Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 1:1 मरकुस 1:2 मरकुस 1:3 मरकुस 1:4 मरकुस 1:5 मरकुस 1:6 मरकुस 1:7 मरकुस 1:8 मरकुस 1:9 मरकुस 1:10 मरकुस 1:11 मरकुस 1:12 मरकुस 1:13 मरकुस 1:14 मरकुस 1:15 मरकुस 1:16 मरकुस 1:17 मरकुस 1:18 मरकुस 1:19 मरकुस 1:20 मरकुस 1:21 मरकुस 1:22 मरकुस 1:23 मरकुस 1:24 मरकुस 1:25 मरकुस 1:26 मरकुस 1:27 मरकुस 1:28 मरकुस 1:29 मरकुस 1:30 मरकुस 1:31 मरकुस 1:32 मरकुस 1:33 मरकुस 1:34 मरकुस 1:35 मरकुस 1:36 मरकुस 1:37 मरकुस 1:38 मरकुस 1:39 मरकुस 1:40 मरकुस 1:41 मरकुस 1:42 मरकुस 1:43 मरकुस 1:44 मरकुस 1:45



मुख्य निष्कर्ष
मरकुस 1:32 में प्रभु यीशु के महत्तर औपचारिक दिनचर्या के एक चित्र सामने आता है: सूर्य के डूबते ही लोगों ने उपचार के लिए बीमारों और दुष्टात्माओं से पीड़ित निकट लाने का प्रयास किया। यह दृश्य प्रभु की सत्ता के प्रकाशित होने की शुरुआत है—दान-प्रकटन, दया का आरम्भ, और शैतानी शक्तियों के विरुद्ध विजय की प्रतीकात्मक शुरुआत। यह वाक्य दिखाता है कि यीशु का मिशन व्यक्तिगत स्वास्थ्य से अधिक cosmic—आत्मिक उद्धार और न्याय के Kingdom की अग्रिम झलक देता है।
लिटरेरी संदर्भ से पंक्ति
यहाँ संध्या के समय का उल्लेख, समुदाय के लिए यीशु के आश्वासन और उपलब्ध कराने के दायित्व को दर्शाता है: दिन भर की सेवा के बाद भी लोग भरोसे से आते हैं, जो समुदाय में चंगाई के प्रति गवाही देता है। मारकुस का तात्पर्य यही है कि शक्ति और करुणा का मिलन मानव पीड़ा के लिए अनुकूल समय में घटित होता है।
धार्मिक व theological significance
इस वाक्य में यीशु की पवित्र सत्ता स्पष्ट रूप से उभरती है—बीमारों और दुष्टात्माओं को बाहर निकालना केवल शारीरिक चंगा नहीं, बल्कि दुष्टात्माओं के प्रभावों से मन और समाज को मुक्त करना है। यह उद्धार का राज संघर्षरत प्राणी के भीतर भी आता है; यीशु रिश्ते के दायरे में आकर धर्मी शासन का उद्घोष करते हैं।
पवित्रशास्त्र से संबन्ध
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि चंगाई एक पूर्ण उद्धार के बड़े क्रम के भाग के रूप में है—शरीर, आत्मा, और समाज तीनों जगह राहत।
विचारणीय प्रश्न
सारांश और अंतर्दृष्टि
संध्या के साथ जुड़ी यह घटना यीशु के राज्य-काज की दिशा स्पष्ट करती है: वह स्थान-विशेष नहीं, पर शास्त्र-सार को साकार करते हैं—जहाँ चंगेטים और मजबूर लोग उसके पास आते हैं। मरकुस यह दर्शाता है कि यीशु केवल शिक्षा देते नहीं हैं, वह शक्ति से परिपूर्ण दया है जो रोगी और दुष्टात्माओं के चंगाई से समाज को नई दिशा देता है।
मुख्य उद्धरणों के स्पष्ट संकेत
नीचे प्रसिद्ध पारिभाषिक टिप्पणीकारों के संजोए विचारों से प्रेरणा मिलती है. इनमें मूल शब्द-संलग्न उद्धरण उपलब्ध हैं:
Matthew Henry: “... the door is opened for the gospel to go forth with power” (संक्षेपित सार),
Albert Barnes: “The healing of every disease shows that the Messiah has authority over all forms of human misery” (संक्षेपित सार)
Adam Clarke: “The immediate influence of the Saviour is the proof of divine authority” (संक्षेपित सार)
क cross-references
1) यशायाह 35, 61:1-2—आत्मिक और शारीरिक चंगाई की भविष्यवाणी; प्रेरणा दें कि मसीह के आये होने पर सुख-शांति का अवसर खुलता है।
2) मत्ती 4:23—यीशु का समस्त प्रदेश में शिक्षा, राज-चंगा और दुष्टात्माओं पर विजय का समन्वय दिखता है।
3) लूका 4:18-19—उद्धार की पुकार और समाज-उद्धार का प्रभाव जन-सामर्थ्य में प्रकट होता है।