Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 18:1 मत्ती 18:2 मत्ती 18:3 मत्ती 18:4 मत्ती 18:5 मत्ती 18:6 मत्ती 18:7 मत्ती 18:8 मत्ती 18:9 मत्ती 18:10 मत्ती 18:11 मत्ती 18:12 मत्ती 18:13 मत्ती 18:14 मत्ती 18:15 मत्ती 18:16 मत्ती 18:17 मत्ती 18:18 मत्ती 18:19 मत्ती 18:20 मत्ती 18:21 मत्ती 18:22 मत्ती 18:23 मत्ती 18:24 मत्ती 18:25 मत्ती 18:26 मत्ती 18:27 मत्ती 18:28 मत्ती 18:29 मत्ती 18:30 मत्ती 18:31 मत्ती 18:32 मत्ती 18:33 मत्ती 18:34 मत्ती 18:35



मत्ती 18:19 परिदृश्य और महत्व
पद का आरम्भ हमें यीशु के साथ समूह के बीच की बातचीत में ले जाता है। अक्सर यह संदेसा तब आता है जब विश्वासियों के बीच एक परम विश्वास और एकजुट इच्छा की मांग होती है—दो जन किसी बात के लिये एकमना हो कर मांगे, तो वह स्वर्गीय पिता के तरफ से पूरा होगा। यह वही दृश्य है जिसमें पवित्र चर्च के बीच एकता और नम्र प्रार्थना का महत्व उभरकर आता है।
ईश्वर की अपेक्षा और विश्वास की एकजुटता
यह वाक्य दो अहम बातें प्रस्तुत करता है: पहला, ईश्वर के सामने एकता का मूल्य; दूसरा, एक ही मन से मांगे जाने पर उत्तर की गारंटी की आस्था। आपसी प्रेम और एकता में मांगी गई बातों पर परमेश्वर का उत्तर दयालु और शीघ्र होता है, इससे स्पष्ट होता है कि प्रभु हमारी सामूहिक प्रार्थनाओं को अवरुद्ध नहीं करना चाहते, बल्कि उन्हें सुनना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध ग्रन्थ और उनके संकेत
हे प्रभु का पाठ हमें एकता, लगन और विश्वास के साथ पहचाने जाने की शिक्षा देता है। बाइबल के अन्य हिस्सों में एक साथ प्राथना और विश्वास की शक्ति के उदाहरण मिलते हैं:
इन संदर्भों में दर्शाया गया उद्देश्य एकता, प्रेम और विनम्र आस्थावान प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर के प्रभाव को अनुभव करना है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
1) चर्च या समूह की प्रार्थनाओं में मतभेदों को छोड़कर एक साझा लक्ष्य निर्धारित करें। 2) प्रार्थना में अपने मन की शुद्धता और ईमानदारी को बनाए रखें—स्वार्थ के बजाय परमेश्वर की इच्छा को प्राथमिकता दें। 3) एक दूसरे के लिये ईमानदार, धैर्यपूर्ण और क्षमाशील बनें ताकि आपसी इक्यावन्तता मजबूत हो और प्रभु की कृपा बहती रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
फिर मैं तुम से कहता हूँ—यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिये एक हो कर माँगें, जो वे एक मन से चाहेंगे, तो वह उनके लिये उनके पिता की ओर से स्वर्ग में हो जाएगी। यह शाब्दिक वाक्य मानवीय एकता की शक्ति को उजागर करता है और ईश्वर के प्रति हमारी विश्वासयोग्य, एकत्रित प्रार्थना की आवश्यकता और प्रभाव दिखाता है।
उद्धरण (public-domain जैसे स्रोतों से मिला छोटा संकेत)
यह पंक्ति Matthew Henry तथा Albert Barnes के भीतर सामान्यतः उद्धृत विचारों से मेल खाती है: बाइबल के समूह-प्रार्थना के महत्व और एकता के लाभ पर आधारित उनके अवलोकनों की समष्टि।