Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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तात्कालिक संदर्भ
मत्ती 18:5 यीशु के उस वचन का हिस्सा है जो शिष्यों और शिष्याों के बीच नम्रता, दया और सामुदायिक संबंधों के बारे में है। इससे ठीक पहले शिष्यों ने बड़ाई और स्थान के विषय पर प्रश्न किया था, और यीशु ने बच्चों को सामने बुलाकर कहा कि स्वर्ग का राज्य ऐसे लोगों का है। वचन 5 में यीशु यह स्पष्ट करते हैं कि किसी छोटे, निर्बल या अनौपचारिक सदस्य का स्वागत करना वास्तव में स्वयं मसीह का स्वागत करना है।
वचन से क्या प्रकाश मिलता है — परमेश्वर और विश्वास
यह वचन परमेश्वर की आत्मा की प्राथमिकता बताता है: स्वर्गीय मूल्य भौतिक उन्नति, शक्ति या प्रतिष्ठा में नहीं निहित हैं, बल्कि नम्रता और अनुनयिता में हैं। जब कोई किसी "बालक" अथवा छोटे भाई/बहन को अपनाता है, वह अपने समाज के सबसे कमजोर को अपनाने की क्रिया करता है—यही परमेश्वर के साम्राज्य का चिन्ह है। तथापि "मेरे नाम से" जोड़ बताता है कि यह स्वागत केवल मानवीय स्नेह नहीं, बल्कि मसीही प्रेम और प्रतिनिधित्व के रूप में होना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
बालक: यहाँ प्रयुक्त शब्द सामाजिक तथा आध्यात्मिक दोनों अर्थों में लिया जा सकता है—यानी आयु में छोटा, या आध्यात्मिक रूप से कमज़ोर/नवीन।
मेरे नाम से ग्रहण करना: यह दर्शाता है कि स्वागत को मसीह के अधिकार, चरित्र और उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए—अर्थात् प्रेम, संरक्षण और मार्गदर्शन के साथ। यह सतही आतिथ्य नहीं, बल्कि दायित्व और प्रतिनिधित्व है।
संबंधित शास्त्र स्थान और संक्षिप्त व्याख्या
पुराने टिप्पणीकारों की संक्षेप टिप्पणी
मैथ्यू हेनरी ने संक्षेप में कहा कि यह वचन मसीह के प्रति स्नेह को परखने का मानक है: हम किस प्रकार उसके प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार करते हैं, उससे हमारे अंतर्मन और विश्वास का प्रमाण मिलता है। (व्याख्यात्मक उद्धरण शॉर्ट और संदर्भित रूप में प्रयुक्त)
अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने भी इस वचन पर यह रेखांकित किया कि "मेरे नाम से" का भाव नैतिक और आध्यात्मिक उत्तरदायित्व जोड़ता है—स्वागत का अर्थ केवल भोजन-पानी नहीं, बल्कि संरक्षण और मार्गदर्शन भी है।
समकालीन अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह वचन उन लोगों के लिए चुनौती है जो सामुदायिक निर्णय लेते हैं—चाहे वह चर्च में नया आगंतुक हो, समाज का वंचित वर्ग हो, या बच्चों व युवाओं की बात हो। मसीही जीवन का पैमाना है कि हम उन्हें कैसे ग्रहण करते हैं: क्या हम सिर्फ़ सतही स्वागत करेंगे या उनके लिए समय, संसाधन और सच्ची देखभाल देंगे?
व्यावहारिक कदम:
निष्कर्ष
मत्ती 18:5 सरल शब्दों में यह सूचित करता है कि मसीह के नाम पर छोटे और निर्बल का स्वागत करना सीधे मसीह का स्वागत करने के बराबर है। यह वचन हमें आम जीवन में नम्रता, सेवा और प्रतिबद्धता के स्तर पर आजमाता है—जहाँ बाहरी रुतबे से अधिक आंतरिक निष्ठा मायने रखती है।