मरकुस 1:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यीशु ने उनसे कहा, “आओ; हम और कहीं आस-पास की बस्तियों में जाएँ, कि मैं वहाँ भी प्रचार करूँ, क्योंकि मैं इसलिए निकला हूँ।”

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मरकुस 1:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकूस 1:38 परकमेंटary (HINIRV)

परिप्रेक्ष्य: मरकुस 1 अध्याय में करुणामय यीशु के प्रारम्भिक प्रचार-कार्य का दृश्य है। जकड़न के समय वह दुष्टात्माओं को बाहर निकालते हैं, रोगियों को चंगा करते हैं और प्रेरित-प्रचार के लिए पाठकों/श्रोताओं से दूर नहीं रहते। इस दृष्टांत के परिवेश में यीशु अपने समर्थकों के साथ गॉंव-शहरों में प्रचार की भूमि फैलाने की इच्छा व्यक्त करते हैं: प्रचार की दिशा और लक्ष्य स्पष्ट है—नया संदेश सभी जगह पहुँचना चाहिए।

केंद्रीय अर्थ

यीशु ने शिष्यों से कहा कि चलो, हम और कहीं आस-पास की बस्तियों में जाएँ, ताकि मैं वहाँ भी प्रचार करूँ, क्योंकि मैं इसलिए निकला हूँ। यह कह कुछ अर्थ उभारता है: प्रचार की प्राथमिकता वैश्विक नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों तक पहुँचने की है; यीशु का मिशन सभी जगह पहुँचने वाला है, और यह यात्रा-मनभावन क्रम शक्ति के स्रोत से प्रेरित है। वह अपने उपदेश को केवल एक संस्था या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि यह संदेश हर कस्बे-गाँव तक जाए।

मुख्य विषय

  • आवेग-यात्रा और प्रचार का विस्तार: यीशु का निर्देश है—स्थान-परवाह नहीं, संदेश का फैलाव सर्वोपरि।
  • जनस्रोत और उद्देश्य: “क्योंकि मैं इसलिए निकला हूँ”—प्रेषित मिशन की पुष्टि कि यीशु अपने उद्देश्य के साथ घूम रहे हैं और यह संदेश उपस्थित लोगों तक पहुँचना चाहिए।
  • विश्वासी प्रकृति की समुदायिकता: यह वाक्य बताता है कि कल्वी-सभा और शिष्यगण एक साथ चलकर प्रचार की गति बनाते हैं, स्थान-स्थान पर प्रभु के संदेश को साझा करते हैं।

दो-तीन संबंधित विषय-विस्तार

मरकुस 1:39 — यीशु का प्रचार-संसार एक क्षेत्र तक सीमित न होकर विस्तृत क्षेत्रीय प्रचार के क्रम में चलता है। यह बताता है कि प्रचार के दायरे का विस्तार उनके कार्य की कुंजी है।

मरकुस 6:12 — शिष्यगण प्रचारित करते हैं और लोगों को परावृत कर परमेश्वर के राज्य की उपस्थिति का साक्ष्य देते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रचार एक साझा कार्य है।

मत्ती 4:23 — यीशु के उपदेश-कार्य का केन्द्र में हर जगह का प्रचार और राज्य-आदेश का उद्घोष है; यह विषयांश हमारे पाठ के पीछे के उद्देश्यों को पुष्ट करता है कि प्रचार का भौगोलिक विस्तार परमेश्वर के राज्य के निर्माण के लिए है।

व्यावहारिक चिंतन

हमारे जीवन में भी प्रचार-भावना एक प्रेरक धारा बननी चाहिए: यदि यीशु यात्रा-प्रचार के लिए निकले, तो हमारे आराम-सुविधा के बजाय दया, सच और उद्धार के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का आह्वान है। सरल, नम्र और सुस्ठ-प्रेरित जीवन में प्रभु के उद्देश्य को अपनाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने चाहिए—पढ़ाई, उदाहरण बनना, पड़ोसियों के साथ सहायता साझा करना, और विश्वास-साझा करना।

संघटक निष्कर्ष

मरकुस 1:38 में यीशु का स्पष्ट मिशन-आह्वान दो बातें दिखाता है: प्रचार का विस्तार और उद्धार का एकीकृत उद्देश्य। यह बताता है कि ईश्वर का राज्य प्रत्येक गाँव-गाँव तक पहुँचना चाहिए। शिष्यगणों के साथ यात्रा इस कथा में साझा-साक्षात्कार और सक्रिय जिम्मेदारी की चमक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 1:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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लूका 4:43 (HINIRV) »
परन्तु उसने उनसे कहा, “मुझे और नगरों में भी परमेश्‍वर के राज्य का सुसमाचार सुनाना अवश्य है, क्योंकि मैं इसलिए भेजा गया हूँ।”

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क्योंकि जो बातें तूने मुझे पहुँचा दीं, मैंने उन्हें उनको पहुँचा दिया और उन्होंने उनको ग्रहण किया और सच-सच जान लिया है, कि मैं तेरी ओर से आया हूँ, और यह विश्वास किया है कि तू ही ने भेजा।

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प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिए भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूँ; कि बन्दियों के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूँ; (मत्ती 11:5, प्रेरि. 10:38, मत्ती 5:3, प्रेरि. 26:18, लूका 4:18)

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