Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मरकूस 1:38 परकमेंटary (HINIRV)
परिप्रेक्ष्य: मरकुस 1 अध्याय में करुणामय यीशु के प्रारम्भिक प्रचार-कार्य का दृश्य है। जकड़न के समय वह दुष्टात्माओं को बाहर निकालते हैं, रोगियों को चंगा करते हैं और प्रेरित-प्रचार के लिए पाठकों/श्रोताओं से दूर नहीं रहते। इस दृष्टांत के परिवेश में यीशु अपने समर्थकों के साथ गॉंव-शहरों में प्रचार की भूमि फैलाने की इच्छा व्यक्त करते हैं: प्रचार की दिशा और लक्ष्य स्पष्ट है—नया संदेश सभी जगह पहुँचना चाहिए।
केंद्रीय अर्थ
यीशु ने शिष्यों से कहा कि चलो, हम और कहीं आस-पास की बस्तियों में जाएँ, ताकि मैं वहाँ भी प्रचार करूँ, क्योंकि मैं इसलिए निकला हूँ। यह कह कुछ अर्थ उभारता है: प्रचार की प्राथमिकता वैश्विक नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों तक पहुँचने की है; यीशु का मिशन सभी जगह पहुँचने वाला है, और यह यात्रा-मनभावन क्रम शक्ति के स्रोत से प्रेरित है। वह अपने उपदेश को केवल एक संस्था या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि यह संदेश हर कस्बे-गाँव तक जाए।
मुख्य विषय
दो-तीन संबंधित विषय-विस्तार
व्यावहारिक चिंतन
हमारे जीवन में भी प्रचार-भावना एक प्रेरक धारा बननी चाहिए: यदि यीशु यात्रा-प्रचार के लिए निकले, तो हमारे आराम-सुविधा के बजाय दया, सच और उद्धार के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का आह्वान है। सरल, नम्र और सुस्ठ-प्रेरित जीवन में प्रभु के उद्देश्य को अपनाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने चाहिए—पढ़ाई, उदाहरण बनना, पड़ोसियों के साथ सहायता साझा करना, और विश्वास-साझा करना।
संघटक निष्कर्ष
मरकुस 1:38 में यीशु का स्पष्ट मिशन-आह्वान दो बातें दिखाता है: प्रचार का विस्तार और उद्धार का एकीकृत उद्देश्य। यह बताता है कि ईश्वर का राज्य प्रत्येक गाँव-गाँव तक पहुँचना चाहिए। शिष्यगणों के साथ यात्रा इस कथा में साझा-साक्षात्कार और सक्रिय जिम्मेदारी की चमक है।