Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मरकुस 1:41 पर टिप्पणी: शुद्ध करने की परम करूणा
पद का पार्श्व-परिदृश्य: Jesus यीशु एक व्याध को छूते हैं जो विधर्मी से परे, समाज से अलग और पाप के कारण धिक्कारा गया है। वह व्याध उससे दूरी मानक मानते हैं, पर यीशु के लिए यह दूरी नहीं है। कहते हुए, मरकुस 1:41 में यीशु उस रोगी पर “तरस खाकर” हाथ बढ़ाते हैं और कहते: “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा।” यह दृश्य यह दिखाता है कि परमेश्वर का करुणा रोगी के लिए सीमा नहीं मानती, और शास्त्र में बताया गया पवित्रता-युक्त प्रेम कैसे एक्शन में उतरता है।
ईश्वर के प्रति विश्वास का संकेत
इस वाक्य में स्पष्ट है कि परमेश्वर किसी भी बाहरी बाधा को नहीं देखता जब वह कनिष्ठ जीव के दर्द को समझता है। हाथ बढ़ना एक महामानवीय संकेत है: शब्दों से पहले क्रिया, और क्रिया से पहले करुणा। यह दर्शाता है कि विश्वास का मूल स्रोत प्रेम है—ईश्वर की करुणा जो रोगी को चंगा करने के लिए कदम उठाती है।
शब्दों की व्याख्या और चित्र
तरस खाकर का मतलब है यीशु के हृदय में दर्द की गहराई, एक ऐसी करुणा जो रोगी के लिए सामाजिक दूरी को भंग कर देती है। हाथ बढ़ाया—यह व्यक्तिगत संपर्क की इच्छा और सामाजिक निषेध के विपरीत कदम है, क्योंकि यह रोग-जनित अशुद्धि के बावजूद संभाषण से पहले भी स्पर्श को संभव बनाता है। «शुद्ध हो जा» बताता है कि यीशु के शब्द शक्ति में हैं; चंगाई आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों आयामों में एक साथ काम करती है।
अन्य स्रोतों से संबंधित नोट
इस घटना पर Matthew Henry और Adam Clarke की दृष्टि सम्मिलित होने पर स्पष्ट होता है कि यीशु का स्पर्श न केवल रोगी को शुद्ध करता है, वरन् यह दर्शाता है कि पाप और बीमारी से मुक्त कर्तव्य-निष्ठ प्रेम ही मूल चिकित्सा है। Henry कहते हैं कि यीशु ने शुद्धि की आह्वान के साथ रोगी को सामाजिक पुनःस्थापित करने की इच्छा दिखाई; Clarke बताते हैं कि यह स्पर्श निजी शुद्धि के साथ सामाजिक स्वीकार्यता की शुरुआत है। (उद्धरण-संकेतन: “he touched him, and said, I will; be thou clean”—यानी स्पर्श के साथ शब्दों की दया, Clarke/Henry के कृत्यों के सार के रूप में)
पवित्र पद के साथ जुड़े क्रॉस-रेफरेंसेज
इन सभी संदर्भों में स्पर्श और उच्च करुणा की भूमिका स्पष्ट है: प्रभु नहीं कहता merely “तू ठीक हो जा” परन्तु अपने स्पर्श से संसार के लिए अपनी पवित्र उपस्थिति दिखाता है।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप में, मरकुस 1:41 एक दृढ़ संदेश देता है: परमेश्वर की करूणा सीमा नहीं मानती; वह स्पर्श के साथ भेजा गया चंगा करता है और शुद्धि को सामाजिक पुनःस्थापना के द्वार खोलता है।
उद्धृत स्पष्ट टिप्पणियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो वे पाठ में स्थानान्तरित मूल्यांकन में सम्मिलित किए जाते हैं।