मत्ती 18:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा, ‘हे स्वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूँगा।’

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मत्ती 18:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 18:26 — धीरज धरकर दास का उत्तर

पद का संदर्भ: इस व verse में दया और क्षमा के लिए वेतन-याचना नहीं, बल्कि एक कठोर परिस्थिति से जुड़ा मानवीय प्रभाव दिखता है। इस अध्याय में यसू-प्रेम और पारस्परिक दायित्वों की बात होती है: एक दास ने अपने स्वामी के प्रति ऋण के भार से दबकर गिरकर विनय किया कि वह सब कुछ चुका देगा। यह घटना क्षमा के कारण और दया की सीमा को उजागर करती है।

मुख्य अर्थ

यह वाक्य दास के विनय-भाव को दर्शाता है: वह अपने स्वामी से धीरज धारण कर सब कुछ चुका देने की प्रतिज्ञा करता है। इस क्षण में दया और इच्छाशक्ति के बीच संघर्ष उभरता है—क्या वह ऋण चुकाने में समर्थ होगा, और स्वामी की कृपा कहाँ तक सीमित है? यह दृश्य बताता है कि माफ़ करने की योग्यता संकल्प और दरियादिली पर निर्भर है, और संवाद में शक्ति-पाठ स्पष्ट रूप से दिखता है कि वास्तविक माफी केवल प्रेम और उन्नत दया से मिलती है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • कर्ज और क्षमा के दायित्व: दास की विनय इसका संकेत है कि मानवीय निर्भरता और विश्वास-पत्र किस प्रकार एक दूसरे के साथ चलते हैं, पर वास्तविक माफी उसी पर उतरती है जो दया दिखाए।
  • धैर्य और मानवीय असफलता: धीरज रखने का आग्रह दिखाता है कि जब हम ऋण के भार तले दबे हों, तब भी उम्मीद और विनम्रता बनानी चाहिए।
  • स्वामित्व और प्रेम के साथ जवाबदेही: पराकाष्ठा पर प्रेम का प्रयोग दिखता है—क्या स्वामी अपनी कृपा को नहीं दिखाते तो स्थिति कैसे बदलेगी?

संलग्नांग पाठ (Cross-references)

1) लूकास 7:40-43: दया और क्षमा की सीमा के बारे में एक समान विचार—कहने और करने की मंशाओं में अंतर।

2) मत्ती 6:12: ऋण-उद्धार और क्षमा का नीतिगत क्रम—हम भी अपने दोषों के लिए क्षमा मांगते हैं, जैसा वे देते हैं।

3) रोम 12:15-21: प्रतिदान से अधिक दयालुता का आग्रह—शत्रु के लिए भी प्रेम और धैर्य दिखाने की सीख।

व्यावहारिक विचार

यह दृश्य हमें स्मरण कराता है कि माफी केवल बोलचाल में नहीं, बल्कि व्यवहार में होनी चाहिए। अगर हम दूसरों से बड़ी चुकौती की उम्मीद करते हैं, तो हमें स्वयं भी कृपा प्रदर्शित करने के लिए तैयार रहना चाहिए। एक क्षमात्मक समुदाय में लोग एक-दूसरे के ग़लतियों को क्षमा करते हैं, ताकि दु:ख घटे और रिश्ते पुनः जुड़ें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

मत्ती 18:26 में दास का विनय और धीरज-भरा शब्द एक उच्चतम नैतिक वास्तविकता पर प्रकाश डालता है: वास्तविक क्षमा वह है जो ज्ञान और प्रेम से प्रेरित हो, न कि केवल कागज़ी प्रतिज्ञाओं से। यह पाठ किसी भी समूह के लिए एक आह्वान है—हम अपने ऋण-बंधनों को पहचानें, धीरज रखें, और प्रेम-पूर्वक कर्म करें।

उद्धरण संकेत: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से कोई ठीक-ठीक शॉर्ट उद्धरण उपलब्ध होने पर उन्हें नीचे उद्धृत किया गया है—

“कहने के साथ-साथ करने का पूरा व्यवहार ही असली माफी है।”

नोट: उपरोक्त पंक्ति केवल संदर्भ के लिए उद्धरण-शैली का उदाहरण है; सटीक वाक्य उनके टिप्पणियों में मिल सकता है, प्रामाणिक पाठ के लिए उनके पूर्ण अनुवाद देखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 18:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस पर उसका संगी दास गिरकर, उससे विनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूँगा।

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और, एक कोढ़ी* ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा, “हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”

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शमौन ने उत्तर दिया, “मेरी समझ में वह, जिसका उसने अधिक छोड़ दिया।” उसने उससे कहा, “तूने ठीक विचार किया है।”

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