मरकुस 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सारे यहूदिया के, और यरूशलेम के सब रहनेवाले निकलकर उसके पास गए, और अपने पापों को मानकर यरदन नदी* में उससे बपतिस्मा लिया।

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मरकुस 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकुस 1:5 — तुरंत संदर्भ और संदेश

येरूशलेम और समूचे यहूदिया के लोगों का एकत्र होना यह दर्शाता है कि येसु के पहले प्रचार-कार्य के समय जड़-मानस में एक नया परिवर्तन आ रहा था। रीति-रिवाजों के भीतर या बाहर जो लोग थे, वे सभी पाप-स्वीकृति की ओर खींचे चले आए—यह स्पष्ट करता है कि बपतिस्मा और पाप-स्वीकारोक्ति सामाजिक-धार्मिक बंधनों को नहीं, बल्कि आत्मा की परिवर्तनशीलता को दर्शाते हैं।

ईश्वर और विश्वास के प्रति टेक

पवित्र ग्रंथ हमें दिखाता है कि परमेश्वर दयालुता और पाप-स्वीकृति के लिए खुले स्थान बनाते हैं। बपतिस्मा लेना यह संकेत है कि लोग अपने जीवन के पुराने चक्र से निकलकर परमेश्वर के राज्य के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह घटनाक्रम दिखाता है कि परमेश्वर स्वयं मतभेदों के बावजूद लोगों को आमने-सामने बुलाकर उनके साथ एक सीधी बातचीत चाहते हैं—ताकि वे अपने पापों को मानकर उससे दूर हों।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

“यरदन नदी” में बपतिस्मा लेना एक पवित्र-स्थिति को दर्शाता है—परंपरागत तौर पर पापों से निर्मल होकर नया जीवन शुरू करने का प्रतीक। ”अपने पापों को मानकर” का अर्थ है—मानना कि हम दोषी हैं और परमेश्वर के पास क्षमा की ज़रूरत है। यह आत्म-स्वीकृति और परमेश्वर पर निर्भरता के साथ आता है, न कि हमारे अच्छे कर्मों के आधार पर.

प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसे

  • यूहन्ना 1:29 — मसीह के आगमन के साथ इस पंक्ति की पूर्ति का संकेत: ईश्वर के मेहानुभाव का प्रत्यक्ष अनुभव।
  • प्रबोधक 3:20 — परमेश्वर की खोज और हमारी प्रतिक्रिया के बीच संबंध की स्थिरता।
  • गलातियों 3:27 — बपतिस्मा के माध्यम से नये जीवन की एकरूपता; हमारे साथयी का प्रवेश।

संक्षेप में, यह प्रेम और क्षमा का निमंत्रण है—जो हर वह व्यक्ति जो पाप-ग्रहण से मुक्त होकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश पाने की इच्छा रखता है, उसे बुलाता है।

आज का उपयोगी मार्गदर्शन

हममें से प्रत्येक को यह सोचना चाहिए कि हमने कब परमेश्वर के सामने अपने आप को पाप के लिए स्वीकार किया और क्या हमने नये जीवन की शुरुआत के लिए कदम उठाए हैं। जीवन के हर क्षेत्र में सत्यापित आचरण की चाह रखना, और दूसरों के लिए भी यही नम्र आग्रह रखना सहज चरित्र बनाता है।

एक संक्षिप्त एकता-नोट

यह पाठ-पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि विश्वास यीशु के आगमन से जुड़ा सामाजिक-धार्मिक परिवर्तन नहीं, बल्कि अंतरतम परिवर्तन की शुरुआत है—जहाँ हृदय से पाप को मानकर उसे छोड़ना और परमेश्वर के नये जीवन की ओर बढ़ना आवश्यक है।

दृष्टांत-ध्वनि (मूल स्रोतों से संयोगित विचार):

Matthew Henry के अनुसार यह बपतिस्मा बाह्य क्रिया से अधिक आंतरिक परिवर्तन का संकेत है; Albert Barnes इसे देखने योग्य प्रतिक्रियाओं के साथ एक प्रेरणा मानते हैं; Adam Clarke इसे परमेश्वर के राज्य के उद्घाटन के रूप में देखते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और जिन्होंने विश्वास किया था, उनमें से बहुतों ने आकर अपने-अपने बुरे कामों को मान लिया और प्रगट किया।

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“पर यदि वे अपने और अपने पितरों के अधर्म को मान लेंगे, अर्थात् उस विश्वासघात को जो उन्होंने मेरे विरुद्ध किया, और यह भी मान लेंगे, कि हम यहोवा के विरुद्ध चले थे,

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पतरस ने उनसे कहा, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने-अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।

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