Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 18:1 मत्ती 18:2 मत्ती 18:3 मत्ती 18:4 मत्ती 18:5 मत्ती 18:6 मत्ती 18:7 मत्ती 18:8 मत्ती 18:9 मत्ती 18:10 मत्ती 18:11 मत्ती 18:12 मत्ती 18:13 मत्ती 18:14 मत्ती 18:15 मत्ती 18:16 मत्ती 18:17 मत्ती 18:18 मत्ती 18:19 मत्ती 18:20 मत्ती 18:21 मत्ती 18:22 मत्ती 18:23 मत्ती 18:24 मत्ती 18:25 मत्ती 18:26 मत्ती 18:27 मत्ती 18:28 मत्ती 18:29 मत्ती 18:30 मत्ती 18:31 मत्ती 18:32 मत्ती 18:33 मत्ती 18:34 मत्ती 18:35


मत्ती 18:21 परिप्रेक्ष्य और तात्पर्य
यूहन्ना-युग के समूह में यीशु ने निर्धारित दया और विनम्रता की शिक्षा दी. इस पद में पतरस ने पूछा कि कितनी बार क्षमा करूँ—यह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बने रहने का व्यावहारिक प्रश्न है। यीशु का उत्तर बताता है कि क्षमा की सीमा नहीं है; परमेश्वर के प्रति हमारा हृदय उसी सीमा से मुक्त होना चाहिए जिस सीमा से वह हमें क्षमा करता है। यह वाक्य, पहले से चल रहे पथ-परिवर्तन के क्रम में, स्पष्ट करता है कि प्रभु के राज्य में संबंधों की पुनर्स्थापना और क्षमा का स्थाई और निरंतर कार्य कितना आवश्यक है।
मुख्य सार और केंद्रीय अर्थ
पतरस का प्रश्न theological तौर पर सही लग सकता है—क्या हम सात बार तक क्षमा कर दें? पर यीशु दिखाते हैं कि क्षमा का मानक परमेश्वर की करुणा के मानक के बराबर है: निरंतर, बिना शर्त, और हर बार पुनः। इसका लक्ष्य है किFollower—हमारे रिश्ते नवीनीकरण और सामुदायिक जीवन में स्थिरता पाएँ, न कि अपराध को बढ़ावा देना या दबाव का आशीर्वाद बनना।
तीन प्रमुख विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप
• मरकुस 11:25—यही विचार है कि जब हम आगे बढ़ते हैं तो दयालु दिल से दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार भी दयालु होना चाहिए।
• लूका 17:3-4—यदि कोई पाप करे और फिर बदल जाए, तो क्षमा किया जाए; पुनः-प्राप्ति की प्रक्रिया में विनय जरूरी है।
• कोलुसियों 3:13—एक दूसरे के अधर्म के बदले धीरज और क्षमा के साथ सहनशील हों।
व्यवहारिक अनुप्रयोग
- अपने जीवन में छोटे-छोटे अनुशासन और क्षमा की आदत बनाएं; बड़े क्रोध के बजाय परिशुद्ध प्रेम को प्रकट करें।
- अपने भाई-बहनों के साथ संवाद में शांत रहें, गलतियों को भुलाने के बजाय उनमें सुधार की दिशा दें।
- क्षमा के साथ सत्य और न्याय का संतुलन बनाए रखें ताकि समुदाय में विश्वास बना रहे।
संक्षिप्त समापन
पतरस के प्रश्न का उद्देश्य क्यों क्षमा सीमित करें? यीशु का उत्तर बताता है कि परमेश्वर की क्षमा के मानक अनंत और निरंतर हैं; उसी से हम अपने संबंधों को भी विकसित करें। हमारी क्षमा, ईमानदारी और दयालुता के साथ, समुदाय को जीवन देता है और ईश्वर के राज्य की वास्तविकता को इस पृथ्वी पर दृष्टिगोचर करता है।
संक्षेपित उद्धरण (इसी पंक्ति के भीतर उल्लेख)
जहाँ आवश्यक हो, हमने एडम क्लार्क, एलबर्ट बार्न्स, और मैथ्यू हेनरी की सार्वजनिक-डायरेक्ट विचार-रेखा के संकल्पनात्मक संकेत शामिल किए हैं।