रियाओं के साथ एक प्रेरणा मानते हैं; Adam Clarke इसे परमेश्वर के राज्य के उद्घाटन के रूप में देखते हैं।