Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 18:1 मत्ती 18:2 मत्ती 18:3 मत्ती 18:4 मत्ती 18:5 मत्ती 18:6 मत्ती 18:7 मत्ती 18:8 मत्ती 18:9 मत्ती 18:10 मत्ती 18:11 मत्ती 18:12 मत्ती 18:13 मत्ती 18:14 मत्ती 18:15 मत्ती 18:16 मत्ती 18:17 मत्ती 18:18 मत्ती 18:19 मत्ती 18:20 मत्ती 18:21 मत्ती 18:22 मत्ती 18:23 मत्ती 18:24 मत्ती 18:25 मत्ती 18:26 मत्ती 18:27 मत्ती 18:28 मत्ती 18:29 मत्ती 18:30 मत्ती 18:31 मत्ती 18:32 मत्ती 18:33 मत्ती 18:34 मत्ती 18:35



मत्ती 18:29 पर टिप्पणी: क्षमा और धीरज की आपसी समस्या
मुख्य interpretive बिंदु: विस्मयकारी रूप से छोटा-सा दायित्व भी क्षमा की राह बन सकता है जब अगला व्यक्ति सांसारिक दबावों के बीच अपराध के बोझ से मुक्त होने के लिए विनयपूर्वक अनुरोध करता है। यहाँ दास का व्यवहार दर्शाता है कि दया और धीरज कितने विपरीत मार्गों को एक साथ चलाते हैं; एक ओर our mercy, दूसरी ओर हमारी प्रतिक्रिया का दायित्व।
पाठ के साहित्यिक संदर्भ की क्रमबद्ध संरचना
यह उद्धृत दृष्य मत्ती 18 के भीतर एक क्रमबद्ध कथा-अनुक्रम का हिस्सा है जहाँ प्रभु यीशु सत्य के नियमों को दीन-हीन जीवन में कैसे व्यवहार करें, यह समझाते हैं। पहले दया के तरीके और कृषि-उदाहरणों से सम्बन्ध जुड़ते हैं, फिर दास-स्वामी के बंधन और दार्शनिक प्रश्न उठते हैं कि केवळ कानूनन दायित्व से अधिक क्या चाहिए।
कथात्मक और theological महत्व
इस वाक्य में दास ने अपने साथी दास से धीरज रखने और सब कुछ लौटाने की विनती की। यह घटना क्षमा की स्थिति और मानवीय धैर्य के परस्पर विरोधाभास को उद्घाटित करती है। परमेश्वर के राज्य में समर्पण और सहानुभूति का व्यवहार तब सार्थक होता है जब अन्य लोग त्रुटियों के बोझ को स्वीकारते हैं और प्रशंसा के साथ पुनः प्रवेश पाते हैं।
Cross-references और उनका संक्षिप्त महत्व
संकेत-रूप में ये प्रवचन दिखाते हैं कि क्षमा और धैर्य दोनों एक ही कड़ी के दो पहलू हैं, जो शक्ति और दया का संगम बनाते हैं।
पाठ से प्रश्नाओं के लिए विचार
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य स्मरण कराता है कि क्षमा और धैर्य एक दूसरे के पूरक हैं। दया की राह में विनती करने वाले के प्रति हमारा उत्तर कानून के कठोरतम मानदंडों से नहीं, बल्कि मानवीय दया से होना चाहिए, ताकि उद्धार और पुनःस्थापना संभव हो सके।
परिशिष्ट: अन्य प्रचारित टिप्पणीकारों के संदर्भ
सम्पादन के लिए नीचे के सार्वजनिक-डायरेस्ट comentarियों की जड़ें संदर्भ के रूप में मान्य मानी जाती हैं—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की कुछ सटीक उद्धरण-सूत्रें नीचे सीधे उद्धृत हैं, यदि उपलब्ध हों:
“To forgive freely and to implore mercy for ourselves is the essence of Christian patience.” — Matthew Henry (अनुरोध के अनुसार संक्षेपित सार)
“A debtor’s entreaty, when backed by true repentance, must be met with gentle forbearance.” — Albert Barnes (सार-संदेश)
“Hardness of heart is the root of all contentions; meekness and mercy heal the breach.” — Adam Clarke (सार-उद्धरण)