मत्ती 18:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है; पर हाय उस मनुष्य पर जिसके द्वारा ठोकर लगती है।

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मत्ती 18:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

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मत्ती 18:7 में यीशु सचेत करते हैं कि संसार में गिरावट और ठोकरें अनिवार्य हैं, पर जो ठोकर उन लोगों के कारण लगती है, उन पर खास हालात और जिम्मेदारियाँ होती हैं। इस पद में क्रोध, नैतिकता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्पष्ट होता है: दुखद घटनाओं के बावजूद हमें अपनी हृदयस्थ स्थिति पर विचार करना चाहिए कि क्या हम किसी की आस्था या आत्मा के रक्षण के लिए बाधक तो नहीं बने।

पद्य-वाचन: अध्याय के संदर्भ में

इस प्रकरण में मसीह ने युवा और छोटे लोगों के लिए एक सीख दी है: संसार में ठोकरें आते हैं क्योंकि मानवसभ्यता का पतन गति में है। साथ ही वह कठोर शब्द नहीं कहते, बल्कि सचेत करते हैं कि जिनके कारण लोगों पर ठोकर लगती है, उन्हें आत्म-परख करनी चाहिए। यह संदेश दया, अदालत और सचेतनता का है—कि हम अपनी क्रिया-प्रतिक्रियाओं से किसी की राह रोकना न सीखें।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • मानवीय पतन स्वीकार्य नहीं, परन्तु सतर्कता और दया से राह बनानी चाहिए ताकि किसी की आत्मा पर अनजाने में भी प्रतिकूल असर न पड़े।
  • यथार्थ तलाक्वल: दूसरों के दोषों को उजागर करने के बजाय अपने दिल की दिशा ठीक करें—क्या हम स्वयं ठोकर बन रहे हैं या नहीं?
  • प्रेरणा में लाभ: हमारे कदम दूसरों को गिराने के बजाय वेग दें कि वे प्रभु की ओर लौटें, यह सामाजिक विवेक की मांग है।

अन्य पवित्र ग्रंथों के साथ संकलन

यह संदेश अन्य जगहों पर भी ठहराव पाता है: - दो भाइयों के बीच मतभेद पर विनय से निपटना (मत्ती 18:15-17) — आडम्बर नहीं, परिशुद्धता और परिश्रम का मार्ग। - प्रभु की सीख: दयालुता के साथ चुकाने का अवसर देना—जो अपराध के पाप से मुक्ति दिलाता है (लूका 17:3-4)। - एक दूसरे के लिए प्रेरणा बनना (गलातियों 6:1) — चोट पहुँचाने के बजाय चंगा करने की इच्छा।

उपयोगी क्रॉस‑रेफरेंसेस

एवं सम्बन्धित विचार:

  • मत्ती 18:15–17 — समस्या को सीधे निपटाने की प्रक्रिया
  • याकूब 3:2 — सभी व्यक्ति में दोषों का नियंत्रण
  • लूका 17:3–4 — क्षमा और सुधार की आवश्यकता

इन संदर्भों में छोटे-से-छोटे कदम भी बड़े प्रभाव डालते हैं—हमारी सजगता खुद की दशा सुधारती है और दूसरे को नया अवसर देती है।

व्यावहारिक अध्ययन और अनुप्रयोग

जो ठोकरें जन्म देती हैं, वे तब न मिटें जब तक हम स्वयं के दृष्टिकोण और व्यवहार की जाँच नहीं कर लेते। एक विशिष्ट चित्त रखें: - दूसरों के बारे में आलोचना कम करें; उनके विश्वास के मार्ग में बाधा कितनी है, यह पहचानें। - अपने क्रोध और असहमतियों को नियंत्रित करें ताकि चोट पहुंचाने का जोखिम घटे। - यदि आप किसी को गिरते देखते हैं, तो उन्हें उठाने का कदम बढ़ाएं, समीक्षा के साथ नहीं सिर्फ त्वरित निर्णय से।

संक्षेप में

यह पद दुनिया की वास्तविकताओं को सचेत करता है: ठोकरें आना सामान्य है, पर जो ठोकर लगाते हैं उनके लिए आत्म-आलोचना आवश्यक है और जो गिरते हैं उन्हें संरक्षण देने की जिम्मेदारी भी हम सभी पर है। हमारी सोशल और आध्यात्मिक भूमिका यही है कि हम गिरने वालों को गिरने से पहले रोकें, न कि केवल परिणाम देखने में व्यस्त रहें।

टेक्निकल नोट

यद्यपि यह हिन्दी अनुवाद में है, मूल विचार और संरचना स्पष्ट हैं: दयालुता के साथ सचेतना, गति में आए गिरावट के प्रति जिम्मेदारी, और आत्म-शोधन से समुदाय को उन्नत बनाना।

मुख्य उद्धरण (संकेतित स्रोत)

इस लेख के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ण पाठ से सीधे वाक्यों के छोटे अंश प्रयुक्त नहीं किए गए; इनमें से अगर आवश्यक हो तो केवल "संकेतित उद्धरण" के रूप में उल्लेख किया जाएगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 18:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर उसने अपने चेलों से कहा, “यह निश्चित है कि वे बातें जो पाप का कारण है, आएँगे परन्तु हाय, उस मनुष्य पर जिसके कारण वे आती है!

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मनुष्य का पुत्र तो जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्तु उस मनुष्य के लिये शोक है जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है: यदि उस मनुष्य का जन्म न होता, तो उसके लिये भला होता।”

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क्योंकि विधर्म भी तुम में अवश्य होंगे, इसलिए कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जाएँ।

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