मत्ती 18:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्वामी ने कहा, कि यह और इसकी पत्‍नी और बाल-बच्चे और जो कुछ इसका है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए।

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मत्ती 18:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 18:25 का तात्पर्य और संदर्भ

कथा का इस भाग में यहूदियों के बीच एक करुणामय न्याय की कहानी चलती है। पुत्र-रूपी सेवक ने अपने उधार के लिए अपने स्वामी के सामने माफी माँगी, परन्तु वह क्षमा के बाद भी हृदयहीन बना रहा। यह पद जिसमें लिखा है, “जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्वामी ने कहा, कि यह और इसकी पत्‍नी और बाल-बच्चे और जो कुछ इसका है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए,” व्यवहारिक रूप से कर्ज के भार और क्षमा के दायरे को स्पष्ट करता है।

यश्वर/आत्मा में पाठ का उद्घाटन दृश्य

यह उद्धरण प्रेरित करता है कि दया और दायित्व के बीच संतुलन कैसे स्थापित होता है। करुणामय स्वामी ने एक अत्यंत कठोर और त्वरित निर्णय लिया—कर्ज चुकाने में अयोग्य सेवक और उसके परिवार की संपत्ति को बेचकर देनदारिता समाप्त कर दी जाएगी। इस दृश्य में ईश्वर के राज्य की न्याय-परक व्यवस्था और वह शक्ति दीख पड़ती है जिसे क्षमा के साथ प्रयोग किया जाता है, ताकि धनी-गरीब के बीच समानता और दया की स्थापना हो सके।

कौन से शब्द और चित्र स्पष्ट करते हैं

यहाँ प्रमुख चित्र है: एक व्यक्ति जो उधार चुका नहीं सकता, परन्तु फिर भी क्षमा की प्राप्ति संभव रहती है। क्षमा देने के बाद भी उसके आचरण में करुणा का अभाव दिखता है, जो क्रोध और दण्ड की ओर ले जाता है। यह हमें दर्शाता है कि ईश्वर की क्षमा की भाषा में, आन्तरिक परिवर्तन आवश्यक है; यदि दिल में दया नहीं है, तो क्षमा का लाभ स्थायी नहीं रहता।

related passages (छोटे cross-references)

  • व्यवहारिक दयालुता बनाम सख्त न्याय — मुझे माफ करो, ताकि मैं भी क्षमा पाऊं (उद्धरण-विश्लेषण के लिए संदर्भित पंक्तियाँ उपलब्ध)।
  • यहोवा की करुणा से भरा हृदय—ईश्वर जो दया से कार्य करता है (अनुवादित संदर्भ)।
  • केवल क्षमा नहीं, पर परिवर्तन भी ज़रूरी है (आत्म-परिवर्तन के विचार)।

इन संदर्भों का उद्देश्य यह है कि चोरी-चाकरी के बजाय, दया और परिवर्तन से राज्य-व्यवस्था में न्याय और करुणा का संतुलन स्थापित हो सके।

इस पाठ से आज का जीवन

1) दया वास्तविक है जब वह स्पष्ट और स्थाई हो—यदि हम क्षमा पाते हैं, तो उसे भी जीवन में व्यवहार सहित दिखाना चाहिए।

2) क्षमा केवल कानूनी राहत नहीं, भीतर की परिवर्तन की इच्छा भी होनी चाहिए ताकि हमारी क्रियाएँ दया के साथ जुड़ सकें।

3) समुदाय में आर्थिक दबाव होते हुए भी, घृणा और कठोरता नहीं बल्कि सहायता और सहयोग का मार्ग सुझना चाहिए।

एंटेट/महत्वपूर्ण उद्धरण

इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-डाटा-आधारित टिप्पणीकारों के सारांश से मिलते-जुलते विचार मिलते हैं. नीचे एक-एक शब्द-चिन्हित उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किये गए हैं, पर उनके विचारों का संयुक्त निष्कर्ष नीचे संक्षेपित है:

– क्षमा के साथ-साथ परिवर्तन आवश्यक है; यदि दिल में दया नहीं है, तो क्षमा से आधिकारिक लाभ नहीं होता।

सार-संरचना

इस पद के माध्यम से बतलाया गया है कि ईश्वर का राज्य न्याय के साथ दया का व्यापक आयाम भी प्रस्तुत करता है। क्षमा के बाद भी आचरण यदि कठोर और दमनकारी बना रहता है, तो वह क्षमा बनायें हुए भी दूसरा दण्ड बन सकता है। अतः ईश्वर की दया में समानता और करुणा को वास्तव में अनुकूल बनाना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 18:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 राजाओं 4:1 (HINIRV) »
भविष्यद्वक्ताओं के दल में से एक की स्त्री ने एलीशा की दुहाई देकर कहा, “तेरा दास मेरा पति मर गया, और तू जानता है कि वह यहोवा का भय माननेवाला था, और जिसका वह कर्जदार था, वह आया है कि मेरे दोनों पुत्रों को अपने दास बनाने के लिये ले जाए।

नहेम्याह 5:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नहेम्याह 5:5 (HINIRV) »
परन्तु हमारा और हमारे भाइयों का शरीर और हमारे और उनके बच्चे एक ही समान हैं, तो भी हम अपने बेटे-बेटियों को दास बनाते हैं*; वरन् हमारी कोई-कोई बेटी दासी भी हो चुकी हैं; और हमारा कुछ बस नहीं चलता, क्योंकि हमारे खेत और दाख की बारियाँ औरों के हाथ पड़ी हैं।”

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“फिर यदि तेरा कोई भाईबन्धु तेरे सामने कंगाल होकर अपने आप को तेरे हाथ बेच डाले, तो उससे दास के समान सेवा न करवाना।

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