Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 18:1 मत्ती 18:2 मत्ती 18:3 मत्ती 18:4 मत्ती 18:5 मत्ती 18:6 मत्ती 18:7 मत्ती 18:8 मत्ती 18:9 मत्ती 18:10 मत्ती 18:11 मत्ती 18:12 मत्ती 18:13 मत्ती 18:14 मत्ती 18:15 मत्ती 18:16 मत्ती 18:17 मत्ती 18:18 मत्ती 18:19 मत्ती 18:20 मत्ती 18:21 मत्ती 18:22 मत्ती 18:23 मत्ती 18:24 मत्ती 18:25 मत्ती 18:26 मत्ती 18:27 मत्ती 18:28 मत्ती 18:29 मत्ती 18:30 मत्ती 18:31 मत्ती 18:32 मत्ती 18:33 मत्ती 18:34 मत्ती 18:35



क्यों यह Verse महत्वपूर्ण है
मत्ती 18:12 में यीशु की शिक्षण-पंक्ति हमें ईश्वर के हृदय के बारे में गहरी समझ देती है: नागरित्ता में एक-एक जन की कीमती भूमिका और व्यक्तिगत देखरेख का मूल्य। यीशु यह दिखाते हैं कि परमेश्वर का दयालु और सावधान रख-रखाव मानव समाज के भीतर हर बिरले और भटक गए व्यक्ति के प्रति है। यह वचन न सिर्फ क्रमशः समुदाय के लिए चेतावनी देता है, बल्कि हर एक विश्वासी के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी और प्रेम की मिसाल बनता है।
पारिभाषिक संदर्भ और मूल संदर्भ
यह उद्धरण ग्रीक कथा के एक संक्रमण का भाग है जहाँ उद्धार की बुलाहट एक समुदाय-आधारित दृष्टिकोण से समझाई जाती है। तुलना में, एक भटकने वाले मानव के बचाव की महत्ता परमेश्वर के अत्यंत प्रेम और चिंता को प्रकट करती है। येसू अपने शिष्यों को एक छटपटाती-सी परिभाषा से नहीं, बल्कि एक लक्ष्यपूर्ण मार्ग से शिक्षित करते हैं: सुरक्षा तब है जब एक खोया व्यक्ति पुनः पाया जाए।
मुख्य संदेश
मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर एक-एक व्यक्ति के निवेदन को सुनता है और पल-पल उसकी खोज में रहता है। निन्यानवे भेड़ों की सुरक्षा तो महत्त्वपूर्ण है, परन्तु भटकने वाला एक भी पशु हर कीमत पर ढूंढ़ना और उसे लौटना अधिक मूल्यवान है। यह दृष्टिकोण समुदाय के भीतर व्यक्तिगत जिम्मेदारी और एकीकृत प्रेम की आवश्यकता को बल देता है।
सांस्कृतिक और नैतिक विषय
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संक्षिप्त अर्थ
यूनानी भाषा के भावों को समझने हेतु तीन संदर्भ मददगार हैं:
इन संदर्भों में एक सामान्य धारा है: परमेश्वर का खोज और उद्धार, तथा समुदाय की जिम्मेदारी एक दूसरे के साथ मिलकर प्रेमपूर्वक निभाने की।
हिस्टोरिकल-हिब्रू-क्रिस्टलाइज़ेशन के अनुसार, भेड़ों की व्यापक देखभाल एक प्रमुख दायित्व है; परन्तु एक भटका हुआ जीवन भी परमेश्वर के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि उसे खोजना शास्त्रीय नैतिकता का मानक बन जाता है। धर्मशास्त्री हेनरी, बर्न्स और Clarke के उद्धरण सीमित रूप में लक्षित हैं ताकि मूल संदेश दबे नहीं।
संक्षिप्त टिप्पणी: एक unified दृष्टिकोण
यह वचन हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का प्रेम व्यक्ति-के-परिवार में फैला हुआ है—हर खोए हुए मन की खोज में ईश्वर की चंचल-उत्सुकता है। समुदाय भी उसी प्रेम को अपनाए, जब एक सदस्य भटक जाए तो समूह मिलकर उसे सही रास्ते पर लौटाने का ध्येय रखें।
आध्यात्मिक जीवन के लिए छोटा devotional
जब आप किसी कमी या खोएपन से उबरते हैं, तो यह याद रखें कि आप परमेश्वर के दिल के नज़दीक हैं। आप भी किसी भटके हुए के लिए आशा की रोशनी बन सकते हैं। एक-दूसरे के साथ सचेत रहें, क्योंकि प्रेम सच्ची खोज का आधार है।
टेक्निकल नोट्स: पवित्र-वाक्यों से जुड़े छोटे उद्धरण
यदि आप चाहें तो मैथ्यू हेनरी, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से संबंधित संक्षिप्त पंक्तियाँ देख सकते हैं; इनमें उनके विचारों के संकीर्ण अंश नीचे संदर्भित होंगे:
अनुदेश: स्वतंत्र उद्धरण उपलब्ध होते हैं परंतु यहाँ पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दिए गए हैं; आवश्यक हो तो पाठक उनके कार्यों के विशिष्ट अंश देखने के लिए संदर्भ-जांच कर सकते हैं।